Saturday, April 18, 2015

अमित मिश्र'क किछु लघुकथा

मध्य विद्यालय करियनमे सहायक शिक्षक पदपर कार्यरत अमित मिश्र एक्कहि संगे विविध विधामे लिखैत छथि. कथा, लघुकथा, कविता, गजल, नाटक, एकांकी . आइ-काल्हि किछु मैथिली एलबममे गीत सेहो लिखलनि अछि. एखन हिनक किछु लघुकथा देल जा रहल अछि . पढ़िकेँ कहूँ - माॅडरेटर. 
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(1). . सेनूर

रातिक बारह बाजैत छल ।गुज-गुज अन्हिया आ डेराउन चुप्पी चारू दिस विराजमान छल ।एकाएक मनोजक नीन टूटि गेलै ।चेहा कऽ उठल तँ बगलमे पत्नीकेँ नै देखलक ।मोने मोन शंका ग्रस्त हुअ लागल ।घरसँ बाहर आएत तँ आँगनमे दू गोटाक खुसुर-पुसुर सुनाइ देलकै ।एकटा पुरूष स्वर आ एकटा नारी स्वर आबैत छल ।पुरूष बाजल "देख, आब तूँ प्लान अन्तीम भाग पूरा कर ।मनोज लऽग बड सम्पति छै ।ओकरा मारि कऽ ओकर मलकाइन तूँ बनि जो ।फेर दुनू गोटा वियाह कऽ लेब ।"
नारी स्वर तीव्र गतिसँ बहराएल "नै, ई हमरा बुते नै हेतौ ।"
पुरूष फेर बुझाबऽ लागल "सप्पत नै तोड़ ।दुनू गोटाक प्रेम एकरा मरलाक बादे सफल हेतै ।"
तामसमे डूबल नारी स्वर फूटल "प्रेम प्रेम प्रेम बड भेलौ ।आब अपन प्रेम मरि गेलौ ।हम तोहर संग देलियै किए तँ तखन कर्ज मुक्त छलियै, मुदा... आब हमरापर सेनूरक कर्ज अछि ।मनोज हमरा अनमोल सेनूर देलनि ।हम अपन प्राणो दऽ कऽ एकर कर्ज नै चुका सकै छीयै, ओकर प्राण लेनाइ दूर कए बात छै ।"


(2). दीप

एकटा बूढ़ कुम्हार शहरक अतिव्यस्त बाटपर ठाढ़ छल ।माँथपर छीट्टा छलै जाहिमे नीक नीक कलाकृतिसँ सजल दीप राखल छलै ।छीट्टाक बोझसँ वा उमरक प्रभावसँ ओकर डाँर झूकि गेल छलै ।गाड़ीकेँ रुकैत देख ओ झट दऽ ओकरा लऽग पहुँचि जाइ "सरकार, दिवाली लेल सुन्दर-सुन्दर दीप अछि ।मात्र दूइये टाका...एक्को टा कीन लिअ...भोरसँ एक्को टा नै बिकाएल ...भुखले छी...छूट देब...एगो कीन लिअ... ।"
सब बेर ओ एते बाजै आ सब बेर गाड़ी बला ओकरा फटकारि दै "रै बुड़बक ।आज के युग में दीप-बीप नहीं चलता है ।अब तो एक-से-एक मरकरी आ गया है ।जाओ रश्ता नापो ।समय खोटी मत करो ।" एते कहि गाड़ी बला फट दऽ गेट बन्द कऽ लै ।साँझमे चोकीदार अपन हिस्सा लेबाक लेल आबि गेलै ।ओकरा देख कुम्हार बाजल "बाबू जी ।आइ नै दऽ सकब ।पिछला चारि दिनसँ किछु आमदनी नै भेल ।कने किछु खुआ दिअ हमरा । पता नै अहाँकेँ अझुका हफ्दा दऽ सकब की नै, कारण जे हमरो जीवन तँ बिनु तेलक दीपे सन अछि ।जानि नै कते दिन धरि जरि सकत ।"

