Friday, December 23, 2016

श्याम दरिहरेक कथा बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम

मैथिलीक प्रतिष्ठित कवि-कथाकार श्याम दरिहरे कें विगत २१ दिसम्बर कें साहित्य अकादेमी दिस सँ बर्ख २०१६ 'क मैथिलीक मूल पुरस्कार देबाक घोषणा कयल गेलनि अछि. ई पुरस्कार हुनका बर्ख २०१३ मे, नवारम्भ सँ प्रकाशित कथा संग्रह 'बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम' लेल देल जेतनि. आइ अपने  समस्त ऑनलाइन पाठक लेल 'ई-मिथिला' पर एही पोथीक शीर्षक कथा  'बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम' देल जा रहल अछि, पढ़ल जाउ- मॉडरेटर.


बड़की काकी के गमैया साइबर कैफे पर अबैत देखि एकटा युवक बाजल ‘‘बड़की काकी के इमेल के पठबैत रहैत छनि ? ’’
’’ एकटा कोनो अमेरिकन महिला छैक जे बेशीकाल इमेल करैत छनि हिनका। ओ इमेल केवल शनिए दिनकऽ पठबैत छैक। काकी जखन अइठाम अबैत छथिन तऽ हम हुनका पढ़िकऽ सुना दैत छिअनि।‘‘ साइबर कैफेक मालिक नित्यानन्द बाजल।
‘‘अरे वाह! तखन तऽ सते बड़की काकी चिट्ठी सँ इमेल भऽ गेलखिन। ’’ दोसर युवक ठहाका लगबैत बाजल।
‘‘अँए हौ नित्याबाबू ओ अपन इमेल कोना खोलै छथिन ! ‘‘पहिला युवक पुछलकइ। नित्यानन्द अइबेर गमैया साइबर कैफेक उपयोगिता बुझबैत बाजल ’’ सबहक हाथमे जखन मोबाइल आबि गेलैक तऽ हमर ई टेलीफोन बूथ घाटा मे जाए लागल। तखन हम एकटा कम्प्यूटर आनिकऽ गाम मे यैह तऽ क्रान्ति अनलियैक रौ बाबू। आबतऽ कतेक गोटा अइ साइबर कैफेक लाभ उठा रहल छथि। बड़कीकाकी सेहो एकटा स्थायी गाहकि छथि । हम बड़कीकाकीक इमेल आइ.डी. टाइप कऽ दैत छिअनि तऽ ओ अपने पासवर्ड टाइप कऽ दैत छथिन। इनबाक्स खुजला पर हिन्दी इमेल जे अंग्रेजी मे लिखल रहैत छैक से हम पढि दैत छिअनि। फेर ओ अपने रिप्लाइ के क्लिक कऽकऽ हमरा जे कहैत छथि से हम हिन्दी मे बदलिकऽ अंग्रेजी मे टाइप कऽ दैत छिऐक आ सेन्ड पर क्लिक कऽ दैत छिऐक बस्स, वेरी सिम्पुल। ’’
नित्यानन्दक बात समाप्त होइत होइत बड़की काकी साइबर कैफे पहुँचि गेल छलीह। सब युवक उठिकऽ प्रणाम केलकनि। ओ आशीषक बचन कहैत भीतर चलि गेलीह। संगे नित्यानन्द सेहो गेल। कम्प्यूटर आॅन भेलाक उपरान्त इन्टरनेट कनेक्ट भेले छलनि की बिजली चलि गेलैक। नित्यानन्द अफसोच करैत कहलकनि ‘‘बड़की काकी आइ तऽ जेनरेटर मे तेलो नहि अछि। अगर अहाँ थोड़ेक काल अइठाम बैसी तऽ हम साइकिलसऽ डीजल लऽ आनी।’’
‘‘हँ हँ ठीक छैक तों जा ने बौआ, हमरा अखन घरमे तेहन कोनो काजो नहि अछि। अहीठाँ बैसइ छी। डैग्नी बेटी कएबेर फोन कऽ चुकल अछि। हम इमेल के उतारा दइएकऽ घर जाएब। ’’ बड़कीकाकी कहलखिन।
नित्यानन्द चलि गेल तऽ बड़की काकी एकटा काठक कुर्सी पर बैसि गेलीह। कुर्सी पर बैसिते आइ फेर मोन पड़ए लगलनि पछिला घटना जखन बड़की काकी मुँहेभरे खसल छलीह गेटक बाहर। तेहन अनचोके मे पुतोहु ठेलि देने रहनि से जा  सम्हरैथ-सम्हरैथ ता गेटक बाहर फेका गेल छलीह। पुतोहु चटदऽ गेट अन्दर सऽ बन्न कऽ लेने रहथिन। ओ तऽ रच्छ रहलनि जे मुँह नाक नहि टुटलनि। मुदा आब ओ जाथु कतए। अमेरिका मे तऽ बाहरक दुनिया हुनका नहि