किछु विश्व कविता ::
![]() |
| अहमद अल-मुल्ला |
युद्धक्षेत्रकेँ पार करैत एकटा टिकली
अहमद अल-मुल्ला
हम जमीनपर पैर रखलहुँ आ ओकरा फुटबाक आवाज सुनलहुँ
हम दर्दक कारणसँ दाँत किटैत झुकलहुँ
जे हमर कानब लोक ने सुनि जाय
घर जेना डेरा गेल
जेना ओकरा देबाल परहक चित्रसब
एकभगाह भऽ झुकि गेल
जकरा हमरा छोड़ि केओ नहि देखलक।
तहिना रोड सेहो डेरा गेल
जेना धैर्य रूपी ओकर पाथर सब खिया गेल हो
ताला सब सेहो डेरा जाइछ, तैँ तँ ओहिमे जंग लागि जाइछ
ओकरे सब जकाँ फुलबारीमे स्थापित मूर्ति सेहो डेरा गेल
आ रातुक अंधकारमे गुम्म भऽ गेल
आर तहिना हमरा फसिलसँ डर भऽ रहल अछि
जँ ओ हमरा स्वयं द्वारा रोपल गेल नहि हो।
[मूल कविता: ए बटरफ्लाई क्रॉसिंग दी बैटलफिल्ड]
![]() |
| हन्ना सुपेत्रान |
प्रेम राज करैत
हन्ना सुपेत्रान
एहि समय-शून्य विश्वमे बेर-बेर
प्रेम राज करैत अछि, सदरि करैत आयल अछि आ करैत रहत
एकर शान्त, सीमाहीन शक्ति अहाँक प्रत्येक सांसमे समाहित अछि
प्रकृति-सिरजित प्रत्येक श्वरमे
पवनक प्रत्येक सनसनाहटिमे।
एहि समय-शून्य विश्वमे समय जेना अवरुद्ध भऽ गेल हो
जखन अहाँक माध्यमे प्रेममय अनुभूति होइछ
जखन नृत्यांगना नृत्यमे परिवर्तित भऽ गेल हो
गायक गीतमे परिवर्तित भऽ गेल हो
जेना कवि कवितामे विस्मृत भऽ गेल हो
जेना कलाकार कलामे मुग्ध भऽ गेल हो।
समय कहने अछि, आ कहैत रहत एहि समय-शून्य विश्वमे
प्रेम राज कयने अछि, करैत अछि आ सदा-सर्वदा करैत रहत
प्रेम अहाँक कारणे राज करैत अछि, अहाँ जकाँ, अहाँमे समाहित
कारण जे प्रेम करबाक दोसर बाट नहि छैक
कारण प्रेम अहाँ स्वयं छी।
[मूल कविता: लव रेन्स]
![]() |
| इरमा कुर्ती |
हमर आङुरसभक बीच तोहर छवि
इरमा कुर्ती
माय! एक साँझ हम सब
झीलक किछेरमे टहलैत रही।
हंस सब सान्ध्यकालिन हल्लुक प्रकाशमे
झीलक सतह पर शनै: शनैः ससरि रहल छल।
चन्द्रमाक पीयर सन प्रकाश झीलपर
आ तोहर थकित छविपर
परावर्तित भऽ रहल छलौ।
मुदा आब एहिठाम तोँ नहि छैं
चन्द्रमा पड़ा जाइत अछि आ
तोहर छवि आ ओहि रातुक स्मृति लेने
विलीन भऽजाइत अछि।
हम अपन दुनू हाथ पानिमे डूबबैत छी
