पाछू जँ नहि अंक तँ एसगर सुन्ना की ?


|| कमल मोहन चुन्नू केर किछु गजल ||


१). 

सदिखन सजल-साजल रही, वन हरित फूल अमार सन
हँसिते रहू एहिना सदति, टटका हवाक दुलार सन।

अछि ओ पसेना जे भिजौने, थकित अँह मुख-चान के,
से सिक्त-स्मित कयने ई तन-मन गंग सन गुलजार सन

छी श्रमक सक्कत बान्ह मे, बन्हने खुटेसने भाग के,
कत जन्म-जन्मक रीन तोपने, अलम एक आभार सन

अपना तरहत्थीए सँ टेकने, घर-सखा-संतान के,
नित-नित रचय नव सुरुज-चंदा, हमर मूलाधार सन

दुख केर तानी भूखक भरनी, गुहल जीवन-रंग ओढ़ना,
संग ओढ़ि नाचब गगन-पिरथी, चुनमुनीक अभिसार सन

ओ राति, रातिक थिर जगरना, दुर्दिनक चिर  टकटकी
ओहि आँखि मे दुनिया भरिक सपना साँठब भार सन

नित छल उपासक जे बहन्ना, देव लए सत्कार लए,
से देव-पितरक हम कि जानी, अहीँ ओ अवतार सन। 

२). 

कगनीए पर नाह लगैए, बाजू नहि ?
आङ्ग-समाङ्गक धाह लगैए, बाजू नहि ?

मोसि-कलम-कागत धेने परोपट्टा मे,
एक्कहु नहि पुरखाह लगैए, बाजू नहि ?

भरल-पुरल दरबज्जा-आंगन सबजनियाँ,
दोगे-दोग अबाह लगैए, बाजू नहि ?

कोन बसात सिहकलै जनमारा पछवा,
गामक गाम रोगाह लगैए, बाजू नहि ? 

जाहि आँखि मे भरि जिनगी बोहियइतहुँ हम,
पेनी तकर अथाह लगैए, बाजू नहि ?

होइत रहत एहिना मरलहबा गुरमिन्टी,
लोके नहि इरखाह लगैए, बाजू नहि ?

ठीका-मनखप मे उजमहल धर्मध्वजी,
नेत ओकर मरखाह लगैए, बाजू नहि ? 

हड्डी-गुद्दा केर हबक्का सौजन मे,
कुकुरो आइ घबाह लगैए, बाजू नहि ? 




३).

बात दूध-पानि के आब की करब ?
आनि-अबगरानि के आब की करब ?

सीता के 'टेस्ट-बेबी' बाजय दियमान सँ,
कथा मानिहानि के, आब  की करब ? 

एखनहुँ नुकायल छै चौड़ी मे चोर सब,
ओकर वंशवाइन के आब की करब ?

राजभोगे अफरल छै मठ के सेबाइत सब,
धाइ मे बेपानि के आब की करब ?

सोलहो सिंगार सीटि चलली शिकार पर,
नवकी महतमानि के आब की करब ?

आन्हर सरपंच मतल आदमी-अकादमी,
ओहि बुढ़िया डाइनि के आब की करब ?

गोधियाँ खतियाबय मे गीजल जुआनी,
गन्ध बिस-बिसाइनि के आब की करब ?

चार पर सँ कूदि पड़ल बीच माँझ अँगना
दीप लेसल चानि के आब की करब ?

धरमी भगतिया के डाली निछाउर मे,
मुलुके उबानि के आब की करब ?

कहिया धरि मुरखहबा लाठी पुजेतै,
दम साधल कान्हि के आब की करब ? 

बुढ़िया के हार-हार काँटे गतानल,
नोर नोनछराइन के आब की करब ? 

४). 

पाछू जँ नहि अंक तँ एसगर सुन्ना की ?
कानक बेतरे सोना की कनझुन्ना की ?