बुझल गमल छनि। घरो तेहन छैक जे गेटसऽ बाहर होइते देरी उघार। ने कोनो दलान ने अंगनइ ने कोनो छहरदेवाली। अपन जमीन कने दूर धरि छैक अवस्स मुदा ओहि मे कतरल सजावटी घास लागल छैक। छहरदेवाली नहि दऽ सकैए केओ। अइ घरके कौन्डो कहल जाइत छैक। बड़की काकी सैन्डिआगोक ने एकोटा रोड जनैत छलीह ने अरोस परोस मे ककरो सँ परिचय छलनि। तेहने बिख्ख अइठामिक भाखा। अपन बेटा-पुतोहु के छोड़िकऽ ओ ककरो नहि चिन्हैत छथिन। आब ओ कत जाथु। ककरा लग जाकऽ बैसथुगऽ। किछु नहि फुरा रहल छलनि। घर भीतरसऽ बन्न आ बाहर अनभुआर अनठीया देश। ने फोन ने मोबाइल। बड़कीकाकी ठामे केवाड़मे सटिकऽ बैसि गेली। दुनू आँखि सँ नोर गाल पर दऽकऽ टघरि गेलनि।
ई घर हिनकर बेटाक अप्पन छनि। अमेरिका मे घर किनब बड़ कठिन नहि छैक। अगर ठीकठाक नौकरी करैत छी तऽ बैंक कर्ज देबा लेल सदिखन बिर्ते रहैत छैक। आ बड़की काकीक बेटा तऽ भने वैज्ञानिक छथिन अमेरिका मे। डा0 अजितेश आइआइटीक बीटेक  आ एमआइटी मैसेच्युसेटसक एम0 एस0 आ पीएचडी। अपना लेबोरेटरी मे प्रतिष्ठित लोक छथिन। अजितेश के आइआइटी कराबएमे बड़कीकाकी अपना जीवनक की की गमौने छथि से सौंसे गामक लोक जनैत छनि। बड़का नैयायिकक बेटा सँ बिआह भेल छलनि मुदा ससुर के आँखि मुनिते घरवला दारूक निस्सा मे भेर रहए लगलखिन। जँ बड़कीकाकी तुरते घरक कमान अपना हाथ नहि लितथि तऽ घरवला बीत-बीत बेचिक पीबि जइतथिन। बड़कीकाकी छोटोटा चास-बास सऽ घरके सम्हारलनि। घरवला के एकटा तृतीय श्रेणीक सरकारी नौकरिओ छलानि मुदा वेतनक बड़का हिस्सा ओ दारूएमे गमा दैत छलखिन। बड़कीकाकी  बेटीक बिआह आ अजितेशक पढ़ाइमे गुदरी भऽ गेल छलीह मुदा इज्जति भरमासऽ गमैया जीवन मे सदिखन रहली। साहस तऽ एहन जे आइआइटी मे जखन अजितेश के डीआरडीओ सँ सशर्त स्कालरशिप  भेटलैक तऽ ओ मना कए देलखिन। कहलखिन जे ‘‘ डीआरडीओ मे पाँच बरख नौकरीक बाध्यताक  संग अगर पढ़बह तँ नीक इन्जिनियर नहि होएबह तैं स्वतंत्र रूपें पढ़ह। ’’
बेटा संदेह व्यक्त करैत कहने रहनि ‘‘ माए  चारि साल धरि एतेक रूपया कतसऽ अनबही।’’
बड़की काकी कहने छलखिन जे ‘‘ सब काज भगवान करैत छथिन। मनुखक वश मे की छैक। हमरा सनक लोकक बेटा आइआइट मे गेलैक। से सपनो कहाँ छल। तखन जे भगवान सपना देखौलनि वैह पारो करताह। तो चिन्ता जुनि करह । तों खाली पढ़ह।’’
आऽ से सत्ते , अजितेश पढ़ि कऽ ढेरी कऽ देलखिन। बीटेकक बाद एकटा कम्पनीक नौकरीक माध्यमे अमेरीका अयलाह आ अपना बले एमएस आ पीएचडी कयलनि।
एमएस करबाक क्रम मे अजितेशक भेंट एकटा भारतीय छात्रा सुष्मिता सँ भेलनि। संयोग सँ ओ मैथिल सेहो छलखिन। ओहि बैच मे ओएह दुनू गोटा मैथिल छलाह। मित्रता स्वभाविक छलनि। से भेलनि। मुदा दुनू गोटा मे एकटा बड़ पैघ भिन्नता छलनि। अजितेश छलाह आर्थिक इनारसऽ निकलल बेंग आ सुष्मिता छलखिन धनक बड़का पोखरिक रेहु। यद्यपि आब सब तरहें अजितेश कन्या सँ बीस छलखिन मुदा आर्थिक संकीर्णता सँ निकलल  लोक मे जे एकटा मानसिक संकोच रहैत छैक से अजितेश मे स्वाभाविक रूप सँ एखनो छलनि। अजितेश अपन आर्थिक संघर्ष के ट्राफी जकाँ  मानैत छलाह। हुनका बुझाइत छलनि जे एतेक अभावक बादो एतऽ धरि पहुँचब हुनकर उपलब्धिक मूल्य के बेशी बढ़बैत छनि। ओ अपन अभावक कथा कहिओ नुकबैत नहि छलाह मुदा हुनकर कन्यामित्र सुष्मिता एहि भावके कलंक आ अपमानजनक बुझैत छलखिन ‘‘ अहाँ की सदिखन अपन दरिद्रताक कथा सबके सुनबैत रहैत छिऐक। ’’ ओ एकदिन कहनहुँ छलनि। ’’
