Friday, October 28, 2016

अमित पाठकक पाबनि केन्द्रित किछु गीत

मिथिला मे सभ तरहक मांगलिक अवसर, पाबनि-तिहार आदि मे गीत गयबाक पुरान परम्परा अछि. कोनो भी शुभ काज, आकि पाबनि बिनु गीतक संपन्न नहि होइत अछि. अलग-अलग अवसर पर अलग-अलग गीत गाओल जाइछ, आ गीतक मादे ओहि अवसर सं जुरल देवी-देवताक आराधना कयल जाइछ. पाबनि-तिहारक समय चलि रहल अछि. आउ, अपनों सभ मैथिलीक युवा प्रतिभाशाली गीतकार अमित पाठकक धनतेरस, दियाबाती, भरदुतिया, छठि पर केन्द्रित किछु टटका गीतक संग पाबनि-तिहारक एहि श्रृंखलाक आनंद उठाबी. (मुकुन्द मयंक)


[गाम -कोरथू, जिला -दरभंगाक रहनिहार , अमित पाठक सम्प्रति पटना मे रहैत छथि आ जीवनों यापनक लेल मेडिकल सेक्टर मे काज करैत छथि. अमित मूल रूप सं विशुद्ध गीतकार छथि आ एहि बहुविधावादी समय मे गीत विधाक बचेबाक लेल प्रतिबद्ध छथि.आइ जखन कि मैथिली गीतक भोजपुरीकरण भ' रहल अछि, अमित पाठक पूर्णतया साहित्यिक गीतक सृजन क' मैथिली गीतक नीक भविष्यक बाट प्रसस्त क' रहल छथि- मॉडरेटर]


 "धनतेरश"

आयल परम शुभ दिन धनतेरश,
अमित पाठक
होयत सुमंगल भाग हे !
सब घर घरणी बेसाहथि शुभधन,
होय मोर अमर सोहाग हे !!
चानन सन् आँगन नीपल-पोतल,
घर-घर मंगल गान हे !
भरल-भरल आजु हाट-बजारे,
सजि गेल स्वर्ण दोकान हे !!
मनबथि सकल सोहागिन हर्षित,
होऊ धन-लछ्मी सहाय हे !
सुख सँ भरल अहिवात हमर हो,
दुख केर झोली उड़ियाय हे !!
चारु कात घर केर दीप जड़ाओल,
निज मन आश लगाय हे !
बिसरथु यमदेव अपन समय-बेर,
अलच्छ" घड़ी बिति जाय हे !!
आयल परम शुभ दिन धनतेरश,
होयत सुमंगल.............

दियाबाती

 शुभ शुभ शुभ दिन आइ हे,
                        औती माँ लछ्मी!
अन-धन बरिषत आइ हे,
                        औती माँ लछ्मी!
शुभ शुभ शुभ............
चकमक घर आँगन सब चमकै
अनूप सुगन्ध दशोदिस गमकै-२
जगमग दीप जड़ाय हे,
                        औती माँ लछ्मी!
शुभ शुभ शुभ.............
फेरब ऊक करब हम सुमिरन
छी त' अबोध करब पर अर्चन-२
मन में आश लगाय हे,
                        औती माँ लछ्मी!
शुभ शुभ शुभ...............
महिमा हिनक सकल जग पसरल
गुण नहि कियो कतहु अछि बिसरल-२
निर्धन धनिक कहाय हे,
                        औती माँ लछ्मी!
शुभ शुभ शुभ.............
करब अबुझ मन एक निवेदन
वास करु धरती पर कण-कण-२
सब पर होऊ सहाय हे,
                        औती माँ लछ्मी!
शुभ शुभ शुभ.............
                        औती माँ ...........
अन-धन बरिषत.........
                         औती माँ...........

छठि

(१)

चलु चलु चलु बहिना चलु छठि घाट हे,
छठि महरानी हेती ताकैत बाट हे-२
चलु चलु चलु.........
जैह अछि सैह लय चलु माय पास हे-२
रोष नहि करती माँ ठोकि देती माथ हे-२
चलु चलु चलु............
डाली रंग-विरही आ रंग-रंग पड़ात हे-२
अरघ देवनि आइ-काल्हि दीनानाथ हे-२
चलु चलु चलु.............
कहु चाहे कहु नहि पूर हैत आश हे-२
माय के नजरि सब पर एक साथ हे-२
चलु चलु चलु.............
छठि महरानी..............


