निज देश


कथा ::
निज देश 
शिवशंकर श्रीनिवास

दवाइ ल' क' घूरल त' मोन बेचैन भ' गेलै. आब ओकरा बुढ़िया मायक खिस्सा मोन पड़ि रहलैए. जखन बच्चा रहय त' बुढ़िया माय खिस्सा कहै. हँ, वैह खिस्सा.
ओ कहै- बूझलें रे नूनू, त' ओहि गाम मे किछु लोक एहन रहै जकर अगय-बगय त' मनुक्खे सन रहै मुदा ओकरा सभक देह मे राक्षसक वास होइ. मनुक्खक चोला मे ओ सभ बड़ चलाक. ओ सभ मनुक्ख कें अपन जाल मे तेना फँसा लै ओ, जे मनुक्ख एक बेर फँसलाह ओ बुझ' जीबैत रहताह मुदा हुनक सुख-भोग उठि जायत.
से, ओहि गामक राक्षस लोक सभ मालिक कहबै छल ओ सभ मनुक्खे नहि लक्ष्मी केँ सेहो बान्हि रखने छल. नवो ग्रह ओकरा सभक मुट्ठी मे बन्न छलै. ओ सभ जखन ढेकरैत छल त' मनुक्खक टोल मे कतेको केँ चनरा लागि जाइ छलै. के एहन होइत, जे ओकरा सभक मुँह लगैत? जे लागल ओकर अपटी खेत मे परान गेलै. से कतेको केँ.

इम्हर कहियो बाढ़ि अबै, कहियो रौदी होइ. कतेको के जान जाइ आ कतेको के मान दहाइ.
एहि सभ सँ थाकि एक गोटय भागि क' परदेश गेल. परदेश मे ओकर काजुल देह पर सभ केँ लेर खस' लगलै.
की कहियौ, ओहि ठामक लोक काजुल लोकक बड़ बेगरतुत. ओ देश बालूवला देश रहै. बालुएसन बेलसि ओहि ठामक लोक. ओकरा सभ लग काज बहुत छलै. एकरा देखलक त' गसिया क' धेलक. कहाँ दन नून पढ़ा क' खूआ देलकै. चाह मे नसा मिला पीआब' लगलै. ओ देह तोड़ि क' खटय लागल.
से ओकरा संग रहैत ओकर बहुत चीज सीखि लेलक. ओ सभ एकरा सँ प्रसन्न, कारण एकर देहक घाम जाहि ठाम पड़ै ओत' सोना उगि जाइ. एकरा पहिने अजगुत लगै. घाम एकर आ सोना ओकर. 

एक दिन पुरबा हवा बहुत बहलै, एकर मोन बदललै, आ ई ओहि ढेर मे स' एकटा सोनाक ढेप केँ डाँर मे खोसि गाम पड़ा आयल. 
गाम मे खेत-पथार लेलक. कोठा-सोफा बनेलक. राक्षस सन मनुक्ख संग उठार-बैसार भेलै आ ओहो राक्षस भ' गेल. मालिक कहब' लागल. 
इम्हर मनुक्ख सभ त्राहि-त्राहि क' रहल छल. पेटक दुख, घरक दुख आ सभ सँ बेसी चारू-कातक बसातक दुख.
बेरा-बेरीक क' इहो मनुक्ख सभ परदेश पड़ाय लागल. अपन दूनू हाथ ल' क' भाग' लागल.
गाम उदास भेल. खेत-पथार सुन्न होब' लागल. गीति-प्रीति उसर' लागल. पर्व-त्योहार बिसर' लागल.
बूढ़-पुरान, कनियाँ-मनियाँ बाल-बुदरुक सभक ध्यान परदेश टगाँय लागल. फोनक टुनटुनीक आवाज बढ़ि गेल. बैंक मे मिस पड़' लागल. अपन खेतक नवका धानक चूराक सखसीहन होब' लागल. नवका लोक तँ नवानो बिसरि गेल. 
राक्षसक धीया-पूता सेहो एकाएकी सलोकहि अपन सुखक लेल सपरिवार परदेश जाय लागल.
ओ सभ जन-मजदूर वा गरीब मनुक्खक बेटा जकाँ अपन परिवार लेल गाम स' नहि गेल. ई सभ अपन सुख-सेहन्ता लेल गेल.
ई खटनमा लोक जाहि मे  बारहो वरण रहय, सभ धर्मक लोक. श्रमिक रहय. ओकरा सभ केँ जखन अपन-अपन गामक सुरता अबै त' पूरा सिरहाना बोदरि-बोदरि भ' जाइ. मुदा गाम घुरत कोना? माय-बापक आस छल. धीया-पूताक विश्वास छल. तेँ जान-परान लगा क' खटै छल. देह तोड़ै  छल. मोटरी त' गाम पठा दै छलै, आ झरूआ- मरुआ सँ प्राण बचैत छल. जे दुर्गा- पूजा मे गाम जायत  त' नीमन स' खेबै. केओ सोचै फगुआ. त' केओ ककरो वियाह मे. त' एहने सन. आ कहियो- कहियो अबै छल. 

