Friday, May 15, 2015

नारायण झा'क तीनटा बाल कविता

आइ ई-मिथिला पर रहुआ संग्राम, मधुबनी निवासी युवा कवि नारायण झाक किछु बाल कविता देल जा रहल अछि. पढ़ल जाउ - माॅडरेटर.

(1). आम

अपन गाछक अपन आम
लाल पीयर पाकल आम
पाल परहक घोघचल आम
रंग विरही सुन्नर आम
नमका आम, गोलका आम
छोटका आम, बडका आम
केहन सुन्नर गुदगड़ आम
फलक राजा थिकाह आम

(2). घड़ी

टिकटिक - टिकटिक घड़ी चलय
चलय नेम टेमसँ
टुकटुक -टुकटुक सभ निहारय
निहारय घुरि-घुरि नैनसँ
टनटन-टनटन बाजि चौकाबे
चौकाबे जन-जनकेँ
दन-दना-दन काज सम्हारय
सम्हारय लोकक मोनकेँ
छनछन-छनछन क्षण बीतय
बीतय युग-युग राति-दिन कऽ
जे जन एकर स्वाद अखियासय
अखियासय स्वाद अंगुरी गानि कऽ

(3). गुड्डी

गुड्डी उड़े गुड्डी उड़े
गुड्डी उड़े अकाशमे
तागा जँ जँ ढ़ील करब
सटतै गुड्डी अकाशमे
ललका गुड्डी पीरा गुड्डी
उड़ैत देखू जाड़क मासमे
धीया-पुताक खेलौना सुन्नर
हवा चढ़बैछ अकाशमे
काँटा-काँटी घीचा-घीचि
चलैछ खूब अकाशमे
जकर तागा बलगर नम्हर
उड़ते रहैछ गुड्डी अकाशमे

रचनाकार संपर्क :
नारायण झा
मेल :narayanjha1980@gmail.com
मोबाईल :8051417051

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