Tuesday, February 24, 2015

गजलक मादे कहल 'मोनक बात'

अनचिन्हार आखरक प्रादुर्भावक उपरांत पछिला दू-तीन वर्षमे मैथिलीमे खूबे गजल कहल गेल अछि . एहनेमे आशीष अनचिन्हारकेॅ मंडलीमे रहल युवा कवि चंदन कुमार झाक गजल संग्रह आयल अछि 'मोनक बात' . ई चंदन जीकेॅ प्रकाशित पहिलुक पोथी अछि , जकर प्रकाशन 'श्रुति प्रकाशन'क द्वारा कयल गेल अछि . एहि पोथीमे ओ बहुते सरल आ खांटी मैथिलीमे अपन देखल, सुनल ओ भोगल बात गजलक मादे कहलनि अछि ,जे कतौ नइ कतौ अहाॅकेॅ मोनक बातसॅ जरूर मेल खाएत . संग्रहमे गजलक अलाबे रूबाइ, हजल ,बाल गजल आ कता सेहो सम्मिलित अछि . प्रस्तुत अछि एहि संग्रहसॅ किछु गजल - माॅडरेटर.


1.

नैनक बाण चलाकऽ हम्मर अपटी खेतमे प्राण लेलौं
झूठहि छल जे प्रेम-पिहानी से सभटा हम जानि गेलौं

सप्पत खएने रही अहाॅ जे आयब हमरा सपनामे
सपना देखब सपने रहलै निन्नो अहाॅ दफानि लेलौं

छल मोन जे प्रेम-रससॅ भीजा गढ़ब नूतन जिनगी
हम एहिमे सौरभ मिझरेलौं अहाॅ नोरसॅ सानि देलौं

मोन छल जे मुक्त गगनमे उड़ब अहाॅ आ हम संगे
उड़िलौं कतऽ अहाॅ जानि नहि हमरा एहिठाॅ छानि गेलौं

हमरा बिनु जॅ जीबि सकी तऽ जीबू अहाॅ सुखक जिनगी
तकिते  बाट अहीॅक 'चंदन' काटब जिनगी ठानि लेलौं

वर्ण - 21

2.

किछु बात एहन जे कना गेल हमरा
जिनगीक नव माने सिखा गेल हमरा

सपनाक दुनिया छलहुॅ झूलैत झूला
तखनहि उठल बिर्ड़ो जगा गेल हमरा

पालन अपन पेटक करैए कुकूरो
आनोक हित जीबू बुझा गेल हमरा

अप्पन हरख हरखित रहैछै सभ क्यो
अनको दुखसॅ कानब बता गेल हमरा

'चंदन' मनुज जीवन बनय नहि अकारथ
जिनगीक सभ मकसदि गना गेल हमरा

मात्रा क्रम - 2212-2212-2122

3.

आब सूतल लोक जागि रहलैए
तें तऽ चोर बेछोहे भागि रहलैए

देखू लागल भीड़ चौबटिया पर
बेटा माॅ- बापकेॅ बेलागि रहलैए

बजारक भीड़मे तकैत एकांत
सूतय लेल लोक जागि रहलैए

चैतक पछबा सुड्डाह भेल घर
भादबमे धधकि आगि रहलैए

तबधल धरती दहेतै फेरोसॅ
सुगरकोना मेध लागि रहलैए

जरलै घर दहेलै डीह 'चंदन'
डटले लोक क्यो नै भागि रहलैए

वर्ण- 13

4.

रोटी महग महगे नून भेल छै
बोटी सुलभ सस्ता खून भेल छै

सौॅसे शहर सहसह लोक गजगज
गामक दलानो-घर सून भेल छै

प्रगतिक पथ भ्रष्टाचार अड़ल छै
नेता समाजक जनु घून भेल छै

खेती करय जे से दीन भेल छै
बइमान बेपारी दून भेल छै

करनी अपन नहि देखैत लोक छै
'चंदन' फुसिक खातिर खून भेल छै

 5.

ककरो तऽ जुन्ना ऑत भेल छै
केयो खा-खा अपस्याॅत भेल छै

पिसा रहलै देशक जनता
कानूने व्यवस्था जाॅत भेल छै

बुड़िबके लोक नेता बनलै
विकास नेनाक खाॅत भेल छै

समाज बुड़लै बरू खत्तामे
संसद भोजक पाॅत भेल छै

वर्ण 11

6.

दानवी चोटसॅ मानवता थकुचल जाइए
चाॅगुरक नोकसॅ मनुक्ख बकुटल जाइए

भजारि-भजारि बिचार लोक भजार तकैछ
तैयो डेग-डेगपर भजार ठकल जाइए

नञ्गटे नचैत लोककेॅ धेयान कहाॅ छैक जे
नाच बढ़ल जाइए आ तेल सधल जाइए

जड़ा छातीकेॅ निकलैछ जे धुआॅ असमानमे
ओहिसॅ तप्त पृथ्वी हिमालयो घमल जाइए

'चंदन' रोगायल छाती कुंठित मोन लोकक
बस पाथरक मकान एतऽ बढ़ल जाइए

वर्ण 17

रचनाकार संपर्क :-
चंदन कुमार झा
मेल : cjha83@gmail.com
मो.  : 09748405526

No comments:

Post a Comment