एहि सभक बीच एना भेलै जे मरकीवला कोनो बेमारी अयलै. लगलै जेना पूरा संसार मे उन्टन भ' जयतै. थरथरा गेल संसार. एक- दोसर सँ लोक भाग' लागल. सभ घर पकड़ लागल.
एहि जन-बोनिहारक जीवनक चारू कात साँय-साँयक आवाज होब' लगलै. एकरा सभ ठाम स' सभ बेठाम क' देलकै. काज- धन्धा बन्न. भात- रोटी बन्न. ई सभ हताश जेना डेरायल बच्चा माय लग दौड़ैए, तहिना गाम दौड़ल. कत' रहत? की खायत? कोना कमायत? 
मुदा हाइ रे ओ देश आगू मे सिपाही डण्टा ल' क' ठाढ़ छलै. रस्ता- पेड़ा मे ढाट लागल छलै. आ ई सभ अपन हेंज मे छटपटा रहल छल. चिचिआ रहल छल- गाम...गाम...

आइ सुधीर के सभटा मोन पड़ि रहलैए. मुदा, की ई खिस्सा बुढ़िया माय कहने हेथिन? नहि, सुधीर सोचैए जे ई त' मिथिलाक वर्तमानक खिस्सा छियै आ छियै ई देशक खिस्सा जे एकरा मन मे उचरि रहलैए. 
एहि सँ पहिने सुधीर संग की भेल रहै पहिने से सूनू. सुधीर बेसी डेरा गेल रहय. एहि ' करोना'क महामारीक हाहाकारमे गाम लेल विकल भ' गेल रहय, से अछिये ओ सोचय गाम मे माय छथिन, बाबु छथिन. दूनूक उमेर भेलनि. ओत' के ताकुत करतनि? ओहि दिन चारि बेर बाबू कें आ माय कें फोन कयलक. अन्त मे बाबू कहने छलथिन- बौआ, हम सभ बचि क' रहब, अहाँ कोनो चिन्ता नहि करू. अहाँ सभ देशक एहि लॉकडाउनक स्थिति मे घर मे रहू, सुरक्षित रहू, पढ़ू लिखू, असगर मे रहबाक आनन्द ताकू, बच्चा संगे खेलाउ.
हँ, डेरा गेल अछि सुधीर. ओ दिल्लीक द्वारिका सेक्टर बारह मे अपन फ्लाइट लेने अछि. ड्यूटी बन्द छै. पत्नी श्यामा छथिन. बेटा आर्यन अछि.
एहि डरायल स्थिति मे सुधीर कें अपन पत्नी संग किछु चौल करबाक इच्छा जागल- "श्यामा, आइ स' अहाँ ओइ कोठली मे आ हम अइ कोठली मे."
"वाह!वाह! एहन  सुन्दर विचार कोना जागल." श्यामा बिहुँसैत बजली.
ई सभ गप करिते छल कि आर्यन (बेटा) दौड़ि कोठली स' बहरायल आ कहलक- " पापा यौ ओ मरि गेल."
