मानवता थकुचल जाइए


चंदन कुमार झा केर किछु गजल ::


1.

नैनक बाण चलाकऽ हम्मर अपटी खेतमे प्राण लेलौं
झूठहि छल जे प्रेम-पिहानी से सभटा हम जानि गेलौं

सप्पत खएने रही अहाँ जे आयब हमरा सपनामे
सपना देखब सपने रहलै निन्नो अहाँ दफानि लेलौं

छल मोन जे प्रेम-रससँ भीजा गढ़ब नूतन जिनगी
हम एहिमे सौरभ मिझरेलौं अहाँ नोरसँ सानि देलौं

मोन छल जे मुक्त गगनमे उड़ब अहाँ आ हम संगे
उड़िलौं कतऽ अहाँ जानि नहि हमरा एहिठाँ छानि गेलौं

हमरा बिनु जँ जीबि सकी तऽ जीबू अहाँ सुखक जिनगी
तकिते  बाट अहीॅक 'चंदन' काटब जिनगी ठानि लेलौं

2.

किछु बात एहन जे कना गेल हमरा
जिनगीक नव माने सिखा गेल हमरा

सपनाक दुनिया छलहुँ झूलैत झूला
तखनहि उठल बिर्ड़ो जगा गेल हमरा

पालन अपन पेटक करैए कुकूरो
आनोक हित जीबू बुझा गेल हमरा

अप्पन हरख हरखित रहैछै सभ क्यो
अनको दुखसँ कानब बता गेल हमरा

'चंदन' मनुज जीवन बनय नहि अकारथ
जिनगीक सभ मकसदि गना गेल हमरा

3.

आब सूतल लोक जागि रहलैए
तें तँ चोर बेछोहे भागि रहलैए

देखू लागल भीड़ चौबटिया पर
बेटा माॅ- बापकेॅ बेलागि रहलैए

बजारक भीड़मे तकैत एकांत
सूतय लेल लोक जागि रहलैए

चैतक पछबा सुड्डाह भेल घर
भादबमे धधकि आगि रहलैए

तबधल धरती दहेतै फेरोसँ
सुगरकोना मेध लागि रहलैए

जरलै घर दहेलै डीह 'चंदन'
डटले लोक क्यो नै भागि रहलैए

4.

रोटी महग महगे नून भेल छै
बोटी सुलभ सस्ता खून भेल छै

सौॅसे शहर सहसह लोक गजगज
गामक दलानो-घर सून भेल छै

प्रगतिक पथ भ्रष्टाचार अड़ल छै
नेता समाजक जनु घून भेल छै

खेती करय जे से दीन भेल छै
बइमान बेपारी दून भेल छै

करनी अपन नहि देखैत लोक छै
'चंदन' फुसिक खातिर खून भेल छै

5.

ककरो तँ जुन्ना आँत भेल छै
केयो खा-खा अपस्याॅत भेल छै

पिसा रहलै देशक जनता
कानूने व्यवस्था जाॅत भेल छै

बुड़िबके लोक नेता बनलै
विकास नेनाक खाॅत भेल छै

समाज बुड़लै बरू खत्तामे
संसद भोजक पाँत भेल छै


6.

दानवी चोटसँ मानवता थकुचल जाइए
चाॅगुरक नोकसँ मनुक्ख बकुटल जाइए

भजारि-भजारि बिचार लोक भजार तकैछ
तैयो डेग-डेगपर भजार ठकल जाइए

नञ्गटे नचैत लोककेॅ धेयान कहाॅ छैक जे
नाच बढ़ल जाइए आ तेल सधल जाइए

जड़ा छातीकेॅ निकलैछ जे धुआँ असमानमे
ओहिसँ तप्त पृथ्वी हिमालयो घमल जाइए

'चंदन' रोगायल छाती कुंठित मोन लोकक
बस पाथरक मकान एतऽ बढ़ल जाइए
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चंदन कुमार झा संभावनाशील युवा कवि-गीतकार-गजलकार छथि।  प्रस्तुत गीत हुनक प्रथम गजल-सँग्रह 'मोनक बात' सँ एतय साभार प्रस्तुत अछि।  चंदन सँ cjha83@gmail.com पर सम्पर्क कएल जा सकैत अछि। 
मानवता थकुचल जाइए मानवता थकुचल जाइए Reviewed by बालमुकुन्द on February 25, 2015 Rating: 5

1 comment:

  1. सभटा गजल एका पर एक अछि,ओना मिसरा सानी क' शेर सभ हमरा खूब पसिन्न पड़ल। हार्दिक शुभकामना।

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