Friday, July 3, 2015

यात्री जीक आलेख "मैथिलियो-हिन्दियो"


मिथिलावासी हिन्दी नै लिखय, हिन्दी नै पढ़य, बीतल दिनमे सोशल मीडिया आ कार्यक्रम/सेमिनार सबमे बराबर एहि बात ल'केँ लोकमे बहस होइत रहल अछि.उहो आइसँ नहि तहियेसँ जहिया भाषाक आधार पर राज्य सभक पुनर्गठन होइत छल. कहाँदनि मैथिली आ हिन्दी केँ ल' क' सेहो खूब विमर्श चलल छल. ओहि समयमे यात्रीजीक आर्यावतमे एकटा लेख छपल छलनि जाहिमे ओ हिन्दी विरोधी नीतिक खूब निंदा केने छलनि, पढ़ल जाउ - माॅडरेटर.
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हमरा विचारेँ मिथिला प्रदेशक प्रादेशिक भाषाक रूपमे मैथिलियो मान्यता प्राप्त करत आ हिन्दियो. मध्य प्रदेशमे मराठी आ हिन्दी दुनू भाषा प्रादेशिक भाषाक रूपमे मान्य अछि. मद्रास आ बम्बइ प्रदेशमे एहिना एकाधिक भाषाकेँ प्रादेशिक मान्यता प्राप्त छै.

मिथिलाक कोनो अधिवासी पर ओकर इच्छाक विरूद्ध हम मैथिली नै लादब. डाॅ जयकांत मिश्रक सीमा विस्तारक अवांछनीय मनोवृतिक समर्थन हम कैए नहि सकै छी. डाॅ लक्ष्मण झा आ म.म. डाॅ उमेश मिश्रक हिन्दी विरोधी नीति मिथिला निवासी लेल सर्वथा धातक अछि. चाहे जेना हो, शुद्ध वा भ्रष्ट कोनो तरहक हो, मुदा हिन्दी मिथिलाक भीतर घुसिया गेल अछि. की हर्ज एहि सत्यकेँ हम खुल्लमखुल्ला स्वीकार क' ली ? मैथिलीक वर्तमान शब्द-शक्तिसँ नितान्त अपरिचित व्यक्तिक ओकरा बोली मात्र कहि देब जेना छुच्छ प्रलाप अछि, 

तहिना मिथिलाक भीतर पसरैत हिन्दीक अस्तित्वकेँ एकदम्मसँ नहि मानब आँखि मूनि क' माछी घोंटब भेल.
ई भारी शुभ लक्ष्ण अछि जे मिथिलाक कवि आ कथाकार ब्राह्मण आ मुंशीक ओहि पंडिताउ मैथिलीकेँ छोड़ि क' बहुजन समाजक सरल सहज मैथिली दिस मुड़ि आयल छथि. नाटक आ उपन्यास सभमेँ आब हमरा लोकनिकेँ मुजफ्फरपुर, बेगुसराय, सहरसा, पूर्णिया तथा सीतामढ़ी आदिक आँचलिक बोली सभक झलक भेट' लागल अछि. लोरिक, सलहेस, दीनाभद्री आदि वीर पुरूषक दीर्घगाथा हमर सांस्कृतिक धरोहरिक विशिष्ट अंग बनि गेल अछि. सामन्ती दबाव जत' कतहुँ कम भेलैए, मैथिलीक माध्यमसँ लोक प्रतिभा  निखरि अयलै- पछिला तीस वर्षमे मौलिक आ अनूदित उपन्यास, गल्प संग्रहक खूब प्रकाशन भेल अछि. अढ़ाइ-तीन सयक लगभग ओकर संख्या होयत. किछु एहनो उपन्यास अछि जकर तीन-तीन, चारि-चारि संस्करण भ' चुकल अछि. अनेक गल्प आ कविताक अंग्रेजी, हिन्दी, मराठी ,गुजराती रूपान्तर भेल अछि. एक दर्जन व्याकरण ग्रन्थ तथा तीन टा कोश अछि हमरा. प्रकाशित पोथीक संख्या हजारोमे अछि. कविता एक दिस पुरना शैलीमे तैयार भ' रहल अछि , तँ एक दिस अद्यतन टेकनीकमे सेहो.

(एहि आलेखक मैथिली अनुवाद  श्री राजमोहन झा द्वारा कयल गेल छल)

Photo - Gunjan shree


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