सुधीर अकचकायल -' के? '
" करोना."
सुधीर हँस' लागल मुदा श्यामा बिगड़लीह- एना किए बजलेँ? हम त' डरा गेलहुँ.
"से कोना बुझलियै? " सुधीर बेटा संग गपक आनन्द लेब' चाहने रहय. 
"बालकोनी सँ नीचा तकलियै. कतौ ने छै, पड़ा गेल"- आर्यन डराइते कहैत माय दिस तकलक. ओ अपना मने मायक डेरा जयबाक बात सुनि गप केँ बदलने रहय. 
श्यामा लपकि क' आर्यन केँ दुलार करैत कोरा मे ल' लेने छलीह. ओ पाँच सालक बच्चा आर्यन आब अपन माय केँ प्रसन्न कर' लागल छल- "मम्मी हम तोरा संग पार्क जायब. पापा संगे नै जायब."
"हँ, हँ अहाँ हमर नूनू बेटा छी ने. अहाँ हमरा संगे जायब."
"त' चलू ने मम्मी. आब साँझ हेतै. कपड़ा बदलि दे ने." कहि आर्यन मायक कोरा स' उतरि अपन पसिन्नक कपड़ा ताक' कोठरी गेल. 
"आब श्यामा मैडम आब आर्यन केँ पोलहा क' देखाउ, देखी केहन माय छी." सुधीर बिहुँसैत व्यंग्य कयने रहय. 
" हँ, से त' ई बापेक बेटा छी. एक नम्बर केँ जिद्दी, मुदा जखन एकर बाप कें पोलहा लै छियै तखन ई त' बेटा छी." श्यामा पति दिस कनखी मारैत तकने रहथि. 
तखनहि बाहरमे जोर स' आवाज भेलै- ' फटाक..|'
सुधीर बुझलनि जे नीचा मे कोनो गाड़ीक पहिया फटलैए. तथापि ओहि डरायल स्थिति मे डेरा त' गेबे कयलाह. श्यामा सेहो चौंकलीह आ आर्यन त' चीत्कार करैत माय लग दौड़ल. श्यामा ओकरा लपकि क' छाती मे साटि लेलनि. ओ एकदम सँ सुटकि गेल. सुधीर उठि बालकोनी मे जा क' नीचा तकने रहय. नीचा मे बलवीर चौकीदार के ठाढ़ देखलकै, पुछलक - "की बलवीर, की फुटलै?"

"समीर बाबूक गाड़ीक अगिला चक्का फुटलनि हन सर." बलवीर ऊपर ताकि कहलक.
"ओ." सुधीर केँ से बुझि जेना थोड़े सकून भेटलै. आ ओ चट द' श्यामा लग आबि कहलक- २५६ नम्बर मे जे समीर रहै छथि हुनके गाड़ीक पहिया फटलनिहेँ." आर्यन गप सुनि बाप दिस तकलक आ पुनः मायक छाती मे सुटकि गेल. आर्यन बड़ी कालक बाद सहज भेल.

