Monday, April 17, 2017

'बैन-स्टेंड' आ दरिभङ्गाक म्यूजिकल लेजेसी

काल्हिए मैथिली ठाकुर राइजिंग स्टारक पहिल फाइनालिस्ट बनलीह अछि। संपूर्ण मिथिला एहि धियाक विलक्षण प्रतिभा सँ आह्लादित अछि। एहन मे अपन मुलुक सँ इतर नार्वे मे डाक्टरी कए रहल एक मैथिल केँ मोन पड़ैत छनि 'बैन-स्टेंड' माने की मनोकामना मंदिरक सोझाँ बला पोडियम। दरिभङ्गाक म्यूजिकल लेजेसीक मादे डा.प्रवीण झा बैंड-स्टैंड, लैंड ऑफ ध्रुपद, अमजद अली खानक पितामह आ पं. रविशंकरक चर्च करैत जाहि समृद्ध विरासत सँ परिचय करबा रहल छथि से बेस रोमांचित करैत अछि। डा. झा सम्प्रति एखन अपन नार्वे प्रवास मे रहैत हिंदी मे धुरझार लीखि रहलाह अछि आ 'चमनलाल की डायरी' नाम सँ हिनक एक पोथी सेहो प्रकाशित भेल छनि। ई-मिथिला पर पहिलुक बेर पढ़ी डॉक्टर साहेबक ई रुचिकर म्यूजिकल ट्रीटमेंट : -

मैथिली ठाकुर के टी.वी. पर देखैत रही त' मनोकामना भेल जे जीत जाथि। मनोकामना मंदिर मोन पड़ि गेल। मनोकामना मंदिरक सोझाँ एकटा गोलाकार 'पोडियम' अछि। आब ओ 'पोडियम' विक्षिप्त अछि, मुदा कखनो ओ 'बैंड-स्टैंड' छल। हमरा जनैत 'बैंड-स्टैंड' सलमान खानक निवास सेहो थीक। ग्लैमरक तीर्थस्थली। मनोकामनो मंदिर कम नहि। देबाल पर कतेक नहि प्रेम-युगलक नाम अंकित अछि। बजरंग बलीक देबाल पर प्रेमी-प्रेमिका दकचि रहल अछि।

आब बंबईक 'बैंड-स्टैंड' में सलमान खान निवास करइ छथि आ दरिभंगाक 'बैंड-स्टैंड' में गाए-महीस। मुदा किछु दंत-कथा सुनलहुँ।

सरोद वादक अमजद अली खान एकटा पितामह (पितामहक भाय) अही 'बैंड-स्टैंड' पर कखनो सरोद बजबति छलाह। दरिभंगे निवास करैत छलाह। बिसमिल्लाह खान जखैन जुआन छलाह, त' ओहो दरिभंगा आबि शहनाई बजबति छलाह। बेजाय नहि लगति हेतैक नरगौनाक आगू 'ओपेन-एयर' संगीत समारोह। मुदा हमरा फूसि लगति अछि।

किछु दिन पूर्व गजेंद्र बाबूक एकटा किताबक किछु अंश हाथ लागल। सितार वादक पं. रविशंकर अपन बंगाली में लिखल जीवनी में सेहो चर्चा कयलनि। हुनक गुरू दरिभंगा आनि रामेश्वर पाठक जी सँ किछु सिखबय चाहैत छलखिन। 'गंडा' बन्हबय चाहति रहथिन। रामेश्वर पाठक दरिभंगा महाराज अहिठाम सुरबहार-सितार वादक। 'गंडा' त' नहि बन्हलखिन मुदा पंडित रविशंकर अप्पन जीवनी में हुनका उचित श्रेय देलखिन। रामेश्वर पाठकक कोनो अंश,कोनो स्वर आबनहि भेटत। इहो फूसिए बूझल जाए।

जर्मनी के पीटर पानके जखनि ध्रुपदक श्रोत तकति अएलाह त' दरभंगा आबि दम धयलनि। 'लैंड ऑफ ध्रुपद'। एकटा ध्रुपद गायिका असगरी बाई के सुनति रही, त' ओ चर्चा कयलनि जे देश भरि सँ ध्रुपद गायक दरभंगा में जमा होइत छल। एत्तुका मलिक जी सभ छला, डागर साहेब छला, आ' ओहो छली। ओ अपने शाकाहारी छलीह। माछक तेहन विन्यास छलहि कि हुनका विरक्ति भय गेलनि। हमरो एतेक फूसि सुनि जेना विरक्ति भय गेल।

बैंड-स्टैंड? लैंड ऑफ ध्रुपद? अमजद अली खानक पितामह आ' पं. रविशंकरक गुरू? एहनो कतउ संभव छहि? गप्प बूझि अनठा देलहुँ आ' हमर बयसक दू टा ध्रुपद गायक निशांत-प्रशांत के सुनय लगलहुँ। आब ई नहि कोई कहय कि ओहो दरिभंगे सँ छथि!

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3 comments:

  1. अहाँ केर फूसि फूसि म एकटा फूसि हमहू जोड़ै छी जे अहां बहुत नीक सं कोनो विषय के प्रस्तुत करै छी।
    मन गदगद भ गेल पढ़ि क।

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