(3).   फाटल पन्ना

हे अहाँक बारेमे बड सूनि रहल छी ।अपन जुआन पत्निकेँ छोड़ि दोसर संग...ई सब नीक नै भेल ।"सुनीता अपन पति सुकेशकेँ उपराग दैत कहलनि ।ई सुनिते सुकेश तामसे लह-लह करऽ लागल "हम कमाइ छी ।हम जे करी ओइसँ अहाँकेँ की ?" बात बिगड़ैत चलि गेल ।रिश्तामे खटास बढ़ैत-बढ़ैत तलाक धरि पहुँचि गेलै ।आब सुकेश अपन प्रेमिका संग रहऽ लागल ।
" यै मृगनैनी अहाँ एतेक टाका बेकारमे व्यर्थ करैत छी ।बुझू तँ काल्हिये हार किनलौं आ फेर आइये... "सुकेश अपन प्रेमिकाकेँ कने दबारैत कहलक ।ई सुनिते प्रेमिका सुकेशपर टूटि पड़ल "एना जुनि बाजल कर ।तूँ हमरा आनलें हम अपना मोने थोड़े एलियौ ।" झगड़ा बढ़ि गेल ।बाता-बातीक बीचमे एक-दू थप्पर सुकेशकेँ लागियो गेलै ।राति भरि सूति नै सकल ।सुकेशकेँ लागऽ लागलै जे सुनीताकेँ जिनगीसँ दूर भेलासँ ओकर जिनगीक सबसँ सुन्नर पन्ना फाटि गेल छै ।

(4). नवतुरिया

एक बेर फूल आ फूलक गाछमे बकझक भऽ गेलै ।फूल आन्दोलन ठाढ़ कऽ देलक "नै...आब जुलुम नै सहबौ ।आब हम नै मौलेबौ ।"
गाछ शान्त करैत बाजल "एना किए बाजै छें ।तोरा कोन दिक्कत होइ छौ ?तूँ तँ हमर अंग छें ।तोरा तँ प्रेमसँ मौलेबाक चाही ।"
"अरे वाह रे वाह !हम हिनक अंग छी! हमरे सुगंधक कारण लोक तोरा पूछै छौ आ तूँ हमरे मौलाइ लेल कहैत छें ।" फूल आक्रोशित होइत बाजल ।
गाछ ओकरा बुझबैत बाजल "देख दुनियाँ परिवर्तनक पर्याय छैक । जा धरि तूँ नै मौलेबें ता धरि नव फूलक जनम नै हेतै ।"
फूल क्रोधे थरथराए लागल "तैसँ हमरा कोनो मतलब नै ।नवतुरियाकेँ हम कोनो रोकने छियै, आबौ ने...मुदा हम रहबे करबै ।"
"एतेक जिद जुनि कर ।समाजमे देखै नै छहीं बुढ़बा-बुढ़ियाकेँ कतेक गंजन होइत छैक ।पुरनका सब सबटा अधिकार अपने लऽग राखऽ चाहै छै आ नवतुरिया अपना लऽग चाहै छें ।बूढ़-पुरानकेँ किछु बरदाश्त नै होइ छैक आ नवकाक खूनक गरमी लऽग हारि कऽ मारि खाइ छैक । ऐसँ बढ़ियाँ जे अपन इज्जत बचा कऽ नवतुरिया लेल स्थान खाली कऽ दी ।"
गाछक बात सूनि फूल सब बात समझि गेल आ दोसरे दिन मौला कऽ गाछसँ खसि पड़ल ।


(5). कोहबर


हम हवा छी ।हमरा अहाँ नै देखब मुदा हम सबकेँ देखैत छी ।एखन हम एकटा भावी कोहबर घरमे छी ।बिधकरी आ दाइ-माइ सब देबालपर शुभ चित्र पाड़ैक ओरियान कऽ रहल छथि ।"गै सोनियाँ बाँस आ पुरनि पातक फोटो बना ने "
"यै बलहा बाली कोहबरक गीत उठाबू ने यै... कने लाल रंग लगाउ।"
"यै काकी, हमरा गीत सब नै आबैछ आ फोटो-ओटो तँ कहिया ने बिसरि गेलियै ।"
"हँ यै मैयाँ, आजुक रिमिक्सक जमानामे ककरा ई सब गीत इयाद छै ?"
भरल घर माँछक हाट बनि गेल छल तखने शहरी सोनियाँ कहलनि "सुनै जाउ ।एकटा उपाय अछि ।कोनो कैसेट बजा कऽ गीतक काज चलाओल जाए आ बजारमे सब तरहक फोटो भेटै छै ।तखरे साटि देल जाए ।"
सगरो कोहबर कृत्रिम अरिपन आ कृत्रिम गीतसँ चमकऽ-गुंजऽ लागल ।हम एकातमे ठाढ़ नव जोड़ीकेँ देख रहल छी ।हमरा कृत्रिम कोहबरमे दुनूक बीच कृत्रिम प्रेमक आभास भऽ रहल अछि 




रचनाकार संपर्क :

अमित मिश्र
मेल : amit11193@gmail.com
मो. :  091221 05183


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