‘‘ ई कोनो कलंक बात छैक की ? ’’ अजितेश आपत्ति कएने छलखिन।’’
‘‘कलंकक बात तऽ ई छैके।’’
‘‘ हम से नहि मानैत छी। अहाँक पापाजी पीडब्लूडी मे सुपरिन्टेडिंग इंजिनियर छलाह। घर मे कोनो कमी नहि छल तखन अहाँ आइटी बीएचयूसऽ बीटेक कए एतए धरि पहुँचलहुँ आ हमरा सबटा अभावे छल तखनो माए बेटाक संघर्ष आ अपन आत्मविश्वासक बदौलत सबटा कएलहुँ तऽ एहि मे गर्व बात छैक की कलंकक ? ’‘ अजितेश जोर दैत बाजल छलाह।
‘‘ अच्छा छोड़ू अइ पर बहस करब व्यर्थ थीक। ’’ सुष्मिता बात के  समाप्त करा देने छलखिन। 
सुष्मिता आ अजितेश जखन विवाह करबाक निश्चय कएलनि तऽ अजितेश माए के फोन पर सबटा बात कहने छलखिन।
बड़की काकीक पहिल प्रतिक्रिया यैह छलनि जे ‘‘ औतेक पैघ घरक बेटी तोरासऽ बिआह किए करतौक ? ’’
‘‘ किए  माए ? आब हमहूँ ककरो सँ कम कहाँ छी ? ’’ अजितेश माए के बुझौने छलाह।
‘‘ पढ़ाइ लिखाइ मे ओ तोरा सँ कम नहिए छथुन तऽ तों हुनकर बराबरी कोना कऽ सकैत छः। ‘‘ बड़की काकीक अनुभवी मोन संदेह व्यक्त कएने छलनि। अजितेश सब बात केे जस्टीफाइ कऽकऽ माएके मना लेने छलाह। बाप के किछु कहबे बेकार छलनि तैं ई भार ओ माए पर छोड़ि देने छलाह। बड़की काकी घरवला के सबटा सुना दने छलखिन। बिआह दान सबटा बेश टोप टहंकारसऽ संपन्न भेल छलैक। दुरागमनक बाद सुष्मिता जखन छोटसन बजारनुमा गाममे अएलीह तऽ बड़ निराशा भेल रहनि। सासुरक एते छोट आसन बासन देखिकऽ झुरझमान भऽ गेल छलीह। एक सप्ताहक तऽ बात छलनि ओ चाहितथि तऽ नीक कनियाँ बनिकऽ यश आ सम्मानक संग अमेरिका वापस जा सकैत छलीह मुदा ताहि मे हुनकर बपौती दंभ देवाल बनि ठाढ़ भऽ गेल छलनि। ओ अपन दबंगइ आ असंतोष नुकाबक प्रयास तऽ नहिए कएलनि उल्टे ओकर प्रदर्शनसऽ सेही बाज नहि अएलीह। बड़की काकीक अनुभवी आँखिसऽ कोनो बात नुकाएल कोना रहि सकैत छल। ओ कनियाँक चालि कोवरे मे चिन्हि गेल छलीह मुदा चिडै़ तऽ हाथ सँ उड़ि गेल छलनि। बड़कीकाकी आब जरैत घर सँ जतबे-ततबे बचाबक प्रयास मे लागि गेल छलीह। आन लोक किछु नहि बुझए आ बेटा के दुख नहि होइक ताहु दुआरे ओ  पुतोहुक अभ्यर्थना मे जुटि गेल छलीह। टोल-गोल मे आ बेटा लग बड़प्पन ढकए लगलीह । नवकनियाँ सँ  नीक व्यवहारक अपेक्षा करब छोड़ि झाँपन देबए मे प्राणपण सँ भिड़ल रहलीह। यद्यपि पुतोहु हुनका सँ सेवा कराएब अपन अधिकार आ एतेक छोट लोकक ओहिठाम विआह कए उपकारक क्षतिपूर्ति बुझि रहल छलनि मुदा बड़की काकीक  मुँह नहि केओ मलान देखलकनि।
बेटाक छुट्टी समाप्त भेलनि। ओ सब अमेरिका जाए लागल छलाह तऽ कहलखिन जे ‘‘ माए तोहर पासपोर्ट बनाबए गेल व्यवस्था कए देने छिऔक। तीन मास मे पासपोर्ट बनि जेतौक। तकर बाद वीसाक व्यवस्था करबा देबौक। हम छः मासक बाद आबए वला छी। तोरा अमेरीका लऽ जेबौ। तों तैयारी करब प्रारंभ कऽ दे एखने सँ। ’’
