वाइपर


कथा ::
वाइपर
नारायणजी

         बरामदाक छज्जा पर राखल वाइपर उतारबा मे जखन सुजान साह केँ असुविधा बुझाएल रहनि, तखन ओ कूदि क' वाइपर उतारबाक जे चेष्टा कयने रहथि, से धमक सुनि पत्नी ई कहैत किचेन सँ बहराएलि रहथि जे स्टूल पर चढ़ि आराम सँ वाइपर उतारी, एहि उमेर मे अपन टांग तोड़ि लेब कोन बुधियारी?वाइपर बिसन के राखल अछि, बिसन एहिना रखैत छल।

       बिसन नौकर छल, जे पछिला डेढ़ साल सँ सुजान साहक घर मे रहि रहल छल। लगभग चौदह सालक बिसन बिहारक ओहि जिलाक छल जाहि जिलाक सम्बन्ध मे सुजान साहक संग आफिस मे काज कयनिहार सिंहजीक कहब छलनि जे जगह त ओ छोट अछि, मुदा, ओहि छोटछीन जगहक कतेको आईएएस आ आईपीएस सरकारक नीक-नीक पदसभ पर कार्यरत अछि। सिंहजीक इहो कहब छलनि जे मिथिला पेंटिंग्स लेल प्रसिद्ध ओहि जिलाक पेंटिंग आब अनेक जीवनोपयोगी वस्तुसभ पर बनि आ हस्तनिर्मित आर कतेको कलाकृति सभ संसारक बाजार मे अपन आकर्षणक बल पर पताका फहरौने अछि। से, ओहन जगहक रहनिहार आ सुजान साहक घर मे काज कयनिहार बिसन चलि गेल।

     बिसन परसू चलि गेल। कोरोना संकट की आएल, शहर मे महामारी आबि गेल। शहर धीरे-धीरे खाली होबय लागल। टीवी आ अखबार कहय लागल जे शहरक अनेक लोक विदेश सभ सँ आएल कोरोनाग्रस्त लोकक सम्पर्क मे अएला सँ कोरोनाग्रस्त भ' रहल अछि, आ मर' सेहो लागल अछि। हास्पिटल मे रोगीक लेल जगह नहि भेटि रहल अछि। आ कतेको एहन मालिक त घर मे काज करय अबैत ओहन नौकर सँ काज लेब सेहो बंद क' देलनि अछि जे बाहर सँ आबि घर मे काज करैत अछि।   

     सुजान साह लाख बुझयबाक चेष्टा कयने रहथि बिसन केँ अपन घर नहि जयबाक लेल, जे एतहि ओ सुरक्षित रहि सकैत अछि। अस्पताल-दवाइ अछि एत'। देहात मे की अछि? एत' कोनो अस्पताल मे इलाज करा' देबाक ओ सामर्थ्य रखैत छथि।मुदा, बिसन नहि मानने रहय।

     सुजान साहक ई कहला पर जे एखन बस नहि चलैत अछि, ट्रेन नहि चलैत अछि, ओ जयबे करत त कोना जायत?  मुदा, बिसन एकेठाम जिद्द ठानि देने रहय जे ओ अपन घर जायत।जयबाक लेल नहि कोनो सवारी भेटतैक त पयरेँ चलि जायत, आब ओ किन्नहुँ नहि रहत।

     बिसनक कहब भेल रहैक जे मालिक, घर सँ जखन चलल रही, त घर नहि मोन रहल, एहि अनभुआर शहर केँ मोन पाड़ैत आएल रही। अपन घर अनभुआर नहि होइत अछि मालिक! विपति मेे घर मोन पड़ैत अछि। फिरैतकाल सगर बाट अपन ओहि घर केँ मोन पाड़ैत जाएब जत' जनमि नमहर भेल छी।

     सुजान साह अपन बरामदा पर सँ रेल लाइन पर लोकक धर्रोहि केँ देखैत रहलाह जे अपन-अपन गाम जाए रहल छल।गाम सँ अबैत एना नहि देखाएल रहनि कहियो, झुंड मे, जेना जाइत देखाए रहल छनि लोकसभ। आगमन नहि पलायन देखाइत अछि लोक केँ, आ ओ स्थान जत' कोनो वस्तु रहैत अछि। आ हटि गेने ओ रिक्ति मोन रहैत अछि सर्वथा जत' अपन ऊष्माक संग ओ वस्तु रहैत छल, जाहि पर अपेक्षित ध्यान नहि देल होइत छल, सुजान साह सोचने रहथि।

     सुजान साह झुंड मे लोकसभ केँ जाइत देखैत इहो सोचने रहथि जे एहिना कोनो झुंड मे सन्हिआएल जाइत हैत बिसन।हुनकर अन्तरात्मा तत्काल किलोल क: उठल रहनि, 'बिसन फिरि आ '। बिसन नहि आओत। सुजान साह भावुक भ' गेल रहथि।