आ अपन आङुरसभक बीच तोहर छवि
पकड़ने, स्नेहिल स्पर्श कऽ रहल छी।
[मूल कविता: योर इमेज बिटवीन माय फिंगर्स]
![]() |
| माराइके हानेग्राफ़ |
सांझुक आपसी
माराइके हानेग्राफ़
चुप्पी सधने, हमसब खबरिक प्रतीक्षामे छी
बाहिरी दुनियाँसँ, जकरा जल्दीसँ अयबाक सम्भावना नहि।
हमसब अपूर्व चुप्पी सधने बैसल छी, समूलमे कहबाक तात्पर्य जे
बहुत अबेर भऽ चुकल छैक, अहाँसब एकटा निश्चित जगहपर रही
आब, अहाँसभक सर्बनाश भेल अछि।
कखनो कऽ, चिन्तित, हमसब उठै छी—
एक क्षण हेतु अहाँसभक ओछाओन लऽग जाइत छी,
किञ्चित श्रद्धासँ जे पड़ल छैक से टकटकी लगा देखि लैत छी
जे आब नहि छैक।
कोठली, हमरा चारूकात अनाथ बनल अछि
नब, गद्दादार पैर राखयबला स्टूल,
किछुये काल पहिने प्रयोग कैल गेल कप।
दुनू भाइ अपना कनियाँसँ आवृत, टिभी बन्न भेल,
कम्बलमे दाग लागल, मृत्यु सम्बन्धित कागजात टेबुलपर।
शरीरसँ अलग, आब अहाँ मुक्त छी।
मृत्यु भेलहा मध्य रातिमे, हम अन्तिम ट्रेन पकड़ि लैत छी।
[मूल कविता: इवनिंग रिटर्न]
![]() |
| आदा अहरोनी |
आदरणीय प्रधानमंत्री, ई दु:स्वप्न कहिया अन्त हैत?
आदा अहरोनी
आदरणीय प्रधानमंत्रीजी! ई गाजा दु:स्वप्न
कहिया अन्त हैत?
केहन चरम कष्ट!
हम लोकक घर विनष्ट करबाक घटनाकेँ
घृणा करैत छी,
हम घर जाय चाहैत छी
हम अपन प्रियाकेँ आलिंगन करय चाहैत छी!
घरक सिनेह आ हमर प्रेमिकाक सिनेहभरल
बाँहिक बदलामे—
पीड़ा हमरा ठंढसँ जकड़ल हाड़मे ब्याप्त अछि
जखन हम एकटा बालकक भयंकर वेदना
देखैत छी
जे अपना माइक मृत शरीर तुरन्त खोजि
निकाललक अछि
अपन विनष्ट भेल घरक अन्दरसँ—
हमसभ दु:स्वप्नसँ आपस आबि गेलहुँ
अपन हृदयमे आतंक नेने—
आदरणीय प्रधानमंत्रीजी! हमर सभक
जन्म भेल रहय नवसृजन हेतु, आनन्द हेतु,
प्रेम हेतु आ जीवन हेतु,
नहि कि विनाश हेतु!
आदरणीय प्रधानमंत्रीजी! कृपया एहि दुःस्वप्नकेँ
अन्त करू
जे हमरसभक आशकेँ, सपनाकेँ आ बाल-जीवनकेँ
समाप्त करैए,
ई भयंकर दुःस्वप्न
जे हमरसभक आत्मा आ शरीरकेँ मारि दैए
मात्र दुःस्वप्नेटामे नहि
[मूल कविता: मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, व्हेन विल द नाइटमेयर एंड?]