बेटा पुतोहु नीके नीके चलि गेलखिन। माछक गन्हके सेमार सँ झँपबाक प्रयास मे बड़की काकी कतेक सफल भेल छलीह तकर ठेकान तऽ हुनका नहि छलनि हँ एतेक संतोष अवश्य छलनि जे ओ अपना प्रयास मे कोनो कमी नहि कएलनि।  बेटाके ई दुख नहि होबए देलखिन जे ओकर कनियाँ ओकरा माए के सासु कऽकऽ नहि गुदानैत छैक।
आब ई नवका समस्या आबि तुलायल छलनि जे छः मासक बाद बेटा आबिकऽ अमेरिका लऽ जेतनि। ओतए फेर कनियाँ ओहिना करथिन तऽ ओ कते दिनधरि बेटा सँ बातके नुका सकतीह। बड़की काकी नहिं चाहैत छलीह जे हुनका कारण दुनू बेकती मे कोनो तरहक  मनोमालिन्य होइक। ओहि कलंक सँ बाँचए चाहैत छलीह। ओ तऽ सोचने छलीह जे ओ सब भने अमेरिका मे रहत आ हमसब गाम मे। ने जाएब ओइ टोल ने सुनब ओ बोल। मुदा से भऽ नहि सकलनि। छः मासक बाद बेटा आबि कऽ वीसा बनबाए अमेरीका लऽ अनलखिन आऽ आइ एहन भेलनि जे बिना कोनो कारणे पुतोहु घर सँ बाहर धकेलि देने छनि। बड़की काकी के बुझल छनि जे बेटा एखन तीन दिन घर नहि औथिन। ओ आब वीकेन्ड मे शुक्रक सांझ मे औथिन आ आइ तऽ मंगले दिन छैक।
बड़की काकी गेट मे सटि कऽ बैसल छलीह। नोर टघरि रहल छलनि मुदा जहाँ ककरो देखैत छलखिन की नोर पोछि लैत छलीह। गोटे तीन घंटा ओ ओहिना बैसल रहली तखन जाकऽ पुतोहु पट खोललखिन आ’ बड़की काकी बिनु बजौने अन्दर चलि गेलीह। नहेलनि, अपने सँ बना क' खएलनि। हुनका तखनो होइन जे बड़काक बेटी छथिन। अगराएल छथिन। बाद मे नीक भऽ जेथिन। पुतोहु सँ कते दिन आमर्ख करब। ओ आशक डारि एते जल्दी छोड़ि देब सिखनहि नहि छलीह। उल्टे वैह कनियाँ सँ भोजनक आग्रह कएलखिन। मुदा पुतोहु ततेक जोर सँ डाँटि लेलखिन जे बड़की काकी  अपरतीव सन भऽ गेलीह। हुनका साफ कहल गेलनि जे सासुक पदवीक तरी मे हुनका भोजनो लेल आग्रह करबाक हैसियत नहि छनि। बड़की काकी अपनसन मुँह लऽकऽ अपन ओछाओन पर सूति रहली।
शुक्रक साँझ बेटाक आबए धरि बिनु कोनो नव बात वा घटनाक बिति गेलनि। बेटा के तऽ बड़कीकाकी अपन घरनिकालाक भनकिओ नहि लागए देलखिन।
पुनः सोमदिन डा0 अजितेशक गाड़ी लाॅस एंजिल्स दिस विदा होइते बड़कीकाकी घर सँ बाहर कऽ देल गेलीह। तकर एक घंटाक बाद पुतोहु सेहो घर मे ताला बन्न कए अपन गाड़ी लए आफिस चलि गेलखिन। बड़की काकी बाहरे बैसल रहि गेलीह।  कुंजी माँगक साधंस नहि भेलनि। डर भेलनि जे कहीं ई हाथ ने छोड़ि देथि।
ओहिदिन बड़की काकी साढे पाँच बजे धरि भुखले पिआसल गेट मे सटि कऽ बैसल रहली। ककरो अबैत जाइत देखथिन तऽ ओना बैसि जाथि जे केओ संदेह नहि करए। तकर बादो एकटा अमेरिकन महिला आबि कऽ पुछलकनि ‘‘ हलो गुड मार्निंग। हाउ डू यु डू। मे आइ हेल्प यू इन एनी वे। ’’ बड़की काकी भाषा नहि बुझलखिन तैओ हाथ जोड़ि कऽ प्रणामक मुद्रा बना लेलनि। ओ अमेरिकन महिला मुसकाइत  चलि तऽ गेलैक मुदा ओकरा किछु संदेह अवस्स भेलैक किएक तऽ ओ पछिलो दिन हुनका कनैत गेट पर बैसल देखने रहनि। आइ ओकरा एक मोन भेलैक जे 911 डायल कए पुलिस के सूचना दैक मुदा अनकर समस्या के बिनु बुझने ओहि मे टाँग अड़ाबक मोन नहिं भेलैक।