     सुजान साह कोनो तेहन साहित्यिक लोक नहियो रहैत थोड़ेक साहित्यिक पुस्तकसभ पढ़ने अवश्य छथि। हुनका मोन पड़ल रहनि कहियोक पढ़ल नसीरुद्दीनक  एकटा खिस्सा। एकदिन नसरुद्दीन सड़क पर जाइत रहथि। हुनका हाथ मे एकटा खाली झोड़ा रहनि। ओ झोड़ाक संग अपन दुनू हाथ आकाश दिस उठाय बाजथि जे अल्लाह, एहि खाली झोड़ा मे किछु द' दैह! तखनहि क्यो पाछू सँ आएल आ हुनका हाथ सँ ओ खाली झोड़ा झपटि पड़ाय गेल। नसरुद्दीन साह आब ओहि पड़ाएल जाइत झोड़ा झपटिनिहारक पाछू दौड़ैत हकमैत बाजल करथि जे अल्लाह हमर ओ खाली झोड़ा दिआए दैह!

     सुजान साह केँ बिसन मोन पड़ैत रहलनि जे ओ आओत ?आब ओ नहि आओत।

     सुजान साहक कैम्पसक भीतर ,खाली गैरेज मे बिसन रहैत छल। ओकरा लग सामाने की छल? एकटा आम बिहारी नौकर जकाँ एकटा बिछौनाक चद्दरि, तकिया, एक जोड़ हवाइ चप्पल, आ देह मे पहिरने रहबाक अतिरिक्त एकटा शर्ट-बनियान। अपन देश जयबाककाल ओ ओकरा एकटा फाटल बैग देने रहथि, जाहि मे ओ अपन सभ सामान समेटि माथ पर लेने रहय आ चलि गेल रहय। मुदा, जयबा सँ पहिने ओ हुनका आ हुनकर पत्नी केँ पयर छूबि प्रणाम अवश्य कयने रहय। से, शहरक लोक जेना ठेहुन छूबि प्रणाम करैत अछि, तेना नहि, खूब झुकि क ' , आ तखन अपन संकल्पित आँखिएँ गेट सँ बहराय गेल रहय।


प्रतीकात्मक छवि

सुजान साह पत्नीक संग ठाढ़े रहि गेल रहथि, तकैत। हुनका लेल हुनकर अपन कैम्पसक भीतरक चिकूक गाछक ठाढ़ि पर बैसल एकटा छोटकी चिड़ै , हवाक झोंकी पाबि उड़ि गेल रहय।आ ठाढ़िक फुनगी डोलि उठल रहय। से एखन धरि डोलैत देखाइत रहय। फेर ओ चिड़ै आओत ? नसीरुद्दीन केँ खाली झोड़ा भेटलनि? आओत ओ चिड़ै फेर जे देखाएल छल कने पहिने धरि?

     बिसन मामूली पढ़ल-लिखल छल। आ से एतेक, जे कहुना अपन दस्तखत करब जनैत छल, जकरा सभ्य समाज मे साक्षर कहल जाइत अछि।

     बिसन सँ सुजान साह केँ अपना कोनो तेहन गप नहि होइत छलनि सिवाय कोनो काज करबाक आदेश देब छोड़ि। गप बिसन केँ हुनक पत्नी सँ होइत छल। स्वाभाविक छल जे ओ स्वयं भरि दिन घर सँ बाहर रहि आफिस मे जे बितबैत रहथि।बिसन हुनकर पत्नीक लग अपन सुख-दुखक चर्च कयल करैत छल। जेना, ओ बिहारक ओहि जातिक लोक नहि छी, जाहि जातिक कहियो मुख्यमंत्री भेल रहथि आ चारा घोटाला मे फँसि एखन जेल मे बंद छथि। ओ ओहि जातिक थिक, जाहि जातिक एखन मुख्यमंत्री छथि। मुदा, से छथि केवल भोटकालक लेल।भोट लेल हुनकर दादा केँ किछु रुपैया भेटि जाइत छनि आ दादा जातिक गुमान पर भोट दिन सपरिवार जाए भोट द' अबैत छथि।तकराबाद  केओ तकनिहार नहि। भाइजी आइए पास रहय, मास्टरी बहाली जे भेल रहैक, से मुख्यमंत्रीक जातिक रहय तेँ बहाली भ' जयतैक, मुदा, रुपैया लगबाक रेट मे कनियो ढील नहि भेटलैक। दादा केँ रुपैया नहि रहनि। मुखिया कहलकैक जे अपने कोन बिनु रुपैयाक भोट देलियैक? आ भाइजी केँ नोकरी नहि भेलनि। भाइजी एखन गोवा मे सिक्योरिटी गार्डक काज करैत अछि।

