Thursday, July 16, 2015

प्रेमपर तलवार कतबो चलत ताहिसँ की हेतैक

चंदन कुमार झा केर किछु गीत बहुत पहिने विदेह पर पढ़ने छलहुँ. एम्हर एकटा पैघ समय अंतरालक उपरांत हिनक किछु गीत पढ़बाक अवसर प्राप्त भेल. खांटी मैथिलीमे लिखल हिनक ई गीत सब ततेक ने नीक लागल जे अपने सभक समक्ष सेहो बिन परोसने नहि रहि सकलहुँ. पढ़िक कहू - माॅडरेटर.

                          (१)

प्रेमपर तलवार कतबो चलत ताहिसँ की हेतै
प्रेम आखर-खण्ड उनटे जगतभरि छिड़िया जेतैक
 घृणा परसय लोक बिच किछु लोक जे संसारमे
 ठाठ जे देखइत कियो अछि लोक-अत्याचारमे
ऊँच नहि कहियो दनुज ओ मनुजतासं भ सकत
भविष्यो एहि इरखेसं प्रेमकेँ अपना लेतैक
प्रेमपर तलवार कतबो चलत ताहिसं की हेतैक
प्रेम-आखर-खण्ड उनटे जगतभरि छिड़िया जेतैक

रौदमे तपि स्वयं शीतल ज्योति बिलहय चन्द्रिका
क्षणहिमे केहनो सघन तम चीरि दइए दीपिका
त्याग, तप, संघर्षसं की दुष्ट कहियो सकि सकत
पुण्य केर आभा सदति दिनमान सन बढ़िते जेतैक
प्रेमपर तलवार कतबो चलत ताहिसं की हेतैक
प्रेम-आखर-खण्ड उनटे जगतभरि छिड़िया जेतैक

प्रेम मधुरस पीबिते भ जाइछ तिरपित आत्मा
प्रेम तँ थिक ब्रह्म, प्रेमहिमे बसथि परमात्मा
सृजनकेँ निज धर्म बूझि ई सर्जना करिते रहत
एकर संहारक प्रयासीकेँ सफल नहि भ हेतैक
प्रेमपर तलवार कतबो चलत ताहिसं की हेतैक
प्रेम-आखर-खण्ड उनटे जगतभरि छिड़िया जेतैक

               (२ )

लगै छल भार जे जीवन
लगैछ उपहार से जीवन
अहाँक मुस्कीक स्पर्शेँ
भेल भकरार सन जीवन


रहय उन्मुक्त ई जहिया, छनने छलैक जड़ता
सिनेहक सूतमे बन्हिते, पैसिलै अङ्ग चंचलता
सुखायल ठोढ़ सटलै ठोढ़सँ कि मधुसँ भिजलै
बहल जे नयनसँ सरिता
बनल रसधार सन जीवन

रहय छल कान पाथल बाटपर, पदचाप सुनबा लए
कुचरिते काग केर मन दोड़ि जाए सम्वाद सुनबा लए
मिलनक बेर आयल अछि कि मधुमास अछि आयल
अहाँक दू-बोल कि छुलकै
बाजल तार सन जीवन

लगय छल रूप ई अप्पन केहन कुदरूप सन पहिने
लगय छल चित्र अहूँ केर नहि अपरूप सन पहिने
निहारै छी अहाँ हमरा, निहारी हम अहाँकेँ
अनुपम रूप देखि नेहक
भरल श्रृंगारसँ जीवन
लगै छल भार जे जीवन
लगैछ उपहार से जीवन
अहाँक मुस्कीक स्पर्शेँ
भेल भकरार सन जीवन

                   (३)

आइ उचितवक्ता जे जगमे, से कहबैत मरखाह अछि
जानय लल्लो-चप्पो जे बड़, से सभ बनल गवाह अछि

जे जनैत अछि उनटा-फेरी
मंत्र जकर छओ-पाँच
से पबैत अछि उँचगर आसन
दसटा लोकक माँझ
लोक बुझैए सज्जन ओकरे, जक्कर मोन घवाह अछि
जानय लल्लो-चप्पो जे बड़, से सभ बनल गवाह अछि

जे जनैछ नहि पेँच-पाँच से
कहबय-बुद्धिक काँच
हितहुँ-मीत नचाबय ओकरे
दसगर्दामे नाच
परतारब'क प्रताड़न सहि-सहि, शुद्धा भेल तबाह अछि
जानय लल्लो-चप्पो जे बड़, से सभ बनल गवाह अछि

केहनो शीत-बसात चीड़िकऽ,
लहकि उठैत अछि आँच
झूठक बढ़ि जाइ जतेक प्रवलता
जीतय सदिखन साँच
अज्ञानीकेँ ज्ञानक ज्योति, लगैत बड़ झरकाह अछि
आइ उचितवक्ता सभ जगमे, तेँ कहबैत मरखाह अछि

 संपर्क :
चंदन कुमार झा
इमेल : cjha83@gmail.com
मोबाइल :09748405526

(हालेमे चंदनजीकेँ चारिम पोथी सम्भावना प्रकाशित भेलनिए)

1 comment:

  1. बेजोड़ गीत अछि तीनु चन्दन भाई।
    बहुत बढियाँ।

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