आब बड़कीकाकीक रूटीन भऽ गेल छलनि जे सप्ताह मे एक-दू दिन ओ बाहर कऽ देल जएतीह। साढ़े पाँच बजे पुतोहु पट खोलथिन आऽ ओ बिनु कोनो शिकायतक घर मे जेतीह आ तखन अनजल करतीह। डा0 अजितेश दू मासक बादो माएक एहि त्रासदी सँ अनभिज्ञे छलाह मुदा ओ अमेरिकन महिला चुप नहि बैसल छल। ओकर नाम छलैक डैग्नी विलियम। ओ अपन पति सँ विमर्श कएलक आ अपन एक सहकर्मी भारतीय आ इन्टरनेट सँ हिन्दी सीखब प्रारंभ कयलक। बड़की काकी के जखन तखन बन्द घरक बाहर बैसल आ कनैत देखि ओकर करेज फाटय लागल छलैक। ओकरा अपना माए मोन पड़ि जाइत छलैक जे बचपने मे ओकरा छोड़ि कए दोसर विआह कए शिकागो चलि गेल छलैक। डैग्नी हिन्दी सीखए मे बेशी सँ बेशी समय दऽकऽ एके मासमे टो-टाऽक हिन्दी बाजब आ बुझब प्रारंभ कए देलक। किछु विशेष वाक्य तऽ ओ सीधे सीधे  रटि लेलक। अंग्रेजी मे ओकर अर्थ बुझि लेलक। आ तखन एक दिन ओ बन्द गेटक बाहर बैसलि बड़कीकाकीक सोझा दुर्गा बनि अवतरित भेल ‘‘हलो गुड मर्निंग मदर। आप कैसी हैं ? ’’
हिन्दी सुनि बड़कीकाकी चैंकि गेलीह। मोने-मोन खुशीओ भेलनि जे एकोगोटा तऽ हिन्दी मे बजनिहारि भेटलनि। ओ बिनु किछु बजने आने दिन जकाँ हाथ जोड़ि देलखिन। मुदा आइ तऽ डैग्नी किछु सोचिकऽ आयल छलि। ओ ओही अह्लाद सँ बड़कीकाकी लऽग ठाढ़ छलि जेना बालपन मे बिछुड़ल अपना माए लऽग ठाढ़ होअए। ओ बाजलि ‘‘ नो नाट लाइक दिस टुडे। मेरा नाम डैग्नी विलियम है। उस सामने हाउसमे रहती हूँ। आप मेरे घर चलिए।’’
बड़की काकी असमंजस मे पड़ि गेलीह! की बाजथु!! मुदा आश्चर्य तखन लगलनि जखन डैग्नी हुनकर बाँहि पकड़ि कऽ आग्रह करए लगलनि। डैग्नीक उज्जर सपेत चेहराक नील आँखि मे  नोर भरल देखलखिन।  ओ कहलकनि ‘‘ यू आर लाइक माइ माँ। ’’ बड़की काकी ओकर आंगुरक इशारा सँ ई बात बुझिओ गेलखिन। ओ ओकर प्रेम के नहि टारि सकली आ डैग्नीक संग ओकर घर चलि गेल छलीह।
डैग्नी विलियम अपना घरक सबटा बात बुझा देलकनि। सबटा देखा देलकनि आ कहलकनि इहो घर अहींक अछि। जखन मोन होए आबिकऽ रहू। हम सब आफिस चलि जायब तऽ घरक चाबी अहाँ के दऽ देब। ओहुनो हमर घर  बेशी काल बन्न  नहि होइत अछि किएक तऽ हमर दुनू बेकतीक आफिस आ बच्चा सभक स्कूलक टाइम तेना छैक जे घर बन्न करबाक जरूरते नहि होइत छैक। डैग्नी विलियम इहो कहलकनि जे अहाँ हमरा घर अबैत छी से अपना डाॅटर-इन-ला के नहि कहब नहि तऽ ओ अहूठाम आबए पर रोक लगा देत।
आब तऽ बड़कीकाकी के एकटा आश्रय भेटि गेल छलनि। सप्ताह मे दू-तीन दिन हुनका डैग्नीक घर मे आश्रय लेबहि पड़ैत छलनि। डैग्नीक बच्चा सभ सेहो हुनका सँ घुलिमिलि गेल छलनि। इहो एकटा अजगुतेक बात छलैक जे किछुए दिन मे बड़की काकी ओहि घरक सबटा बात मोटामोटी बुझए लागल छलखिन। प्रेमक  संभाषण मे भाषा ने तऽ कखनो बाधा होइत छैक ने शर्त। बच्चा सभ हुनका विडियो गेम सिखबैत छलनि, चाकलेट, डोनट, कूकी आदि खुअबैत छलनि। ओहो ओहि बच्चा सभ मे खूब रमए लागल छलीह। मि0 विलियम सेहो बड़की काकीक ध्यान राखए लागल छलनि। बड़की काकी आश्चर्य मे डुबैत रहैत छली जे लोक अमेरिकाक बारे मे की कहादन सब गुलंजर उड़बैत रहैत छैक। जे लोक परदेशीक दुख देखि कऽ मदति करैत छैक ओ सब खराब कोना भऽ सकैत छैक। जे सब अनेरे अनजान महिला के माए जकाँ सम्मान दैत छैक ओ सब तऽ अवस्से प्रशंसनीय छैक। अपन पुतोहु घर सँ निकालि दैए बिनु कारणे आऽ ई विदेशी लोक एतेक ध्यान रखैए बिनु कारणे। बड़कीकाकी के लगैत छलनि जे अमरिकाक लोक ततेक भरल-पुरल छैक आ कष्ट सँ ततेक दूर रहैत छैक जे ओकरा सभक मोन मे निकृष्टता अबिते ने छैक।
