Friday, November 13, 2015

मनीष झा बौआभाई केर किछु कविता

'बौआभाई' नामसँ मैथिली काव्य जगतमे बेस चर्चित-प्रशंसित मनीष झा वृतिसँ एकटा मल्टीनेशनल कंपनीमे सम्प्रति दिल्लीमे एकाउंटेंट छथि संगहि मिजाजसँ कवि, गीतकार ओ उदघोषक छथि आ मिथिला-मैथिलीक सेवामे लगातार लागल छथि. अहाँ सब हिनक लिखल बहुत रास गीत सुनने होयब मुदा एखन एहि ठाम हिनक पहिल काव्य संकलन 'नीक-बेजाए' सँ किछु कविता प्रस्तुत अछि. हिनका संबधमे एखन एतबे कहब जे व्यक्तिकेँ रूपमे बौआभाई बड्ड नीक लोक छथि मुदा कवि केहन छथि ? तकर निर्णय अहाँपर छोड़ि रहल छी -मॉडरेटर                                  
         
          1.सरगम 
           
               

सद्बुद्धि दिय' सद्ज्ञान दिय' 
 सदमार्ग चलि से वरदान
सरल स्वभाव हो गुणक प्रभाव हो
सहजहि से विद्यादान दिय'

             र 

रहु सत्तत माँ दाहिनी भ' क'
राखु विद्या बैभव द' क'
रहि जतय माँ बनि प्रभावी
रवि समान तेजस्वी भ' क'

              ग 

गहल चरण जे स्वच्छ भाव स'
गति सदगति से पओलक
गला बीच अँहा जकर बिराजी
गायनमे से यश पओलक

          

मनमे आश लगा जे आयल
मनोरथ पूर्ण केलौ माँ क्षणमें
"मनीषक" बिनती सुनु वरदायिनी
मिथिला वास करू कण कणमे

    2. नीक बेजाए 

बेटा छनि वरदानक जोगर 
    नोकरी सेहो सरकारी 
भाए- बहिनमे असगरुआ आ
     संपति अचलकेँ अधिकारी 
कन्यागत सभ होयते अवगत 
     छुटला हेजक- हेंज 
वरागतक मुँह फुजइसँ पहिने 
     गछलनि मोट दहेज
   किछुए दिन बिइइते सबकिछु 
 होमय लगलनि सत्य देखार 
  लोकलाजसँ गुम्मे सदिखन 
फुटनि नहि बोल बकार 
   बुझि हाकिम जे ब'र उठेलनि
से चपरासी छलनि जामए 
   जँ समय अछइते नहिं चेतल तँ' 
           आब की नीक आ की बेजाए 

  3. अप्पन आन

अप्पन आन शब्द अछि तेहेने
    जे बुझना जएत सम्बन्ध घनिष्ठ
आन कहैत देरी मुँह बिचकत
    अप्पन शब्द बुझैत विशिष्ट
बजियौ एक बेर अप्पन -अप्पन
    सटि जायत अपनहि दुनु ठोर
आन बेरमे एहो दुनु टा
    ध' लेत अलगे ओर आ छोड़
फुसियों अप्पन डींग हँकइ छी
   दई छी अनकाके उपराग
बाजि निर्थरक मुँह दुइर करै छी
  सभक अप्पन - अप्पन भाग
  आपकताकेँ बड बड़का लक्षण 
     मिलि बनाउ परिपूर्ण समाज
अप्पन -आनके भेद हटाके'
    सफल करु संकल्पित काज
अप्पनमे सब स्वार्थ भेटत
    अनकामे उपकार
अपना संग संग आन लए जीबु
    सार्थक जीवनकेँ इएह आधार 


सम्पर्क - मनीष झा बौआभाई 
फेसबुक लिंक -https://www.facebook.com/writermanishjha
मोबाइल नo -9717347995
किताब बेसाहु -https://www.sappymart.com/home/89-nik-bejay.html








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