अनेरो ताकि रहलहुँ अछि संवेदना


सुशान्त झा 'अवलोकित' केर किछु कविता

1). संवेदना 

अनेरो ताकि रहलहुँ अछि संवेदना...

स्मार्टफोन मे मुड़ी गोतने
आइडेंटिटी क्राइसिसक महजाल सँ 
बहरेबाक यत्न मे
घोंघी जकाँ अपनहि तक संकुचित होइत 
मानसिकता

मात्र चाकरी तक सीमित होइत 
शिक्षाक उद्देश्य सँ
उद्देश्यहीन भीड़क 
हिस्सा बनबाक लेल उताहुल देशक भविष्य

अपने जीबैत
माय-बाप केँ वृद्धाश्रमक दर्शन करेबा लेल आतुर
बौआक माय-बाप।

कौआ जकाँ कुचरि-कुचरि
अप्पन मतक ढ़ोल पीट
लोकतंत्रक घर ढाहबा लेल प्रयत्नशील
घरक खाम्ह

बिनु संवाद आ मंथन केँ
राजनीतिक चमचइ करैत कलमजीवी

जनताक मौलिक आवश्यकता केँ
घोषणापत्रक रंगीन पन्ना धरि
सीमित करैत जन-प्रतिनिधि

कोहबरे घर सँ
सत्ता प्राप्तिक लिलसा मे
एक-दोसरा सँ हठात लड़ैत
कनिआँ-बर

मेट्रोसिटीक फुटपाथ पर
कम्बल बटैत अपन फुटेज बना
रुपैया कमाइत बुद्धिजीवी

गोबरबिछनीक फाटल आंगी मे
हुलकी मारैत 
तथाकथित दबंग

पेटक आगि मिझएबाक ख़ातिर
खेत सँ कोसो दूर होइत
गिरहथक बाल-बच्चा

अपनहि गामके
घृणाक दृष्टि सँ देखबा लेल मजबूर
माटि मे ओंघराइत बुतरू

आओर एहन बहुत किछु देखने हएब अहाँ
आ कहिओ नहि सोचने हएब 
जे कतेक उचित-अनुचित छैक ई सभ ?

जँ तकबै कोनो अएना मे
तँ भान हएत
जे मेटा लेलहुँ अछि 
संवेदनाक ओ करिया ठोप
जे लगाओल गेल छल हमरा-अहाँ केँ
कुदृष्टि सँ बचयबाक निमित्त।

2). आँखिक उपराग

आँखि केँ निन्न बड्ड प्रिय छलैक
मोबाइलो सँ बेसी
मुदा मोन अछि ने
भ' जाइत छलैक
कतेको रातिक भोर
एक दोसराक 
आँखि मे तकैत-तकैत
कियैक तँ निन्नहुँ सँ बेसी प्रिय
भ' गेल छलैक एकरा लेल
अहाँक आँखिक सानिध्य

मुदा आब लगैत अछि 
ई सभ एक दिसाह छल
हम्मर मोन अनेरो बताह छल
निन्नक लेल हम्मर अगाध सिनेहक
परिणाम मात्र छल ई मधुर स्वप्न 
जे भखरि रहल अछि 
जेना मरियाक चोट सँ
भखरैत छैक कोनो रत्न
आ तोड़ने जा रहल अछि
निन्नक संग आँखिक सिनेहक ताग

हम्मर करुआइत आँखि 
बेर-बेर द' रहल अछि उपराग
कियैक तँ
आब राति भरि फुजल रहि
ताकय पड़ैत छैक ओकरा 
घरक उज्जर सपेत छत 
आ ताहि मे टाँगल कुहरि-कुहरि
चलैत जाल लागल पंखा 
जुबता क' राख' पड़ैत छैक
अपना छोट-छोट डिमहा मे
पीड़ाक एकटा विशाल सागर
बिनु कँचिएने, बिनु नोर बहेने

एहन जुलुम तँ नहिए टा
हेबाक चाही छलैक एकरा संग
मानलहुँ दोषी छल ई
मुदा एकर दोष तँ
मात्र एतबे छलैक 
जे निन्नहुँ सँ बेसी प्रिय
लागय लागल छलैक एकरा
'अहाँक आँखिक सानिध्य'।

3). साग-भात आ सन्ना 

अहाँक फ़ास्ट-फ़ूड'क प्रति आसक्ति
हमरा कहियो नहि बना सकैत अछि 
चाऊमीन, पिज़्ज़ा, मैग्गी आकि मैकरॉनी
हम किन्नहु नहि भ' सकैत छी
Kfc बला अलबत्त चिकेन बकेट आकि मैकडोनाल्डक बर्गर
किएक तँ एक्कर सभक सेवनक उपरान्त
टिश्यू पेपर सँ हाथ पोछैत 
अहाँ मात्र एतबे कहबैक
"वॉव! इट वाज यम्मी"।

हमर अभिलाषा अछि जे 
हम भ' जाय 
पटुआ सागक ओ तीतहा तीमन
भात आ जमैनक फोरन बला सन्ना
जकर भोग लगेलाक बाद 
लोटाक जल सँ हाथ धोइत काल
अहाँ एखनो कहैत छियैक
"आह! इएह तँ छियैक जीवन"।

4). प्रेम-पत्र

फाड़ि देलियैक अछि कॉपीक कतेको पन्ना
सधा देलियैक कतेको कलमक स्याही
भँसा देलियैक कतेको गुलाब
चढ़ा लेलियैक कतेको बोतल शराब
तोरा प्रेम-पत्र लिखबाक ओरियान मे
तैयो कहाँ जुमा सकलहुँ अछि
दूइयो टप्पी गप्प