एक दिन डैग्नी विलियम द्वारा बड़कीकाकी संबोधन सुनिकऽ मि0 विलियम पूछने रहथिन ’’ वाह! ई बड़कीकाकीक की मतलब छिऐक ’’
‘‘ बड़कीकाकी माने एलडेस्ट आन्टी । एहि मदर के ईंडिया मे सब बड़कीकाकी कहैत छनि तैं हमहुँ हिनका आब बड़कीकाकी संबोघन करैत छिअनि। ’’ डैग्नी फरिछा कऽ कहलकनि।
‘‘ ओइ सँ बढ़िया तऽ मदर छलए। हम तऽ मदर कहिते रहबनि। ’’ मि0 विलियम बजलाह।
‘‘ बच्चा सब सेहो हिनका दादी कहैत छनि। ’’ डैग्नी सूचना देलकनि।
‘‘ ओऽ तऽ दादी माने अवश्य ग्रैन्डमाॅम। ’’
‘‘ हँ।’’
लगभग दूमास धरि अहिना चलैत रहलैक। पुतोहु हप्ता मे दू-तीन दिन घरनिकाला देबे करनि आ बड़कीकाकीक मनलग्गु बास डैग्नीक घर मे भइए जाइन। जाहि दिन हुनका अपना घर मे रहबाक सौभाग्य भेटबो करनि ओहू दिन ओ पुतोहु के घर वापस आबए सँ पहिले धरि डैग्नीएक बच्चा सब संग रहए लागल छलीह। मात्र वीकेन्ड ओ अपना घर मे बितबैत छलीह।
डैग्नी एकदिन मि0 विलियम संग बिचार कऽकऽ डा0 अजितेश के सबटा बात सूचित करबाक प्लान कएलक। यद्यपि बड़कीकाकी जानिबुझि कऽ ओकरा सभ के पुतोहुक कोनो खिधांस नहि कहने छलखिन मुदा ओ सब काबिल लोक छल आ दू मास मे दू जोड़ दू बराबर चारि कऽ लेने छल । सब सँ पहिले डैग्नी विलियम इन्टरनेट पर बड़कीकाकीक एकटा इमेल आइडी रजिस्टर कयलक आ एकटा छोटका डायरी पर ओ बड़कीकाकीक इमेल एड्रेस लिखि देलकनि। ओ डायरी दैत कहलकनि ’’ई डायरी राखू बड़कीकाकी। अइपर अहाँक इमेल एड्रेस अछि। संसार मे कतहु रहू ई पता नहि बदलत। कोनो साइबर कैफे मे अपन इमेल पढ़ि सकैत छी।’’
बड़कीकाकी के बड़ उत्सुकता भेलनि पुछलखिन ‘‘ बेटी, हमर पता दुनिया भरि मे एके कोना हैत आ की हैत ? ’’ डैग्नी हँसैत कहलकनि ‘‘ अहाँक पता भेल बड़कीकाकी@हाटमेलडाटकाम।’’
फेर हुनका सभटा बात बुझा देलकनि। अपन इमेल एड्रेस ओहि डायरी पर लिखि देलकनि आ कहलकनि जे ‘‘ बेटाक इमेल एड्रेस सेहोे अइपर लिखा लेब। ’’
बेटा जखन एक वीकेन्ड मे घर अएलखिन तऽ समय देखि कऽ बड़कीकाकी  अपन डायरी दैत कहलखिन ‘‘ अइपर अपन इमेल एड्रेस लिखि दैह बौआ। ’’  डा0 अजितेश चैंकि उठलाह। ओ डायरी हाथ मे लऽकऽ पन्ना पलटलनि तऽ अंग्रेजी आ हिन्दी मे लिखल देखलखिन ‘‘बड़कीकाकी@हाटमेलडाटकाम।’’ संगे ओ डैग्नी विलियम्स2003@हाटमेलडाटकाम सेहो लिखल देखलखिन। ओ आश्चर्य सँ पुछलखिन ‘‘ माँ ई सब की छिऔ। ई के लिखि देलकौए ? ’’
‘‘यैह सामने जे घर छैक ने डैग्नी बैटीक। वैह हमर एहन पता बना देलकए जे सौंसे संसार मे एके रहतइ। ’’ बड़कीकाकी सहज भावें कहलखिन।
