Sunday, April 24, 2016

बुद्धिनाथ मिश्रक व्यंग्य 'फोंफैत पुरान'

'ई-मिथिला' पर आइ मैथिलीक प्रख्यात गीतकार, कवि ओ स्तम्भकार बुद्धिनाथ मिश्र केर व्यंग्य 'फोंफैत पुरान' प्रस्तुत अछि. पढ़ि सकी तँ स्वागत- [मॉडरेटर] 


जेना लाठी भाँज' बला कें लठैत कहल जाइछ आ डाका देनिहार कें डकैत, तहिना फोंफ काटनिहार कें फोंफैत कहल जा सकैछ. फोंफ काटब मनुष्यक एकटा सामान्य रोग अछि जे मानव सभ्यताक आदिकाल सं ओकर संग द' रहल अछि. पहिने आँगन-दलान चारू कात सं खुलल-खुलल रहैत छलै, तें फोंफक कुप्रभाव संगी-साथी पर कम पड़ैत छलै. दलान परक फोंफ रास्ता पैरा चलैत लोक कें चेता भरि दैत छलै जे एहि ठां कियो विष्णु घोर निद्रा मे सूतल छथि. कोनो-कोनो आंगनो सं राति-बिराति फोंफक महाघोष दुरूक्खा पार क' कें चौर्यकला-प्रवीण सभ कें अपना दिस आकर्षित करैत छलै. मुदा जहिया सं लोक गाम छोड़ि नगरक दिया-सलाइ सन छोट-छोट फ्लैट मे रह' लागल अछि, तहिया सं फोंफक सघन प्रभाव सं लोक प्रपीड़ित बेसी होअय लागल अछि. कत' ओ आंगना-दलान जाहि मे ध्वनि प्रदूषण कें अनंत आकाश मे विलीन करबाक अपार क्षमता छलै, आ कत' ई बीत भरिक कोठली, जाहि मे राति-बिराति चूड़ियो खनकला सं पड़ोसी जागि जाइत छै. एहना मे फोंफक चंडलवा राज सं लाखो नगर वासी दम्पति कें दुखी अथवा प्रताड़ित होएब आधुनिक दामपत्य जीवनक सभ सं बड़का त्रासदी अछि.

एक अर्थ मे डकैत सं बेसी घातक फोंफैत होइत अछि. डकैत जे डकैती करैत अछि से पूर्ण चेतनावस्था मे आ सुनैयोजित ढंग सं, जेना कहिया, कत' आ ककरा घर मे डाका देबाक अछि. पूरा कार्यक्रम ओकर सुविचारित आ सामूहिक होइत छैक. मुदा फोंफैतक काज पूर्णतः अनियोजित अप्रत्याशित आ एकल होइत छैक. ओकरा ई जनतब नहि रहैत छैक जे ओ अपन फोंफक तरूआरि सं ककर नीनक हत्या क' रहल अछि. किछु काल पहिने धरि जे व्यक्ति अपन प्रियतमाक प्रसन्नताक लेल सभ किछु समर्पित कर' लेल कटिबद्ध छल, वैह व्यक्ति निद्राक वशीभूत भ' अपन क्रूर फोंफ सं अपन प्रियतमा, अपन अर्द्धांगिनी कें सूत' नहि द' रहल अछि. अंग्रेजीक हसबैंड मे जे बैंड शब्द अछि, से संभवतः फोंफेक पर्याय अछि. कारण, प्रायः पतिये ई बाजा नाक सं बजबैत छथि. ओना नारी जागरणक एहि युग मे पत्नियो एहि काज मे पति सं पाछां नहि छथि. मुदा एहि क्षेत्र मे पतिक पराक्रम पचासी प्रतिशत आ पत्नीक मात्र पन्द्रह प्रतिशत देखल जाइत अछि. ओहिना जेना भारतीय सेना मे युवकक तुलना मे युवतीक प्रतिशत छै. सभ सं विकट समस्या ई छैक जे कियो ई मान' लेल तैयार नहि होइछ, जे ओकर जोरदार बैंडबाजा सं पलंग पर सूतल ओकर जीवनसाथीक नीन हताहत भेल अछि. जल्दी ओ मानैये लेल नहि तैयार होयत जे एतेक जोर सं फोंफ काटैत अछि जे पूरा फ्लैट आंदोलित भ' उठैत अछि. धन्य भारतीय ललनाक शील स्वभाव मे पतिक एहि अनवांटेड उत्पीड़न कें चुपचाप सहैत राति कहुना काटि दैत छथि आ भोरे उठि कें गृहकाज मे एना लागि जाइत छथि, जेना किछु भेले नहि हो. यूरोप सन विकसित देश मे फोंफक कारणे कतेक दम्पति तलाक ल' लैत अछि. अपनो देश धीरे-धीरे वैश्वीकरणक कृपा सं उत्तरोत्तर विकसित भ' रहल अछि, जकर सभ सं बेसी प्रभाव परिवार पर पड़ि रहल अछि. आशा करैत छी जे अपनो समाज मे फोंफक कारण तलाक नेनाइ सामान्य घटना भ' जाएत. पतिक विध्वंसक फोंफ सं  यदि पत्नी पीड़ित अछि तं प्रमाण रूप मे प्रस्तुत कर' लेल ओकरा एकटा टेप रेकार्डर संग मे ल' कें सूत' पड़तैक. एहि रेकार्ड कें ओ भोर मे पतियो कें सुना कें 'की कहब आहे सखी, रातुक बात' सन श्रृंगार गीत कें शोकगीत मे परिवर्तित होएबाक प्रमाण द' सकैत छथि. बात बेसी बढला पर ओ टेप कोट कचहरियो मे साक्ष्य द' सकैछ.

