Wednesday, April 27, 2016

वैश्वीकरणक प्रभाव विषय पर परिसंवाद, खूब चर्चा मे रहल लप्रेक


पटना, बीतल रविदिन विद्यापति भवन मे खूब गहमागहमी रहल. अवसर छल, साहित्य अकादमी आ चेतना समितिक संयुक्त तत्वाधान मे आयोजित मैथिली साहित्य पर वैश्वीकरणक प्रभावक विषयक परिसंवाद, कथासंधि तथा लेखक सं भेंट कार्यक्रमक. अकादेमीक विशेष कार्याधिकारी देवेन्द्र कुमार देवेशक स्वागत भाषण सं आरंभ भेल कार्यक्रमक उदधाटन चेतना समितिक अध्यक्ष विजय कु. मिश्र केलनि. उदधाटन करैत ओ कहलनि कि मैथिली भाषा रोजी-रोटीक माध्यम बनै..मैथिली पढ़निहार कें लोग हीन दृष्टि सं नहि अपितु सम्मान सं देखै..प्रोफेसर लोकनि छात्र सभ कें मैथिली पढ़बाक लेल प्रेरित करथि, उत्साहवर्द्धित करथि. विषय प्रवर्तन अकादेमी मे मैथिली भाषा परामर्श मंडलक संयोजिका वीणा ठाकुर केलनि. ओ मैथिली साहित्य पर वैश्वीकरणक प्रभाव विषय केन्द्रित अपन आलेखक पाठ सेहो केलनि. सत्रक अध्यक्षता भाषाविद् मुनीश्वर झा आ धन्यवाद ज्ञापन रमानन्द झा रमण केलनि.

मध्याह्न 12 बजे सं विचार सत्र मे मैथिली साहित्य पर वैश्वीकरणक प्रभाव विषय पर मंथन कयल गेल. सत्र मे उपस्थित विद्वान धीरेन्द्रनाथ मिश्र, श्याम दरिहरे, अशोक आ सुकांत सोम पूर्व निर्धारित विषय पर अपन-अपन आलेख पढ़लनि. सत्रक अध्यक्षता सेहो सुकांत सोमे द्वारा कएल गेल.


खूब चर्चा मे रहल लप्रेक :

साहित्य पर वैश्वीकरणक प्रभाव विषयक परिसंवाद मे विद्वान लोकनि द्वारा राजकमल, हरेकृष्ण झा, विद्यानंद झा आदिक रचना पर वैश्वीकरणक प्रभाव होयबाक बात कहल गेल. एहि मध्य लप्रेक आ हाले बहरायल लप्रेक संकलन प्रेमक टाइमलाइन खूब चर्चा मे बनल रहल. उपरोक्त विषय मे प्रवेश करैत वीणा ठाकुर कहलनि कि साहित्य मे सूचना तंत्रक गलत ढंग सं प्रयोग कयल जा रहल अछि, जकर साक्षात उदाहरण थिक लप्रेक. जाहि मे हां मे हां मिलबैत मैथिलीक प्राध्यापक धीरेन्द्रनाथ मिश्र सेहो कहलनि कि लप्रेक वैश्वीकरणक प्रतिफल छी, हमरा सब कें एकरा अस्वीकार करबाक चाही. ओतहि लेखक आ सत्रक वक्ता श्याम दरिहरे मैथिली लप्रेक आ लप्रेक संकलन प्रेमक टाइमलाइन'क स्वागत करैत कहलनि जे हमरा सभ कें एहि नवतुरिया सभ सं ई उमेद करबाक चाही जे आइ ई सब छोट छोट कथा लिखैत छथि तं काल्हि खन पैघ कथा सेहो लिखतथि. पत्रकार-साहित्यकार सुकांत सोम लोकक बीच वैश्वीकरण कें ल' क' मारिते भ्रम होयबाक गप्प उठौलनि. ओ कहलनि कि हमरा सब कें एकरा ठीक सं बुझबाक खगता अछि.

भोजनक उपरांत 'लेखक सं भेंट' कार्यक्रम मे वरिष्ठ कवि कीर्ति नारायण मिश्र सं सभ कियो सामना-सामनी भेलनि. एहि क्रम मे कीर्ति नारायण मिश्र अपन साहित्यिक यात्रा आ रचना प्रकिया सभ सं साझा केलनि. संगहि ओ कहलनि कि आइ नव पीढ़ी लेखक लेल आलोचक सेहो नव होयबाक चाही.

तकरा बाद कथासंधि कार्यक्रम मे अकादेमी आ पद्म सम्मान सं अलंकृत लेखिका उषाकिरण खां 'ओइ गाम मे' कथा सुनौलनि. कुल मिला क' साहित्य अकादमी आ चेतना समितिक संयुक्त तत्वाधान मे सम्पन्न ई कार्यक्रम बेस सफल रहल. कार्यक्रम मे अगबे साहित्यकारक  जुटान सेहो अंत अंत धरि बनल रहल.

~ बाल मुकुन्द पाठक

फोटो सारस्वत, पटना 

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