Sunday, March 6, 2016

'अकासतर बैसकी' बढ़ौलक एक डेग आर आगां



कलकतिया मैथिली साहित्य प्रेमी लोकनिक सत् प्रयास सं मैथिली कविता कें समर्पित अनौपचारिक गोष्ठी    'अकासतर बैसकी'क आयोजन रविदिन 6 मार्च 2016 केँ कोलकाताक साल्टलेक अवस्थित सिटीसेंटरक सुरम्य प्रांगणमे सफलतापूर्वक भेल. वर्ष 2016 मे आयोजित 'अकासतर बैसकी'क एहि तेसर गोष्ठीक अध्यक्षता विशिष्ट वैज्ञानिक आ ख्यातिलब्ध साहित्यकार योगेंद्र पाठक 'वियोगी' कयलनि. 

जनतब हो कि वर्ष 2015 सं आरंभ भेल ई  बैसिकी पछिला सालक आरंभ सं एहि वर्षक तेसर बैसार धरि निरंतर आयोजित होइत रहल अछि आ अपन साले भरिक एहि यात्रा मे सुन्दर सोच, दूरगामी उदेश्य आ कुशल संचालनक हेतु बेस लोकप्रिय ओ लोकोपयोगी साबित  भेल अछि. 



युवा कवि चन्दन कुमार झाक संयोजकत्व मे आयोजित एहि बैसकी मे आमोद कुमार झा, मिथिलेश कुमार झा, रूपेश त्योंथ, विजय इस्सर, भास्कर झा आ स्वयं चन्दन कुमार झा बेर-बेरी अपन-अपन स्वरचित कविताक पाठ केलनि. बैसिकीक अध्यक्ष वियोगी सेहो एकर आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करैत अपन स्वरचित कविता पढ़लनि. 

एकर अलावे मध्ययुगक वैष्णव पद रचयिता राय वसन्त आ बलराम दासक पद, नारायणजीक सद्यः प्रकाशित कविता संग्रह 'धरतीपर देखू'क दू टा कविताक आवृति चन्दन कुमार झा कयलनि.  तहिना किरण झा, रूपेश त्योंथ आ भास्कर झा चन्दन कुमार झाक बाल कविता संग्रह ' बिहुँसि रहल अछि अमलतास'क कतिपय कविताक आवृति कयलनि. कार्टूनिस्ट सन्तोष मिश्र बैसकीक फॉर्मेटसं आह्लादित भए एकर निरन्तर आयोजनक  सुभेच्छा व्यक्त करैत जीवन मे कविताक महत्त्व आ कविताक विकास लेल एहि तरहक आयोजनक महत्ता पर प्रकाश देलनि. 'अकासतर बैसकी'क एहि सफल आयोजनक सुरुचिपूर्ण संचालन साहित्यसेवी भास्कर झा द्वारा कयल गेल. 
   

1 comment:

  1. इ नव तरहक प्रयास एकटा क्रांतिकारी परिवर्तन आनी सकैत अछि मैथिली के विकास मे| आहाँ सब के बहुत-बहुत शुभकामना आओर आशा करे छी जे अहि तरहक प्रयोजन स हमर भाषा एकटा नया आकाश छुअत| हमहूँ कुछ कविता लिखैत छी,कोशिश करब जे अहान लोकिनिक तक पाहुचा सकू आओर अप्पन योगदान द सकूँ|धन्यवाद.

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