राति मे खा-पी क' सभ सुतल मुदा सुधीर के निन्ने नहि होइ. बेर-बेर गाम मोन पड़ै. माय-बाबू, घर-आङन, स्कूल, चौराहा, गोंसांइ पोखरि, लखनदइ धार. आदि..आदि.
गाम मे मड़वा पर सूतल अछि. हँ, कारी राति छै. बरसातक समय छै. चारूकात झिंगुर- दादुर बाजि रहल छै. बीच- बीच मे पपीहाक मधुर स्वर डराउन राति केँ जेना कने दबै छै.
बसाते कने तेज भेल. विजुरी छिटकलै, मेघ तरकलै आ सुधीरक निन्न टुटलै ओ देखल दूर मे बड़ विकट आकृति मे चमकैत केओ ठाढ़ अछि आ कहि रहलए - "हम छी होकईंयाँ करोना....."
सुधीर डरा गेल. मायक देह मे सुटकि गेल .ओ घीघीआइत मायक देह मे सटल जा रहल छल. 
इम्हर जोर-जोर स' डोलबैत श्यामा उठेलथिन तखन सुधीरक निन्न टुटलै. कने काल त' होइ गामे मे छी किन्तु चेतना जगलै. उठि क' बैसल, कहलक- "सपना देखलियै.'
"की...? "
"ओहिना धीया-पूता मे जेना डराइ, वैह सपना."
"गेरूआ कें छाती मे किए साटि रहल छलियै?"
श्यामाक गप सँ हँस' लागल सुधीर, कहलक - "हम त' अपना मोने आर्यन जकाँ अपन मायक देह मे सुटकि रहल छलियै."
"एँह , अहूँ त' बच्चा भ' गेलहुँ. श्यामा कहलनि."
"हँ श्यामा, मनुक्ख भीतर सँ सभ दिन बच्चे रहैए."
"की देखलियै सपना "- श्यामा पुछलनि.
सुधीर हँसैत सभटा सुनेलनि. सुधीर गप पर श्यामा सेहो हँस' लगलीह- "हमहूँ कएक दिन बच्चाक सपना सुनै छियै."
थोड़े काल दूनू चुप्प रहल पुनः कने कालक बाद सुधीर बाजल-  "श्यामा, एना जँ बुझितियै तँ गामे पड़ा जयतहुँ."
"नहि... नहि गाम मे त' आर बड़का समस्या छै."
"की, कोन समस्या छै?"
"ओत' कोनो इलाज छै?"
"आ एत' कोन दवाइ छै एकर?"
"जैह छै, किछु त' छै." श्यामा बजलीह.
"जाबत एकर कोनो खास दवाइ आ कि वैक्सीन नहि ओतै ताबत यैह सभ सँ अलग घर मे बन्द रहू."
"हँ तेँ ने लॉकडाउन क' देलकैए." श्यामा कहलनि.
"की कहू श्यामा, बाबू त' ठीक छथि मुदा मायक स्वर एकदम उदास - उदास छलै." सुधीर चिन्तित होइत बाजल.
"माय, हमरा सभ दिस सँ  चिन्तित छथि.... |"
"हँ" कहि सुधीर चुप्प भ' गेल.
"अच्छा एखन सूतू. एखनहु बड़  राति छै. असल मे अहाँ बहुत डरा गेल छी. नहि डराउ, मात्र सुरक्षित रहबा पर ध्यान दीऔ." कहि श्यामा उठलीह आ एक गिलास पानि अनलनि "- हे लीअ' पानि पीबि निश्चित मोन क' क' सूति रहू. बच्चा मे हम सभ सपना देखिये त' हमरा माँ पानि दीअय पीबै लेल."
"से त' हमरो दीअय''.- कहैत सुधीर पानि पीलक आ पड़ि रहल मुदा निन्द त' बहुत दूर जेना चलि गेल छलै.

२२.०३.२०२०के जनता- कर्फ्यू रहै आ २४.०३.२०२०सँ पूरा देश मे लॉकडाउन भ' गेलै. माने सभ अपन घर मे रहू. आवश्यक कार्य लेल बाहर निकलि सकै छी सेहो अपना केँ सुरक्षित करैत.
रेलगाड़ी बन्द, हवाइ उड़ान बन्द, सरकारी आ पब्लिक ट्रांसपोर्ट बन्द, मेट्रो बन्द, यातायात पूर्णतः ठप्प. 
२६.०३.२०२० के साढ़े तीन बजे चाह पीबि सुधीर टीवी पर समाचार देख' लागल.-

अरे, ई त' जुलुम भ' गेलै. बिहार आ यूपीक लाखो श्रमिक दिल्ली आनन्द विहार स्टेशनक बाहर जमा भ' गेलै. रेलगाड़ी चलब बन्द छै किन्तु ओ गाम जेतै, कतेको गोटय पैरे विदा भ' गेल छै, कतेको रिक्शा सँ, कतेको गोटय साइकिल सँ, पुलिस बुझा रहलै' ए. रोकि रहलैए.