‘‘ डैग्नी बेटी!! ई के छइ! ओकरा सँ कोना पहचान भऽ गेलौए ? हम एतेक बरख सँ छी से हलो-हाए सँ बेशी पहचान नहि अछि आ तों ओकर बड़की काकी आ ओ तोहर डैग्नी बेटी ? से कोना भेलैक आ एते दिन कहलें ने किए!! ’’ डा0 अजितेश आब चिन्तित भऽ गेल छलाह। माए साफ-साफ कहए सँ परहेज कऽ रहल छलखिन। डा0 अजितेश अपन इमेल एड्रेस ओइ डायरी पर हिन्दी आ अँग्रेजी मे लिखि देलखिन। हुनका ई जानि कऽ आर आश्चर्य लगलनिे जे बड़की काकी पासवर्ड शब्द सेहो जनैत छथिन आ’ कम्प्यूटर पर पासवर्ड टाइप सेहो कऽ सकैत छथिन। अपना लैपटाप पर ओ माँक इमेल एड्रेस टाइप कएलनि आ माँ के अपन पासवर्ड लिखए कहलखिन। माँ पासवर्ड टाइप कऽ देलखिन। एतबे नहि ओ ‘‘लाग इन’’ के क्लिक सेहो कऽ देलखिन आ इनबाक्स खोलि  देलखिन। डा0 अजितेश तखन आर दंग रहि गेलाह जखन इनबाॅक्स मे डैग्नी विलियमक इमेल पढ़लनि। ओ अंग्रेजी आ हिन्दी मिश्रीत भाषाक इमेल  अंग्रेजी मे टाइप कऽकऽ लिखने छलनि जे ‘‘बड़कीकाकी अहाँ सत्ते मदर मरियम सन छी। हम आ हमर पति मदर नइ देखने छलिऐक। दुनू गोटाक  मदर बचपने मे छोड़ि कऽ चलि गेल छल। आब अहाँकें पाबि कऽ हमरा सबके बुझऽ मे आबि रहलए जे हमरा सभक जीवन मे मदर नहि रहला सँ की-की रिक्ते रहि गेल। अहाँ जखन हमर छोट बेबी के दुलार करै छी, ओकरा क्रीम लगा कऽ मालिश कऽ दैत छिऐक, हमरा बेटी के इन्डियन स्टोरी सुनबै छिऐक तऽ  अहाँके पकड़ि कऽ हमरा बहुत कनबाक इच्छा होइत रहैए। हमर पति एक दिन अहाँके दुनू बच्चा संग हँसैत खेलाइत आ’ बेबी के मालिश करैत देखि हमरे पकड़िकऽ कानए लागल छलाह। कहने छलाह जे ‘‘ वी मिस्ड मेनी आसपेक्ट आॅफ लाइफ विदाउट मदर। मदर तऽ सदा मदर रहैत छैक बिना कोनो जाति धर्म आ स्थानक बंधन के। हमसब डा0 अजितेशक थैन्कफुल छियनि जे ओ हमर सभक जीवन मे  एतेक पैध अनुभवक एपारच्युनीटी देलनि।’’
डा0 अजितेश इमेल पढ़ि कऽ संदेह सँ भरि गेलाह। ओ  पुछलखिन ’’ माँ तोरा इनबाक्स मे  एकटा ईमेल छौक से पढ़ने छैं। ’’
‘‘हँ डैग्नीक बेटी पढ़ि कऽ सुना देने अछि। बादमे डैग्नी बेटी सेहो बुझा देने छल।’’ बड़की काकी उत्तर देलखिन।
डा0 अजितेश प्रातः काल रविदिन मि0 डैग्नी विलियमक घर अप्यान्टमेन्ट लऽकऽ गेलाह। माए के  जानि-बुझि कऽ संग नहि लए गेलाह। मि0 एण्ड मिसेज विलियम घर मे हुनकर खूब स्वागत केलखिन। डा0 अजितेश माएक मादें पुछलखिन तऽ मि0 डैग्नी विलियम नहिओ चाहिक सबटा खिस्सा कहि सुनौलकनि। ओ इहो कहलकनि जे हम सब 911 मे फोन कऽ पुलिस हेल्प अहाँक माए के देआ सकैत छलहुँ मुदा  पत्निक अपराधक दंड हम सब अहाँ के नहि  भोगबऽ चाहलहुँ। तैं हमरा सबके बैसले  बैसल एकटा मदर हाथ लागि गेल। डा0 अजितेश दुख आ लाज सँ गड़ल जा रहल छलाह। अपना आप पर तामस भऽ रहल छलनि जे चारि मास सँ एतेक किछु भऽ रहल छलैक आऽ ओ किछु नहि बुझि सकलाह। ओ मि0 आ मिसेज विलियम के धन्यवाद दऽकऽ लजाइत अपना घर चलि अयलाह। पत्नि के किछु नहि कहलखिन। ओ पत्नि के नीक जकाँ चिन्हैत छलाह मुदा विदेश मे घिनबए नहि चाहलनि।
डा0 अजितेश निर्णय कयलनि जे जाधरि माँ रहत ओ लेबोरेट्री नहि जएताह। वर्क फ्राॅम होम करताह। जखन कखनो जायब आवश्यक भऽ जेतनि तऽ माँके सेहो संगे लाॅस एन्जिल्स लेने जेताह आ दोस्तक घर मे राखि देथिन। आबए काल फेर संगे लेने औथिन। माँक वीसा आब लगभग दूइए मास बाँचल छलनि। ई निर्णय ओ ककरो नहि कहलखिन। ओ सदिखन माएक संग रहए लागल छलाह मुदा मिसेज विलियमक ओहिठामक अबरजात बन्न नहि भेलैक। बड़कीकाकी सेहो अपन प्रणक रक्षा कएलनि। ओ अपना मुँहे बेटा के अपन कोनो दुख नहि कहलखिन।