![]() |
| यूसिफ़ समदोघलु |
क्षीण ज्योति
यूसिफ़ समदोघलु
अहाँ नहि बिसरब
जखन आइ राति सूतऽ जायब
आँखिकेँ नीक जकाँ कसिक मूनि लेब
कम्मलसँ सम्पूर्ण शरीरकेँ झाँपि लेब
आ मस्तक धरि ओकरा घीचि लेब
जाहिसँ अंधकारसँ आच्छादित भऽ जाइ अहाँ
तखन हमरा एक पल हेतु मोन पाड़ब
तखन अहाँ देखब जे
हमरा आँखिसँ अहाँपर एकटा ज्योति पड़त
यद्यपि अत्यन्त क्षीण , सदा अनदेखल…
[मूल कविता : ग्लिमर]
![]() |
| यूसिफ़ समदाघलु |
हमर समाधिशिला
यूसिफ़ समदोघलु
हमरा सारापर संगमरमरक कोनो पाथर नहि गाड़ब
ने कोनो सुन्दर स्मारक ठाढ़ करब
मात्र एक जोड़ जूता राखि देब
जे कोनो नग्न-पैरबला व्यक्ति पहिरि सकय।
[मूल कविता: माइ टॉम्बस्टोन]
![]() |
| नोरबर्तो पान्नोने |
हम अपन गिलास उठाबै छी
नोरबर्तो पान्नोने
हम अपन गिलास उठाबै छी।
हमर रंगहीन दारूमे,
कविता अधिकतम गतिमे दौड़ैत अछि।
ई उदात्त-क्षेत्रक खोज करैत अछि,
परन्तु कविताक घातक
सीमासँ टकरा जाइत अछि,
आर गिलास टुकड़ी- टुकड़ी भऽ जाइत अछि,
आ दारू हेरा जाइत अछि।
हमर सपना एखनो कठोर बनल अछि।
अहाँक अनुपस्थितिक स्मृति
हमरा अन्दरमे टुटैत अछि।
...आर हम पिबैत छी।
[मूल कविता : आई रेज़ माई ग्लास]
![]() |
| हैनी राउवेलर |
सांझुक छायाचित्रसभ
हैनी राउवेलर
झाड़-झंखारक ठाढ़ि-पात सभ
सान्ध्यकालीन आकाशक धूमिल प्रकाशमे
विशिष्टरुपमे दृष्टिगत होइछ।
अंधकार क्रमिक-रुपमे सघन भऽ रहल अछि,
यद्यपि सूर्यक प्रकाश फुलबारी सभक ओहिपार
किछु खिड़की सभपर एखनो चमकि रहल छैक।
हम तत्दृश्यकेँ शब्दश: वर्णन करय चाहैत छी,
तथापि हमरा उपयुक्त शब्द
भेटि नहि रहल अछि,
हमरा उज्जर कागतपर पेन्सिलसँ
चित्रित करबाक आ बुरुसक प्रयोगसँ
रंगीन करबाक विचार प्रबल भऽ रहल अछि।
सड़क परहक आबाज मंद भऽ चुकल छैक
आ ओ कुकुरबला बृद्ध
कतउ देखा नहि रहल छथि।
आब हुनका कुकुरकेँ टहलेबाक कोनो जरूरत नहि।
दिनमे, हम हुनका सड़कक किनारे-किनारे
एसगरे (एकसरे) टहलैत देखने रहियनि।
[मूल कविता: सिलुएट्स इन द ईवनिंग]
![]() |
| आल्बर्ट यानेत्शेक |
जन्तु उद्यान
आल्बर्ट यानेत्शेक
हमरा देशक
चिड़ियाखानामे
लगभग सब तरहक जानबर अछि
गदहासँ लऽ हुराड़ धरि
मात्र उल्लू नहि अछि
जे अन्हारमे
देखि सकैत अछि।
[मूल कविता: एनिमल गार्डन]
•••
Reviewed by ई–मिथिला
on
जनवरी 31, 2026
Rating:












अत्यधिक उल्लाससँ भरि उठलहुँ कवितासभक चयन आ मैथिली अनुवाद पढ़ि।
जवाब देंहटाएंविभिन्न भाव-बोधक कवितासभ जतए विविध कथ्यसँ परिचय करबैत अछि,ओतहि 'साँझुक,रातुक..'शुद्ध मैथिलीकरण कएल शब्दसभ अत्यधिक प्रसन्नता दैत अछि।आ सभसँ नीक 'बटरफ्लाई'क अनुवाद हम 'तितली आ फतिंगा 'बुझैत रही,से बिसरल शब्द 'टिकली' मोन पाड़ि अनुवादक हमर उपकार कएलनि अछि।
अनुवादक आ ई -मिथिलाकेँ बधाइ। — नारायणजी
बहुत बहुत नीक कविता ओकर उत्कृष्ट मैथिली
जवाब देंहटाएंअनुवाद करबालेल आदरणीयकेँ साधुवाद।
सबिता झा ‘सोनी’
कविताक चयन नीक ।
जवाब देंहटाएंबहुत नीक कविता आ आभार E Mithila कें जे एहन अद्भुत कवि सब सँ परिचित करओलनि।
जवाब देंहटाएं