जीरा लए जोलहाल जानकीक नैहर केर,
पोखरिए महुराह तँ रोहु की भुन्ना की ?

सिरिफ अगौं लए रकटल-लुधकल भगिनमान,
तकर जजातक उपजा की मरहन्ना की ?

भङ्गघोटना सँ अकछि लोक बन्हलक मुट्ठी,
तँ दरबारक कोट-कानूनक जुन्ना की ?

पथरौटी डिहवार छातियो पाथर के,
तकर गोहरिया गुम्हरल की आँखिमुन्ना की ?

धातुक बासन टुटलो पर बोमियाइत अछि,
मैथिल बासन साबुत की एकचुन्ना की ?

डंटी मारय जे बैसल सप्पत खा क',
तकरा लए छै गांधी की आ अन्ना की ?




५). 


घोघ तर चान कते शान सँ रखने छी अहाँ
मुस्कीक मारि कते मान सँ लधने छी अहाँ

सातो महासागरक उन्माद आंखिए मे घोरल,
मोन सतरंगी कते नेह सँ रंगने छी अहाँ

एही दुनू नैन मे जिनगी भरिक हुलास हमर,
किए हमरे लए दुनू नैन के जंतने छी अहाँ

कते गोदना कते गहना कि कते लाज-सिंगार,
दांते आँचर के दबा हमरा, गंथने छी अहाँ।


६). 

आइ दलित टोल मे भरि राति रहता भैया जी
तेँ करोड़हा टेंट केँ उपाय केलनि भैया जी

जाहि कलावति नामे काल्हि शोर संसद मे भेलै,
तकर कला-संतति-जिनगी संग शीलक रखबैया जी

जकरे घाम टघार सँ गमकै गिरहथ के फुलवाड़ी
तकर विरारक साओन-भादव मे सुखजोत जोतैया जी

तीस-पचासक बोइन लए, बेलल्ल बुढ़ी, सरदार जी
मंतोरियाक दुसधटोली के क' रहलैक सफैया जी

पानियें के पंचैती मे दुनूक दुनू बेपानि भेलै
भाग पनघलै राजा के भसियाइत गेलै टोलबैया जी

चारु नाले चित्त खसल एहि बेरुका दिल्ली-दंगल मे,
चक्कू नहि टाका नहि ओकरा, ने खनदान लड़ैया जी

लाड़नि-खापड़ि जोहि छुच्छ बतही बैसल कंसार मे
मोतिया आँखि हथोरैत जीवन आसक भूल-भुलैया जी

भूखे सँ तबधल जुअनका लाश भेटलै खेत मे
बाढिए केर राहत लगैए बंटलै गाम-गमैया जी ।


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कमल मोहन चुन्नू ( डॉ. कृष्ण मोहन ठाकुर) मैथिलीक सुप्रतिष्ठित साहित्यकार-समीक्षक-रंगकर्मी छथि। कनियाँ कोना बसै छी (गीत-संग्रह), नव घर उठे (नाटक), चाँगुर (नाटक), निनाद (नाट्य-आलोचना), ऑब्जेक्शन मी लार्ड (नाटक) आदि हिनक चर्चित प्रकाशित कृति सभ छनि। एकर अतिरिक्त विभिन्न पत्र-पत्रिकादि मे नियमित रचना प्रकाशित-प्रशंसित एवं किछु पत्र-पत्रिका आ पुस्तकक सम्पादन-कार्य सेहो। डॉ. चुन्नू रमेश झा महिला महाविद्यालय, सहरसा मे सम्प्रति मैथिली विभाग मे सहायक प्राध्यापक छथि। हिनका सँ kmchunnu@rediffmail.com पर सम्पर्क कएल जा सकैत अछि। 
पाछू जँ नहि अंक तँ एसगर सुन्ना की ? पाछू जँ नहि अंक तँ एसगर सुन्ना की ? Reviewed by e-Mithila on April 05, 2020 Rating: 5

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