           बिसन जहिया आएल छल, ओहिदिन मे सुजान साह लग अपन मोटरगाड़ी रहनि। गाड़ी रहनि त ड्राइवर सेहो रखने रहथि।बेटा-बेटी सभ स्कूल मे पढ़ैत जाइत रहनि। बेटी बियाहक बाद अपन पति संग सासुर मे रहय लगलीह।आ दुनू बेटा मे एकटा न्यूजर्सी आ एकटा कैलिफोर्निया मे छथि। बेटा दुनूक कहब भेल रहनि जे हुनकर पड़ोसक सिंह साहब गाड़ी हटाए देलनि, ड्राइवर हटि गेल। आब त फोन करू आ पाँच मिनट मे ओला आ उबरक गाड़ी गेट पर हाजिर होइत अछि। से, सुजान साह सेहो गाड़ी हटाए देने रहथि।

         मुदा, बिसन जहिया नबेनब आएल छल, ओहिदिन मे सुजान साह केँ गाड़ी रहनि आ अपन कैम्पसक फाटक पर गेटमैन सेहो रहनि, जे गेटक भीतर प्रत्येक अएनिहार-गेनिहारक प्रति जतबैक सतर्क रहैत छल, ओतबैक तत्परता सँ गेटमैन हुनकर गाड़ीक, गेट लग अबितहि फाटक सेहो खोलैत छल आ गाड़ीक कैम्पस मे अएलापर फाटक बंद करैत छल। से, बिसनक अएला सँ सुजान साह आब बिसन सँ कराबय लागल छलाह आ गेटमैनक छुट्टी क' देने रहथि। एतेक भेल रहनि जे गेटमैनक रहैत गाड़ी सँ अबितहि गेटमैन फाटक खोलैत छल, आ आब गाड़ी सँ अएला पर बंद फाटक केँ खोलबाक लेल ड्राइवर केँ हार्न बजाबय पड़ैत छलैक, से ताधरि, हार्न सुनि बिसन बरामदाक ग्रिल खोलि अबैत देखाए नहि जाइत छल। से, ओहिदन आफिस मे एकटा पार्टी भेल रहैक। खयबा-पिबाक एकटा नमहर दौड़ चलल रहैक।सुजान साह अपन गाड़ी सँ बेस रतिगर केँ डेरा पर आएल रहथि।फाटक बंद रहनि, आने दिनुका जकाँ। ड्राइवर गाड़ीक हार्न पर हार्न बजेने चलि जाइत रहय, मुदा बिसनक कोनो पते नहि। बिसन गेट फोलबाक लेल आएल त रहय, मुदा किछु देरी सँ आएल रहय। कने देरी सँ फाटक खूजल रहय। गाड़ी कैम्पस मे ढुकितहि, गाड़ी सँ उतरि सुजान साह आन दिनुका जकाँ गाड़ी सँ तत्काल अपन लैपटॉप नहि ल' गेटक खूजल फाटक लगबैत बिसन केँ पकड़ि मुक्का आ लात सँ मार' लागल रहथि। ई बुझि जे बिसन गेटक फाटक खोलबाक लेल एतेक देरी सँ किएक आएल? बिसन केँ मारैत देखि ड्राइवर ई बुझि जे सुजान साह अर्थात् मालिक एखन हैंगओवर मे छथि, बिसन केँ आर बेसी मारि सँ बचौने रहय। मुदा,ड्राइवर ई देखि चकित भेल रहय जे मारि खाइत बिसन चिचिआएल नहि रहय। प्रतिरोधक त कोनो बाते नहि, मारि खाइत बिसन अपन दुनू हाथ ऊपर दिस उठौने सेहो नहि रहय जाहि सँ मालिक अर्थात् सुजान साह केँ नहि बेसी त कनियो चोट लगितनि। माथ पर मुक्का सँ मारल जयबाकाल अपन दुनू हाथ सँ बिसन अपन माथ केँ झाँपि लेल करय। प्रात भेने सुजान साह केँ चाय देबाक लेल जखन बिसन गेल रहय त सुजान साह तखन गौर सँ ओकरा देखने रहथि। हुनकर रातुक मारि सँ बिसनक ठोर फूटि गेल रहैक, जे तखनहुँ फूलल छलैक।मुदा, बिसन कोनो शिकायति नहि कयने रहय। ओ अपन मालकिन लग सेहो कोनो शिकायति नहि कयने रहय। मटन कीनि अनबाक लेल पाइ लैत सुजान साहक स्नेहपूर्वक कहला पर एतबैक बाजल रहय जे मालिक, पहिने जतय रही, ओ मालिक अपनहि सँ मटन कीनि आनथि, मुदा, ओहि मटनक महक बड़ खराब रहैत छलैक।