बड़कीकाकी बड़ दुखी मोन सँ वीसाक अवधि समाप्त भेलाक बाद गाम चलि अएलीह। पुतोहुक चालि आ व्यवहार देखि एकदम चिन्तित भऽ गेल छलीह।
‘‘ ज्जा बड़कीकाकी सूति रहलहुँ की ! ’’ नित्यानन्द डीजलक डिब्बा उतारैत बाजल ।
‘‘ अँए! नइ नइ बौआ, बैसल बैसल अहिना आँखि लागि गेल छल।’’ बड़कीकाकी हड़बड़ाकऽ उठैत बजली।
‘‘बस ठहरु दू मिनट मे हम अहाँके इमेल पढ़ा दैत छी । देरी भेल बड़कीकाकी माफ करब। ’’ ई कहैत नित्यानन्द  जेनरेटर चलबए चलि गेल आ बड़कीकाकी कम्प्यूटर वला कुर्सी पर जा कऽ बैसि गेलीह। कम्प्यूटर खोलि कऽ इन्टरनेट  कनेक्ट कएलक नित्यानन्द।  बड़कीकाकीक इमेल एड्रेस लिखि देलकनि। बड़कीकाकी अपन पासवर्ड टाइप कऽ देलखिन। नित्यानन्द दूर ठाढ़ मुसकिआइत रहल। बड़कीकाकी एकाउन्ट के साइनइन कएलनि। नित्यानन्द आबिकऽ  डैग्नी विलियमक इमेल पढ़य लागल मुदा दूइए पांति पढ़लाक बाद ओ चुप्प भऽगेल।
‘‘चुप्प किए भऽ गेलहुँ बौआ! आगाँ पढ़ू ने। ’’ बड़की काकी बजली।
नित्यानन्द चुप्पे सौंसे मेल पढ़ि गेल मुदा बाजल किछु नहि।
बड़की काकी चिन्तित होइत बजली ’’ की बात छै! कोनो अशुभ बात लिखल छैक की। ’’
‘‘की कहू बड़कीकाकी! अजितेशभाइ दू दिन पुलिस कस्टडी मे छलाह। परसूए बाहर भेलाहए। ‘‘ नित्यानन्द आस्ते सँ कहलकनि।
बड़की काकी डर सँ काँपए लगली पूछलखिन ’’ से की केलकइ अजितेश ? ’’ ‘‘अहाँक पुतोहु 911 के काल कऽ कऽ पुलिस मे शिकायत कएने छलखिन जे अजितेश हुनका संग मारिपीट करैत छथिन। असली बात ई भेल रहैक जे डिसवासर मे बरतन राखए सँ पहिले अजितेश भाइ बरतन के पखारि नहि देने छलखिन। तैं बरतन कने गन्दे रहि गेलनि। ओही पर बाताबाती भेलनि आ बात बढ़ि गेलनि।’’ नित्यानन्द  इमेलक पूरा बात कहि देलकनि। 
‘‘ आब कत्त छैक अजितेश ? ’’ बड़की काकी पुछलखिन।
‘‘ओ पुलिस स्टेशन सँ निकलि कऽ सीधे सैन्डियागो सँ लाॅस एंजिल्स चलि गेलाह। घर वापस नहि अयलाहए। एतबे बात लिखल अछि। ’’ ओ बाजल।
बड़की काकी नित्यानन्दक हाथ सँ माउस लऽ कऽ साइन आउट क्लिक कएलनि आ आँचर सँ मुँह झाँपि घर विदा भऽ गेलीह।
एकर तीन मासक बाद पता लगलनि जे बेटा-पुतोहु मे तलाक भऽ गेलनि।
                                           
                                                           © -श्याम दरिहरे

(लेखकक अनुमति बिनु एही कथाक कतहुँ आन ठाम प्रकाशित  करब  कॉपीराइट एक्ट कें अंतर्गत  दण्डनीय अपराध  थिक )

3 comments:

  1. वाह! अति सुन्दर कथानक ।

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  2. Kana gail hamra....nor ruki nai rahal. Kalam ke jadugar premchand ke "Budhi Kaki" sau bees ahi ee adbhut rachna.

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  3. मैथिली साहित्यक खेबनहार कथा जकरा साहित्य अकादमी उचित सम्मान देलनि.

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