ओना हमरा जनैत, मात्र तलाक सं फोंफ मुक्ति नहि भ' सकैछ. जहिया सं एसी प्रथम श्रेणी मे चल' लागल छी, फोंफक उछन्नर सहयात्री कें कतेक कष्ट दैत छैक, तकर नीक जकां भान होमय लागल अछि. एहि मे कूपे सं बाहर ध्वनि निकलैत नहि छैक. जे सहयात्री पहिने सूति रहल से बाजि मारि लेलक. ओ अपन फोंफ सं सहयात्रीक निद्रा हरण (चीर हरण जकां) करबाक लेल अधिकृत भ' जाइछ. जं बेसी उपद्रव कर' लागैत छैक, तं निष्ठुर सहयात्री ओकरा उठा कें अपने सूति रहैत छैक आ अपन फोंफ सं दोसरा कें प्रपीड़ित कर' लागैत अछि. यदि अहांक यात्रा पटना-एर्नाकुलम एक्सप्रेसक एसी प्रथम श्रेणी मे अछि, तं कोनो गारंटी नहि जे दू राति अहां शांतिपूर्वक सूति सकब. ई निर्भर करैत छैक अहांक सहयात्रीक फोंफात्मक शोर्य सीमा पर. विश्वभाषा संस्कृतक जाहि गति सं दुर्गति भ' रहल अछि, बहुत संभव अछि किछु दिनुक बाद, जखन पंडित आद्याचरण झाक खाढ़ीक अवसान भ' जयतै, तखन लोक गीताक उक्ति 'या निशा सर्वभूतेषु, तस्यां जागर्ति संयमी' मे संयमीक अर्थ 'सहयात्रीक फोंफ सं पीड़ित' कर' लागय.

रूस मे एक गोटे रहस्योद्घाटन केलक जे काल मार्क्स कें शोषक-शोषित सिद्धान्तक प्रेरणा फोंफे सं भेटलनि. जेना फोंफक सिद्धान्तक अनुसार या तं अहां सहयात्री उत्पीड़क बनू अन्यथा ओ अहांक उत्पीड़न फोंफ काटि कें करत. एहि मे गौतम बुद्धक 'मज्झिम निकाय'(माध्यम मार्ग) नहि काज देत. तहिना मार्क्सक आर्थिक सिद्धान्तक अनुसार समाज मे या तं शोषक अछि, अथवा शोषित. 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' क आर्षवाक्य वा सह अस्तित्वक दर्शन फोंफैत लोक कें ग्राह्य नहि छनि. ओ एहि बात कें बुझैत छथि जे यदि ओ प्रतिद्वंद्वी (चाहे ओ सहचरी हो वा सहयात्री) कें परास्त नहि करताह तं प्रतिद्वंद्वी हुनका रैन कें बेचैन क' देत.

जेना बहुत दिन धरि बुद्धिजीवी लोकनि कें ई भ्रम रहलनि जे रामायण-महाभारत कविक कल्पना मात्र, तहिना ईहो भ्रम रहलैक जे फोंफ पर मोटे आदमीक अधिकार होइछ. एक एकटा एहन पतर सुट्टा फोंफ काटै मे पराक्रम देखबैत अछि, जे अवाक रहि जाएब. तहिना फोंफक संबंध अवस्थो सं ततेक नहि छै. नान्हि टा धीयो-पुता एहि क्षेत्र मे पराक्रम देखा सकैत अछि. किछु वैद्य-डाक्टर एहि महारोग कें कौटम्बिक अथवा आनुवांशिक मानैत छथि. दुनिया मे टीबी, कैंसर आ एड्स धरिक दवाइ बनि गेल छैक, मुदा एहि फोंफ नामक महारोगक कोनो औषधि नहि छैक. जे कियो आविष्कार करताह, तिनका नोबेल पुरस्कार अबस्से भेटतनि.

दुनियाक लोक दिन भरि खटलाक बाद राति कें फोंफ काटैत अछि, मुदा अपन मैथिल समाज अपन उद्यम-हीन जीवनक पूर्वाह्नो मे फोंफ काटि रहल अछि, अपसोच यैह अछि.

मूलतः समय-साल मैथिली द्वैमासिक पत्रिका मे प्रकाशित

3 comments:

  1. बहुत दिनका बाद `समय साल ' में कहियो छपल ई व्यंग्य पढिकें बहुत आनंदित भेलहुँ| एकरा लेल धन्यवाद |

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  2. बहुत दिनका बाद `समय साल ' में कहियो छपल ई व्यंग्य पढिकें बहुत आनंदित भेलहुँ| एकरा लेल धन्यवाद |

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  3. Badd interesting rachna baba
    Pranam

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