ओ नव वितण्डा~रघुनाथ मुखिया

ई मिथिला पर आइ पढ़ू, ग्राम- बलहा, जिला- सुपौल निवासी युवा कवि रघुनाथ मुखिया'क कविता 'ओ नव वितण्डा'. रघुनाथ जी मैथिली मे अपना तरहक कविता लिखिनिहार एसगर कवि छथि. जतबे नीक लिखैत छथि, ततबे सुन्नर पाठ सेहो करैत छथि. सोशल मीडिया सं दूर रहि, माटि पर काज करबा मे विश्वाश रखैत छथि~ मॉडरेटर. 



ओ नव वितण्डा

एखन धरि तं
अकास सीबि क'
समुद्रो उपछि देलियैए
बस आब ढाह' पड़तै
हिमालयक कपार
बान्ह' पड़तै आड़ि
उजाड़य पड़तै
कैलाशक शिखर
बेढ़ही सं बेढ़' पड़तै
गंगोत्रीक मुंहथरि कें
एक बेर घेर' पड़तै
हाहाकार मचेबाक लेल
जरूरी छै ई सभ
पृथ्वीपुत्र ध्रुव कें उनटा क'
फेर सं किल्लियो ठोकबाक
जरूरति पड़ि सकैए
वैज्ञानिक लोकनि कें
सियाएल धूरी आ बियरिंग कें
बदलि देब
ग्रीसिंग आ ऑयलिंग
सेहो जरूरी होइत छै
व्यवस्था परिवर्तन लेल
तखन गप्प यैह जे
ओहिखन आबि सकैए भूचाल
धरती फाड़ि क'
शोणितोक आबि सकैए बाढ़ि
मचि सकैए हाहाकार
एक्कहि संग सुनामी आ फैलिन
भिज्झर भ' क'
ठाढ़ क' सकैए
कोनो नव वितण्डा
करेज मे पैसि सकैए हुदहुद
तखन गढ़' पड़त
अपने लोकनि कें
एक गोट नव शब्द
जखन सुरूजक सामर्थ
सोखि लेतै विज्ञान
तखन दलमलित हेतै ब्रह्माण्ड
कोनटा बाटे पड़ेताह सुरूज
नांगर भ' जेतनि सातो घोड़ा
टूटि जेतनि रथक धूरी आ पहिया
तखन वैज्ञानिक लोकनि
लड़ाकू विमान पर सवार भ'
खेहारने फिरताह सुरूज कें
ढोलहा पीटने जेताह
पड़ाउ ने
कत' धरि पड़ाइ छी
पछोड़ नहि छोड़ब
पछुआर धरि
पछाड़ि क' रहब
सैह कहलहुं जे
अहां जत' ठाढ़ छी ने
कतहु ओत्तहि सं ने
श्रीगणेश होअए ओ नव वितण्डा
तखन देखैत रहब
अहां कखन धरि
एक हाथें पाग पकड़ि
दोसर हाथें
ढेका सम्हारने रहब
***
संपर्क :
नेनो बासा
ग्रा. + पोस्ट- बलहा
वाया-सुखपुर
सुपौल-852130
मो. :- 9472032749

ओ नव वितण्डा~रघुनाथ मुखिया ओ नव वितण्डा~रघुनाथ मुखिया Reviewed by बालमुकुन्द on June 27, 2016 Rating: 5

2 comments:

  1. सार्थक विमर्शक संग जाएज चिंतन करैत नीक कविता ! कविताक स्वर आ समाद दुनू बेस मुखरित ! नीक कविता !!

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  2. सटीक कविता रघुनाथ भाई !

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