तिरोहित होइत स्त्रीत्व

प्रियंका मिश्रा केर किछु कविता :: 1). असौकर्य  अहाँके  असौकर्य अछि आइ  हमरा मुँह सँ निकसल छोट सन शब्द सँ  मुदा हमरा तँ कनियो ...
- December 05, 2019
तिरोहित होइत स्त्रीत्व तिरोहित होइत स्त्रीत्व Reviewed by e-Mithila on December 05, 2019 Rating: 5

मकड़ी

कथा :: मकड़ी : प्रदीप बिहारी _______________________ सौंसे बजार मे हल्ला पसरि गेलै जे एकटा मौगी अयलैए। सिलाइ-मशीन चलबैत छै। नव-प...
- December 01, 2019
मकड़ी मकड़ी Reviewed by e-Mithila on December 01, 2019 Rating: 5

'जँ अहाँ देखि सकितहुँ'

प्रवीण झाक किछु कविता :: 1). जँ अहाँ देखि सकितहुँ  हे! जँ अहाँ देखि सकितहुँ हमर आँखि मे, बाढ़ि मे दहाइत नेन्नाक पीड़ा; तँ ...
- November 15, 2019
'जँ अहाँ देखि सकितहुँ' 'जँ अहाँ देखि सकितहुँ' Reviewed by e-Mithila on November 15, 2019 Rating: 5
अनेरो ताकि रहलहुँ अछि संवेदना अनेरो ताकि रहलहुँ अछि संवेदना Reviewed by e-Mithila on November 11, 2019 Rating: 5

सम्भावना

कथा :: संभावना : महाप्रकाश ओ आबिते तपाक सँ पुछलनि- “हाथी देखने छह” अर्थ बूझल छह? ओ अपन एहि प्रश्नक संग टेबुलपर झुकि आएल रहथि। हुनकर ...
- November 06, 2019
सम्भावना सम्भावना Reviewed by e-Mithila on November 06, 2019 Rating: 5
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