         बिसन केँ अबितहि सुजान साह गेटमैन केँ हटाय देने रहथि, गाड़ी आ ड्राइवर केँ हटाय देने रहथि, से सभ कोनो तेहन बात नहियो होइत ओ पोछा लगबयबाली दाइ केँ सेहो हटाए देने रहथि जे बर्तन सेहो माँजल करनि। आ खेनाइ बनाएब सहित से सभटा काज बिसन सँ कराबय लागल रहथि। से, एतेक रास काज एकसरे बिसन सँ करयबाक लेल बिसनक बिनु कोनो अतिरिक्त मांगक अपनहि अपन मानवता केँ ध्यान मे राखि आ ई सोचि जे बारह सय किलोमीटर दूर सँ बिसन पाइये कमयबाक लेल आएल अछि, ओ बिसनक विविध सेवा आ श्रम केँ देखैत ओकर दरमाहा मे बढ़ोतरी क' देने रहथि। आ बिसन सभ काज करैत मगन रहय लागल रहय।

     बिसन एकदिन वाइपर सँ फर्श पर पोछा लगबैत कहने रहय जे मालिक, सीटी सेंटर मे एकटा नया तरहक वाइपर अएलैक अछि। छैक त एहने, मुदा ओहि वाइपर केँ नमती मे छोट आ पैघ कयल जाय सकैत अछि। संगहि ओहि वाइपर मे एकटा आर खासियत छैक जे पोछा लगबैत कालक फर्श परहक पानि वाइपरक डंटाक छोर पर लागल स्पंज सोखि लैत छैक। आ डंटा मे लागल एकटा हूक केँ ऊपर माथे कयला सँ सोखल सभटा पानि कोनो बाल्टी मे उगीलि दैत छैक। आ फर्श जल्दी सुखाय जाइत छैक। बाल्टीक पानि आराम सँ फुलबारी मे उझीलि आबि सकैत छी। वाइपर ओना महग छैक, लेकिन बढ़िया छैक। आ एकटा रवि केँ सुजान साह खान मार्केट सँ ई वाइपर खरीद अनने रहथि, जे वास्तव मे बढ़िया छल। आ जकरा बिसन एतेक हिफाजति सँ राखल करैत छल।

     बिसन असल मे मानैत छल जे ओहन वस्तुसभ, जाहिसभ सँ घरक कामकाज कयल जाइत अछि, घरक निमूँह सदस्य थिक ,जे सभ कतबो दुर्गंजन सहि कोनो शिकायति नहि करैत अछि।बिसन इहो बजैत छल जे एहन वस्तुसभ केँ खरीदी अमीर जकाँ आ राखी गरीब जकाँ ओरिआए क' , जे बेसी दिन धरि संग दैत रहय। बिसनक इहो कहब छलैक जे खाली बाल्टी, झाड़ू सन वस्तुसभ केँ काज कयलाक बाद एहन जगह पर नहि रखबाक चाही जे घर सँ कतहु जयबाकाल नजरि पड़ि जाय। तेँ बिसन वाइपर केँ काज कयलाक बाद सुरक्षित जगह पर, नजरि सँ दूर एना' राखल करैत छल।

     बिसन एखन कतय हैत? पयरेँ अपन देश जाइत हैत, जयबाक साधन कोन?, सुजान साह सोचैत रहथि। आ चिन्ता मे डूबल ओ ओहि वाइपर केँ हाथ सँ पकड़ि फर्श पर पानि टघराए पोछा लगेबाक लेल ठाढ़ भेल रहथि, जे सात फीट ऊपर छज्जा सँ एखन उतारने रहथि। मुदा, वाइपर छुबितहि अपना मे अत्यन्त निर्बलताक अनुभव करैत सोफा पर धम्म सँ बैसि गेल रहथि।

     वाइपर ओतहि छल, देबाल सँ अड़काए क' राखल, अपन समस्त उत्सुकताक संग। सुजान साह मे वाइपर छूबाक सामर्थ्य मुदा मरि गेल रहनि।

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नारायणजी मैथिलीक सुप्रतिष्ठित कवि-कथाकार छथि। 'हम घर घुरि रहल छी', 'अंगना एकटा आग्रह थिक', 'धरती पर देखू', 'जल— धरतीक अनुराग मे बसैत अछि' शीर्षक सँ हिनक चारि गोट काव्य-संकलन आ 'चित्र' शीर्षक सँ एकगोट कथा-संकलन दृश्य मे छनि। एकर अतिरिक्त विभिन्न पत्र-पत्रिका मे रचनासभ प्रकाशित-प्रशंसित-अनूदित। 'ई-मिथिला' पर हिनक पूर्व-प्रकाशित कार्य सभक लेल एतय देखी : चौमुख दीप | आकाशलीनाएकसरि नहि छी
वाइपर वाइपर Reviewed by e-Mithila on June 25, 2020 Rating: 5

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