Tuesday, August 18, 2015

दिनेश द्विवेदी केर किछु मैथिली अनूदित कविता



इटारसी, मध्यप्रदेश निवासी दिनेश द्विवेदी जिनका लोक स्नेहपूर्वक दादा कहैत छनि, सागर विश्वविद्यालय सँ एम.ए हिन्दी मे गोल्ड मेडलिस्ट कयला उत्तर इटारसीए  मे सेवानिवृति धरि पहिने नगरपालिका आ तदुपरांत गाँधी वाचनालय मे कार्यरत रहलाह. हिनक संपादन मे बहरायल पत्रिका 'पुनश्च' अपन 18 गोट विशेषांक लेल हिन्दी साहित्य मे खूबे प्रसिद्ध आ प्रशंशित भेल. नवतुरिया केन्द्रित पत्रिका 'शिनाख्त' सेहो हिनक औदार्य आ कुशल संपादनक प्रतिफल रहल. एखन धरि दादा केर तीन टा काव्य संग्रह 'देह के उपसर्ग हैं कुछ''पारे की तरह' आ 'स्पर्श' आबि चुकल छनि, जे की कैकटा भाषा मे अनूदित सेहो  भ' चुकल अछि. आइ काल्हि ओ डाॅ. रमेश भटनागरक अप्रकाशित शेष साहित्य (कुल12 खंड) केँ संपादन क' रहल छथि. एखन हुनक काव्य संकलन 'पारे की तरह' सँ किछु मैथिली अनूदित कविता प्रस्तुत कयल जा रहल छी, पढ़ल जाय - माॅडरेटर.




                (१)

अहाँक प्रेमक उर्वरित माटि पर
हम गाछ स' वृक्ष हेबाक उलट
गाछ स' बीया मे बदलि रहल छी,
समटि रहल छी
अप्पन शाखा-प्रशाखा
जेना कछुआ समेटैत अछि
अप्पन अंग-प्रत्यंग।

                (२)

जखन पार्वती ठनने छलि-
करोडों जन्म तक एक्कहिटा हठ
'पतिरूप मे शिव केर वरण
अथवा चिर कौमार्य'
तखन शिवक समाधिक
चिर उदासीनता
विरक्ति-वैराग्य
सब परास्त भ' गेलैक
विशुद्ध निष्ठाक सोझाँ
तैं ने 'विपिन जोशी' लिखलनि
'स्वप्न मे जौं श्रद्धा होइक
त' स्वप्न सच भ' जेतैक'  

             (३)

हमर पष्ठि-पूर्तिक
शंखनाद करैत हमर ई देह
अहाँक प्रेम मे सराबोर
मुट्ठी स' फिसलैत बाउल सन
मृत्युक लग पहुँचलाक बादो
अहाँक प्रेमक बन्हन मे
सोलह-साला
अनुभव करैत अछि,
बस्स !
यैह छैक अंतिम-पड़ाव
आ यैह छैक
'पराजयक जय'

           (४)

देह भोगबाक लिप्सा
एकदम सरल 
मुदा मोन अमेठबाक जलकुम्भीक
लपेट स' बाहर भेनाय
असम्भव त' नहिं
मुदा कठिनाह अवश्य छैक
एहि दर्शन केँ जौं कियो
सभ सँ बेसि बुझलथि
तँ ओ छलि-
आम्रपाली-चित्रलेखा-बसंत
सेना।

             (५)

उत्सवप्रिया प्रकृति
उत्सवधर्मा सृष्टि
एकटा अपार्थिव
प्रणय अनुष्ठानक
सृजन क' रहल अछि
अहाँक राग-रंजित रक्ताभ
मुँहक वृत्य मे
चलि रहल अछि एकटा
नित्य-महारास


मैथिली अनुवाद : गुंजनश्री 
ईमेल- gunjansir@gmail.com 
मोबाइल- 09386907933

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