Friday, July 17, 2015

मैथिली पोथीसँ पाइ नहि, पहिचान भेटैछ

'नव अंशु' नामक गजल संग्रहसँ मैथिली साहित्यमे पयर  पसारनिहार अमित मिश्र केर दोसर पोथी 'अंशु बनि पसरि जाएब' (बाल काव्य संकलन) हाले शेखर प्रकाशन, पटनासँ प्रकाशित भेल अछि. एहि मादे  ई-मिथिला लेल युवा रंगकर्मी मुकुंद मयंक हिनकासँ साक्षात्कार लेलनिए, साक्षात्कार प्रस्तुत कयल जा रहल अछि - माॅडरेटर.


मुकुन्द मयंक- अमित जी सबसँ पहिने अपनेक दोसर पोथी 'अंशु बनि पसरि जाएब' लेल हार्दिक बधाइ.
अमित मिश्र- बहुत-बहुत धन्यवाद भाइ.

 मुकुन्द मयंक- अहाँक पहिल पोथीक नाम नव अंशु आ तहिना दोसर पोथीक नाम अंशु बनि पसरि जाएब अछि, एहि खास नाम (अंशुसँ) लगावक की कारण ?
अमित मिश्र - ई मात्र संयोग अछि जे पहिल पोथीक नाम 'नव अंशु" राखल गेल आ दोसरोक तेहिने  सन ।असलमे दुनू नामकरणक पाछाँ मिलैत -जुलैत कारण अछि ।"नव अंशु" हमर पहिल पोथी छल ।हमर परिवारमे किओ एहि क्षेत्रसँ जुड़ल नै छथि तेँ किछु सदस्य हमरा आशक नव किरणक रूपमे देखऽ लागलनि ।पहिल संतान होयब मने माय-बापक लाखो आशाक एक प्रत्यक्ष रूप होइ छै ।दुनू कारणसँ एकर नाम नव किरण मने नव अंशु रखलहुँ ।संयोग एहन जे दुनूक नामकरण एक्कहि वर्षमे भेल छल ।पहिल पोथी हमर आ हमर अभिभावकक आशक अनुकूल रहल ।कत्तहुँ-कत्तहुँ हमर चर्च होमऽ लागल आ एकाध टा पत्रिकामे सेहो छपय लागलहुँ ,मने हमर रचनाक क्षेत्र पसरऽ लागल ।आश कनेक आओर आगू बढ़ल ।मनमे आएल नेना सबमे मैथिली पसारबाक तें दोसर पोथी बाल साहित्यसँ आनलहुँ ।"अंशु बनि पसरि जाएब"क तात्पर्य इएह छल जे जहिना सुरूजक किरण संसारमे पसरि
जाइत अछि तहिना नेना अपन ज्ञानक दमपर एहि संसारकेँ लाभान्वित करय आ अपन मेहनतिक बलपर अपन नाम कमाबय ।

मुकुन्द मयंक - अपने कहियासँ रचना करय छी ?
अमित मिश्र- जेना हमरा याद अछि जे हम जखन अष्टम्-नवम् मे (2006-07) पढ़ैत रही तऽ गीत लिखब शुरू केने रही ।तकर बाद दशम् मे एकटा दीर्घ कथा/लघु उपन्यास जकाँ हिन्दीमे लिखने रही जकर नाम छल "प्यार एक जुनून" ।मोटा-मोटी बुझू तऽ हम पछिला सात-आठ सालसँ लिखै छी मुदा हमर लेखन मुख्यरूपसँ 2011'क दिसम्बर माससँ सक्रिय अछि ।

मुकुन्द मयंक-  अहाँ कोन बातसँ प्रभावित भ' रचना करैत छी ?
अमित मिश्र- भाइ, साहित्य तऽ समाजक ऐना अछि आ हमहुँ कोनो समाजसँ बाहरक प्राणी नै छी ।हमर रचनापर अपन समाजक प्रभाव बेसी अछि आ से अहाँकेँ रचना सब पढ़लाक बाद बुझना जाएत ।समाजमे प्रतिदिन घटैत घटना सबकेँ  हम अपन रचनाक प्लाॅट बनबैत छी ।