(२)

ऊगह हे दीनानाथ अरघ के बेरिया
                    आब बेर बीतल जाय
कतेक कठिन व्रत ठानल बरतिया
                     आब हूब टूटल जाय
ऊगह हे दीनानाथ.............
जहिये नहाय-खाय तहिये अराधल
पूजब छठि माइ के गोर,
बड़े रे जतन राखि कयलनि खरना
जल बिनु सूखल ठोढ़ !
तखनहुँ हर्षित मोनहि बरतिया
                   रहलनि आश लगाय
ऊगह हे दीनानाथ..............
डुबितहुं तोहर मान जे राखल
पहिल अरघ तोहे देल,
आब तहुँ राखह मान सुरुजदेव
ऊग' ऊग' भेल बड़ बेर !
करहु कृपा सब पर हे दिनकर
                     सब पर होउ सहाय
ऊगह हे दीनानाथ..............
कतेक कठिन व्रत................

(३)

छठि माइ के महिमा अपार,
              जगत में के ने जानइए
सबहक  भरथि  भंडार,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के...............
बांझिन के पूत देल कोढ़िन के काया
छोट-पैघ ऊँच-नीच सब लेल छाया
सब लए फुजल दरबार,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के...............
निर्धन के ध'न देल निर्मम के ममता
मैया के किरपा सँ केकरो ने खगता
भेल सब सपना सकार,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के................
माइ परमेशरी बलाय-रोग हरती
दूरहि दरिद्रा आ पूर आश करती
संकट सँ करती उबाड़,
             जगत में के ने जानइए
छठि माइ के................
आऊ हिलि-मिलि करी पाबनि छठि के
घूरि क' ने आबए  बलैया पलटि के
माइ देती आशिष हजार,
              जगत में के ने जानइए
छठि माइ के................
सबहक भरथि............

(४)

अएलौं दुअरिया अहीं के छठि मैया,
ललसा जे मोनक पुराऊ
हे राणा माय...........
दुखिया के अत्मा जुड़ाऊ
हे राणा माय...........
कएलौं हे माय बड़ स'खे बरतिया
आब सुइन लिय' ने हमरो अरजिया
छोड़ि अहां ककरा सुनाऊ
हे राणा माय...............
आँचर पसारि एगो मांगै छी ललना
चहकए चिड़ैं सन दुआरि घर अंगना
बांझिन के कोइख सजाऊ
हे राणा माय...........
उगथि सुरुजदेव दरश देखाबथि
भोरुक किरिण सँ दरिद्रा भगाबथि
सूतल छथि ओ जगाऊ
हे राणा माय.............
ललसा जे मोनक.....
हे राणा माय.............
दुखिया के................


(५)

दीनानाथ
उगु उगु उगु भेल बेर
दीनानाथ............
छँटि गेल रातुक स्याह अन्हारे
चुन-मुन चिड़ैंक टेर
दीनानाथ.............
जल भय ठाढ़ करए सब सुमिरन
कर जोड़ि जेड़क-जेड़
दीनानाथ.............
हाथ उठाओल कएल वरतिया
नियम डेबल जत् भेल
दीनानाथ.............
अर्घक लगन बितए हे दिनकर
करब कतेक अबेर
दीनानाथ..............
रहि गेल अविध-सविध हम मानल
क्षमब हे प्रभु त्रुटि लेल
दीनानाथ...............

भरदुतिया

(१)

एलै एलै एलै बहिना एलै भरदुतिया अँगना में अरिपन पारल हे,
औथिन आइ हमर दुलरुआ भैया बाटहि में नयना पसारल हे !
पान आ सुपाड़ी संगे चानी के रुपैया नेने सेनुर पिठार सब घोरल हे,
आम नोतल जॉउम के गंगा नोतलनि जमुना के हम नोतब अपन सहोदर हे !
एलै एलै एलै........
भाग होऊ सबल सोहाग भऊजी के अमर रहथु मोर भैया हे,
बरष बरष पर नोतब जतन सँ दुलरी हिनक हम दैया हे !
एलै एलै एलै...........
भरल भरल भण्डार रहनि हिय कखनो ने हुसनि ई अभिलाषा,
भइये सँ नाम हुनक बहिनी के, भइये के घर बहिनिक आशा !
एलै एलै एलै.............
औथिन आइ ............

(२)

 जो रे कागा, भैया के जा क' हकारि ला जो
एलै भरदुतिया से मोन पारि ला जो
जो रे कागा................
एक बरख पर आएल ई पाबनि
भाइ-बहिन लए हर्ख भरल दिन
नोतब अपन दुलरुआ भैया,
आनए तों हुनका दुआरि ला जो
जो रे कागा...............
नीपल अंगना में अरिपन सजायल
दूइब-धान पान आ सुपाड़ी मंगायल
पीसल पिठाड़ आ सेनूर आनि रखने,
बाटहि छी नैना पसारि ला जो
जो रे कागा.................
आम नोतए जामुन के जहिना
यमुना नोतथि यम के जहिना
हम नोतब भैया के तहिना,
मंगल आरती उतारि ला जो
जो रे कागा................
भैया के जा क'...........

संपर्क : ९३३४२४३६०५

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