की भ' गेलै! सभ किछु बन्द, काज-धन्धा बन्द. फैक्ट्री जाहि मे काज क' क' रहै छल. एकरा सभ कें बाहर क' देलकै. जे फूट-पाथ पर सुतै छल ओकरा केओ सुत' नहि दै छै. काज बन्द छै पाइ कत' स' ओतै! मकान मालिक बाहर क' रहलै'ए.
चारूकात 'कोरोना'. जेना बच्चा केँ  कहियो- 'बुइया' ओ डरि जायत. तहिना ओ सभ डरि गेल अइ. सभक बुद्धि हरा गेलै. सभ केँ अपन मातृभूमिक खींचि रहलै'ए. जेना बच्चा डरा क' माय दिस दौड़ै'ए तहिना ओ सभ अपन भूमि पर जेबाक लेल विकल भ' रहलैए.
टीवीक प्रत्येक चैनल समाचार द' रहलै'ए. राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता ओ अन्य क्षेत्रक विशेषज्ञ लॉकडाउन धज्जीक उड़ि जेबाक बात कहि रहलाह. सरकार केँ दूसि रहलाहे , केओ श्रमिक सभक व्यथा सेहो कहि रहलाहे किन्तु , एहि सँ देश मे कोरोना संकट भ' जायत सेहो कहि रहलाहे. 
सुधीर सेहो ई समाचार सुनि रहल'ए. 
" ई मजदूर सभ केँ गाम छोड़ै ले के कहलकै जे भागि रहल'ए. " श्यामा कहलनि.
"आ, अहाँ- हमरा के कहने छल भगै ले.?" सुधीर बाजल.
" त' हम सभ कहाँ एखन भगै छी.... |'
" त' अहीं जकाँ सुविधा प्राप्त क' क' एत' अयलै? "
"यौ अहाँ की भ' गेल'ए. एना राति सँ गाम-गाम किए करैत छियै? एहना स्थिति मे ई सभ गाम कोना जेतै? सभ संक्रमित भ' जेतै. फेर देश के स्थिति की हेतै? " श्यामा सुधीर दिश तकैत बजलीह.' 
सुधीर चुप्प भ' गेल. ओकरा बाहर दवाइ ले जेबाक छै. आर्यनक एसनोफीलियाक दवाइ सधि गेल छै.
ओ उठल पैंट-सर्ट पहिरलक, टोपी लगेलक, सेनेटाइजर लेलक आ डाक्टरक पूर्जा ल' क' विदा भेल.
"दवाइ लेब' जाइ छियै?" श्यामा पूछलकै.
"हँ ल' अबै छी-  एखन आर्यन सूतत अइ. जागत त' कठिन भ' जायत" - सुधीर कहलक.
"हँ, गाड़ी स' जेबै?" श्यामा पुछलकै
"एखन गाड़ी केँ जा देतै आ छैहो कतेक दूर, एत' सँ दस मिनट' बारह सेक्टरक मोड़ पर दोकान मे ल' लेबै " कहि सुधीर विदा भेल.