मुकुन्द मयंक
मुकुन्द मयंक-  मैथिली किताब नहि बिकाइत छै तखन अपन पाइ लगा किताब छपेनाइ कतेक उचित ?
अमित मिश्र - सत्य कहलहुँ भाइ ।मैथिली किताबक नै बिकेनाइ चिन्ताक बात अछि ।कारणो साफ अछि जे एकरा लग नीक वितरकक कमी छै ।ओना मैथिली एते उर्वर अछि जे विषम परिस्थिति रहितो साहित्यकार अपन पेट काटि पोथी छपबै छथि ।ई एक तरहसँ मैथिली लेल निःस्वार्थ भावसँ कएल गेल सेवा छै ।तेँ हमरा जानैत पोथी छपेनाइ उचित छै ।कमसँ कम पहिचान तऽ भेटै छै ।

मुकुन्द मयंक-  अहाँ पर आरोप अछि जे मात्र किछ पायक कारण अभद्र गीतक रचना करैत छी !
अमित मिश्र - जी, एहन सन किछु नै छै । हम अपने अश्लीलतासँ दूर रहै छी ।जतऽ धरि पाइक बात छै तऽ साफ कहि दी जे आइ-काल्हि गीतकारकेँ अठन्नीयो नै भेटै छै आ जँ भेटितो हेतै तऽ हमरा नै भेटल अछि ।एखन धरि हमर जे भी गीत रेकाॅर्ड भेल अछि से या तऽ हास्य छै या रोमांटिक प्रेम छै  ।किछु गीत मे पंच लाइन छै मुदा तकरा अभद्र कहब ओतेक उचित नै अछि किएक तऽ एखन मैथिल पूरा-पूरी अश्लील गीत सुनबाक हिस्सक नीक जकाँ लगा रहल छथि ।

मुकुन्द मयंक- अपना पीढ़ीक रचनाकार सबमे किनका अहाँ अपन समकक्ष पाबै छी ?अहाँक प्रिय रचनाकार के छथि ?
अमित मिश्र- देखू एखन सब मैथिल युवा रचनाकार नीक लीखि रहल छथि आ अपन जगहपर सब किओ एक्कापर-एक नजरि आबै छथि ।तेँ एतऽ समकक्ष बला कोनो प्रश्ने नै अछि ।हम बाल साहित्य बेसी लीखि रहल छी आ  हमरा नजरिमे ई लिखनिहार कम अछि तेँ हम सब गोटाकेँ एक रंग मानै छी ।रहल बात प्रिय रचनाकारक तऽ हम जतेक पढ़ने छी ताहिमे हरिमोहन झा, रामदेव झा, विभूति आनंद, सुमन जीसँ हम बेसी प्रभावित छी ।नव रचनाकारमे दीपनरायण विद्यार्थी , चंदन झा , नरायण झा राजीव रंजन मिश्रक रचना सभ नीक लगैत अछि ।

मुकुन्द मयंक- मैथिली साहित्यकेँ बाल कक्षामे नहि पढ़ाओल जाइछ आ अहाँक बाल काव्य संग्रह 'अंशु बनि पसरि जाएब' हाले प्रकाशित भेलैकए । मैथिली साहित्यिक पोथीक मार्केट ओहिना खराब छै एहनमे अहाँ मार्केटसँ की उम्मीद करैत छिए ?
अमित मिश्र- हम मानैत छी जे नेना सबकेँ मैथिली नै पढाओल जाइत अछि ,मुदा आब स्थिति बदलि रहल छैक ।हम सब प्राथमिक शिक्षामे मैथिली अनिवार्य करबाक लेल संघर्षरत छी ।देर-सबेर सफलता भेटबे करतै आ तखन एहने रचनाक जरूरति हेतैक ।मानलहुँ जे मार्केट डाउन अछि मुदा हमर मानब अछि जे जौं नीक रचना देबै तऽ पाठक जरूर स्वीकार करथिन आ हम ताहिमे सटीक बइसै छी ।हमरा मैथिली पुस्तक प्रेमी पर पूर्ण विश्वास अछि ओ हमर मेहनतकेँ व्यर्थ नै जाए देतथि ।

मुकुन्द मयंक 
ई मेल - mukundjee.mayank@gmail.com
मोबाइल - 09334359514

(अमितजीक बाल काव्य संकलन 'अंशु बनि पसरि जाएब ' किनबाक लेल 09122105183 पर संपर्क कायल जा सकैछ )



1 comment:

  1. बेधल प्रश्नक सटीक जबाब।
    वाह अमित भाई।
    मयंक जी प्रश्न सब बेस भरिगर करै छियैक आहाँ।

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