जुमबो कोना करत(?)
जखन तोरा सोचैत छी 
तँ विशेषण सभ चुनाव जीतल नेता जकाँ
निपत्ता भ' जाइत अछि
बिम्ब सभ अनमन बुधियार मैथिल जकाँ
अप्पन मुँह गोर आन सभ चोर कहि
कुकुराकटौंझ करय लगैत अछि
कथ्य बेरोजगारी जकाँ अप्पन पएर पसारि
हम्मर मुँह दुसय लगैत अछि

आ ताहि पर कोजगराक राति
ठहाठहि इजोरिया मे 
मखान परसैत काल अझक्के देखल
सिनुरिया गाल, डोका सन-सन आँखि
हथियाक मेघ सन कारी केश
तिलकोरक फ'र सन रक्ताभ ठोरक स्मृति
बेर-बेर झुमा दैत अछि हमरा 
फगुआक भाँग बला शरबत जकाँ

फाड़ि दैत छियैक हम एकटा आर पन्ना
भँसा दैत छियैक एकटा आर गुलाब
चढ़ा लैत छी एकटा आर पउआ
आ बेसुध भ' सनिहा जायत छी हम
तोरा स्मृतिक तुराई मे

बुझि पड़इत अछि ई हुइलमाइल
नहि लिख' देत  हमरा प्रेम-पत्र
जेना नेता सभक कुकुराकटौझ 
स्थगित कय दैत छैक 
संसदक कोनो महत्वपूर्ण सत्र
आ हम्मर प्रेमक सेहो हेतैक अकाल-मृत्यु
जेना रेल सँ कटि क' मरि गेल छल
रावण दहन देखबा मे बेसुध 
कतेको  निर्दोष मनुख्ख।

5). दिवा स्वप्न 

दिल्ली, कलकत्ता आकि बम्बइ सन
एकटा महानगर मे
कोनो बहुराष्ट्रीय कंपनी मे चाकरी करैत 
लंच ब्रेकक उपरान्त 
हाफिक संग आयल रहए ओंघी
आ, नहि जानि कतय सँ 
उघने आयल रहए स्वप्नक दीर्घ श्रृंखला

एहि श्रृंखला मे देखय लागल छलहुँ अनायास
गामक ब्रह्मस्थान धरि बनल पीसीसी रोड
इस्माइल आ रमेश बाबूक बुदरू केँ
एकहि संग विद्यालय मे मिथिलाक्षर सिखैत
लोहना बाली काकीक आँगन मे 
चलि रहल छलैक मिथिला पेंटिगक वर्कशॉप 
रमौल बालीक बनाओल 
सिक्की आ चूड़ी किनबाक लेल 
चुट्टी सन लागल छल लोक सभक लाइन
कोशी-कमलाक काते-कात
माछक खेप उघय लेल ठाढ़ छल बड़का गाड़ी सभ 
गामक टीसन सँ दिल्ली, पंजाब जाय बला ट्रेनक
ओहिना खलिया छल बौगी सभ 

इहो देखल जे रजनी बुलेट पर बाबू के बैसा 
जाय रहल छलीह हाट दिस 
मखाना प्रोसेसिंग यूनिट लगहक चाहक स्टाल पर 
गप्प कय रहल मजदूर सभ 
खिधांश करैत अपन प्रवासक चाकरी केँ 

तखने पीठ पर परल सहकर्मीक हाथ
तोड़लक हम्मर तंद्रा
आ नीन्नक संगहि भखरि गेल छल बहुत किछु

हमर स्वपनक दीर्घ श्रृंखला
लोहना बाली काकीक भीतक घर जकाँ 
ढहि गेल छल 
ओलती मे फेकल रमौल बालीक मौनी जकाँ 
निघेसल जाय रहल छल
ब्रह्मस्थान जाइत साइकिल बला जकाँ 
भूतला गेल छल 
विद्यालय सँ उपटल मातृभाषा जकाँ 
उपेक्षित भेल छल
बरखा मे ढहैत कमला-कोशीक छहर जकाँ 
टूटय लागल छल
फँसरी लगा मरि गेल छल 
दहेज़ प्रताड़िता रजनी
ठप्प पड़ि गेल छल मखाना प्रोसेसिंग यूनिट
आ बिदाह भ' गेल छल 
गामक युवक सभ फेर सँ टीशन दिस

असोथकित अभिलाष सँ
चलबय लागल रही कीबोर्ड पर अपन आँगुर 
तीन बेर लिखने रही सोशल मीडिया पर 
"जय मिथिला -जय मिथिला-जय मिथिला"
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सुशान्त झा 'अवलोकित' मैथिली काव्य संसारक युवा पीढ़ी सँ सम्बद्ध कवि छथि। चन्देश्वर स्थान, मधुबनी रहनिहार अवलोकित एखन डिजिटल कम्युनिकेशनक क्षेत्र मे एम.टेक कए रहलनि अछि। हिनका सँ jhasushant786@gmail.com पर सम्पर्क कएल जा सकैत अछि। 

अनेरो ताकि रहलहुँ अछि संवेदना अनेरो ताकि रहलहुँ अछि संवेदना Reviewed by e-Mithila on November 11, 2019 Rating: 5

6 comments:

  1. साहित्यिक सृजन की संभावनाओं से लबालब हैं, अवलोकित। इनकी कविताएं नई उम्मीद जगाती हैं। अनंत शुभकामनाएँ इनको...

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  2. बहुत सुन्दर ।

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  3. बहुत सुंदर शुशांत।

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  4. अद्भुत सर जी

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  5. बहुत सुनर कविता !

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  6. वाह वाह लाजवाब 🌹 🌹 बहुत सुंदर रचना अछि भाई
    🙏 जय मिथिला जय मैथिल समाज 💐 💐 💐

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