दवाइ ल' क' घूरल तँ गोलचक्कर वामा जे फूट-पाथ छै ओत' पाकरि गाछक नीचा एकटा तेरह-चौदह बरखक बच्चा हबोढकार भेल कानि रहल छलै. सुधीर आश्चर्यित होइत चारू कात तकलक. कतौ- केओ ने छल. चारू कात सुन्न छलै मात्र ओ बच्चा ओत' कानि रहल छल. 
सुधीर ओहि बच्चा लग गेल ओ ओहि बच्चाक कानब सँ बुझलक जे ओ एकरे दिशका छियै. सुधीर लग जा कहलक- " किए कनैत छेँ? "की भेलौ?"
सुधीर ओहि बच्चा सँ बूझलक जे ओ एकटा छोट-छीन रंग- फैक्टरी मे काज करै छल. फैक्टरी बन्द भ' गेलै. मालिक निकालि देलकै. संगी सभ आगू चल गेलै आ ई भोतिया गेल.
सुधीर ओकर रामकहानी सुनि व्यथित भ' उठल. पुछलक-
"कोन गाम घर छौ?"
"केथाही." ओ बच्चा कहलक.
"वैह केथाही ने जे मधुबनी स' जाइ छै?"
"हँ.. हँ.." ओ बच्चा उत्साह स' बाजल.
"आ हमर घर रामपट्टी अइ."
" तखन त' अहाँ हमरे गाम लगक छियै.
" हँ बौआ. मुदा तोँ  ई कह जे रेलगाड़ी बन्द छै, तखन कोना जेबही?"
" पैरे. ओ बच्चा कहलक. 
"एत' पहिने डेरा कत' छलौ? "
"ओही कारखाना मे. आब त' मालिक निकालि देलक." 
" एतबे उमेर मे नोकरी कर' किए अयलें?"
" माय-बापक बेराम रहै छलै. काज नहि कयल होइ छलै. हम दू भाइ-बहिन छियै. बहिन हमरा स' छोट छै." कहि ओ बच्चा पुनः जोर-जोर स' चिचिआय  लागल.
सुधीर पुनः ओकरा पोरबोधैत चुप्प कयलक आ कहलक - "तोँ हमरा संगे चल. हमरा एकटा फूट कमरा अइ, ओहि मे सभ व्यवस्था छै. हम रोज खाइ ले देबौ. माय-बाप सँ फोन पर गप करा देबौ. "चल पहिने जाँच करा दै छीयौ."
ओ बच्चा चुप्प भ' गेल. सुधीर संग अपन झोड़ा उठा विदा भेल, किछु दूर चललाक बाद ओ बच्चा पुनः चिचिआ क' बाजल- " नै... नै अहाँ ठकै छी. हम गाम जायब." कहि ओ जोर सँ भागल.

सुधीर उनटि  क' देखलक. ओ बच्चा निछोह भागल जा रहल छल. ई अवाक् भेल ठाढ़ ओकरा जाइत देख रहल छल किन्तु एकर मन ओकर संगै भागि रहल छलै.

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शिवशंकर श्रीनिवास मैथिलीक सुप्रतिष्ठित कथाकार छथि। त्रिकोण, अदहन, गामक लोक आ गुणकथा हिनक प्रकाशित कथा-संग्रह छनि। एकर अतिरिक्त एकटा आलोचनाक पुस्तक 'बदलैत स्वर' शीर्षक सँ प्रकाशित। मैथिली कथा संचयन(एनबीटी), परिचय शतक (मधुप काव्य) आ कतेक दिनक बाद (किरण काव्य)क सम्पादन आ वर्तमान मे मैथिली कथा-साहित्यक इतिहास लेखनक क्षेत्र मे सक्रिय। विभिन्न पत्र-पत्रिकादि मे कथा आ कथा सभक अनुवाद प्रकाशित। हिनका सँ sshivshankarjha@gmail.com पर सम्पर्क कएल जा सकैत अछि।

निज देश निज देश Reviewed by e-Mithila on May 08, 2020 Rating: 5

3 comments:

  1. निज देश एक मारमिक कथा थिक।अपन गाम घर स्वर्गहुसँ सुन्दर होइछ।कथाक प्रवाह आ सामयिकता एकर महत्वके देखबैत अछि।सँगहि गामघरमे प्रचलित शब्दावलीक प्रयोग एहि कथाकेआरो महत्त्वपूर्ण बनबैत अछि।शिवशंकर जी समयक सँग आ समयक पारक कथाकार छथि..हमर शुभकामना

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  2. आजुक त्रासद समयक पीड़ा,लचारीमे उपजल नौस्टैलजियाक नीक प्रस्तुति । ईहो मनुक्खक सुविधाखोजी/ सुविधाभोगी वर्गक त्रासदी । विपति पड़ने मायेक कोरा लोककें मोन पड़ैत छैक ।
    शिवशंकर जी मैथिली कथाक 'ब्रांड एम्बेसडर'छथि ,हिनक अपन विशिष्ट शैली छनि।

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