Wednesday, April 15, 2015

रूपेश त्योंथक पोथी 'एक मिसिया'

लगभग साल भरि पहिने प्रकाशित भेल छल रूपेश त्योंथ'क पोथी 'एक मिसिया'.पोथीक पेज, कभर, रचना संख्या एक बेर खटकल छल किंतु कम मूल्य पर लोककेॅ पोथी उपलब्ध करायब सेहो एकर कारण भऽ सकैछ. ओहुना पोथीक महत्ता ओकर रचनासॅ होइत अछि ,कभर आ पेजसॅ नै. किछु दिन पहिने एहि पोथीपर साहित्यसेवी भास्कर झाक सार्थक समीक्षा पढ़ने छलौं. साझा कऽ रहल छी, अहाॅ सेहो पढ़ू- माॅडरेटर.
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सूचना प्रौद्योगिकीक एहि युगमे समस्त युवा वर्ग आई अपन रोजी रोटीक लेल भारते नहिं, विदेशो दिस ससरि रहल अछि। युवावर्गक पलायनसं आवश्यकतासं अधिक कमाइ करबाक प्रवृत्तिसं ओ आई अपन जड़ि, माटि, भाषा, संस्कॄति, साहित्य आदिसं कटल जा रहल छाय्थ। हुनका पर मात्र पाई कमाइक धुन सवार भ गेल अछि। मुदा मुदा आइयो महानगरीक चौंधियात जीवनशैलीक बादो किछु एहनो प्रतिभा-समपन्न मातॄभाषा प्रेमी , साहित्यानुरागी, अपन संस्कृतिक संवाहक मैथिल युवा छैथ जे मिथिला, मैथिली , साहित्यिक ओ सांस्कृतिक गतिविधिमे सतत सक्रिय छैथ आ अप्रत्यक्ष रुपमे बहुत रास काज कए रहल छैथ। एहने युवा शक्तिमे एकटा उदीयमान नाम थिक रुपेश कुमार झा “त्यौंथ”।

 आईटी क्षेत्रमे कार्य केनिहार रुपेश जी एक संगे कवि, व्यंग्यकार, कथाकार, आलेखक, पत्रकार तथा मैथिलीक लोकप्रिय समाद पोर्टल “मिथिमीडिया” केर संस्थापक-संपादक छैथ। हुनक रचनात्मक यात्र एक दशक पूर्वहिसं प्रारंभ भेल चल जहन ओ झलक मिथिला, वरिष्ठ मैथिली पत्रकार श्री ताराकान्त झाक सम्पादनमें प्रकाशित होय बला मैथिली अखबार मिथिला समाद मे नियमित कॉलम लिखैत छलाह ।

 “एक मिसिया” रुपेश जीक पहिल कविता-संग्रह थिक। एहि संग्रहमे कुल 25 गोट कविता अछि जेकि विविध विषय-वस्तु पर केन्द्रित अछि। कविता-संग्रहक पहिल कविता वाग्देवी शारदे मां सरस्वतीक प्रति समर्पित अछि- “ कर दया मां, रहल त्यौंथ” कानि , मां शार्दे वर दे भवानी।“ महाकवि विद्यापतिक कातर चित्र प्रस्तुत क’ रुपेश जी अपन कविता “ विद्यापतिक आंखिमे नोर”के माध्यमसं मैथिलीक दुर्दशा दिस सबह्क ध्यान आकृष्ट क’ तहल छैथ। विद्यापति पर्व समारोह आदिक आयोजन क लेला सं माय्थिली अपन मातॄभाषाक प्रति योगदानसं बांचि नहिं सकैत अछि। एहि संवादपरक कवितामे मिथिला मैथिलीक वर्तमान पीढीक मैथिली पर एकटा आक्षेप सेहो अछि -

      “ आम मैथिल जाबे बुझत नहि मैथिलीक मोल, 
      ताबे की हेतS पीटने ढोल?
      ई भेलS जे जड़ि ठूंठ आ फ़ुनगी हरियर,
      मुरही कम आ घुघनी झलगर 
      खाली हमर गुण गेने किछु हेतS थोड़?”

आ कविक रुपमे रुपेश जीक हॄदयक व्यथा एकटा समाधान हेतु तत्पर आ कटि बुझा रहल छैथ-
“कोना सुखायत विद्यापतिक आंखि केर नोर?”

रुपेश जीक कवितामे गाम घरक बात सेहो कहल गेल अछि।
भास्कर झा
 गमैया परिवेश हुनक कविताक पॄष्ठभूमि थिक।
 “खेतक बड़का आरि पर “ एकमात्र बाल कविता थिक जाहिमें श्रम-कर्मक महत्वकें स्पष्ट रुपें रेखांकित कएल गेल अछि। श्रमक महता बुझबैत कवि कहैत छैथ-

      “श्रम होइछ सर्वोपरि ढौआ सं ने कम 
      आबयबला संतति हेतु करैछ ओ जोगार “

आ एहिमे निष्काम योगक तत्व उजागर भेल अछि-

      “चलैत रहैत छै एहिना बौआ ई समय केर चक्र, 
      करैत रहS सुकर्म बनि कर्मठ, हो चाहे दिन तोहर वक्र
      सुकर्मक फ़ल अबस्से होइत अछि नीक 
      कर्म हिसाबे सभ कें भेटऐछ फ़ल सटीक । “

रुपेश जीक कविता देशमे व्याप्त गरीबी, आतंकवाद, बेरोजगारी, नैतिक पतन आदिक व्याप्त अन्हार पर इजोत दS रहल अछि। “जरा रहल छी श्रद्धा दीप” अन्हार बीच दीप जरा रहल अछि । “निशाचरक अछि तांडव बढल असह्य भेल प्रहार” सं आहत कवि हॄदय व्यथित अछि। जुग-जमानाक चालि देखि विस्मित छैथ। मुदा एहि सबके लेल ओ सरकारकें दोषी बुझैत कहैत छैथ-

      “फ़ुटैछ फ़टक्का बम, तें जिनगी ने कोनो ठीक 
      जनता भेल बेघर, मुदा सरकारक ने डोलैछ टींक “

जागू आब “ आह्वानपरक कविता अछि जाहिमे बेरोजगारी, हिंसा, लोकतंत्रक दयनीयताक सजीव चित्रण भेल अछि। नव क्रान्तिक आह्वान करैत किछु नवजागरण संबंधी पांति सराहनीय बूझना जा रहल अछि-

      मूख अछि गद्दी पर बैसल / पढल लिखल बेकार अछि 
      सत्य अहिंसा आइ काइल/ एहि समाजसं बारल अछि। 

किछु एहने बात “ बूथ कैपचरिंग” कवितामे सेहो कहल गेल अछि- गामक हवा अछि बिगरल/ अछि स्वार्थ जलसं सभ भीजल” । एहि कवितामे शासन व्यवस्था पर कटाक्ष करैत कहल गेल अछि- पोसब गुन्डा हम कएकटा/ उगि गेल अछि हमरो दूटा सिंग/ करब हमहुं आब बूथ कैपचरिंग ।

मैथिल समाजमे बात छकरक एकटा अदभुत वाचिक परम्परा रहल अछि। समस्याक समाधान करबाक बदलामे अपन “थुथुरलॉजी”सं चौक चौराहा पर पानक पीक युक्त सम्भाषणरत मैथिलक एहि प्रवृति पर कटाक्ष अछि रुपेश जीक कविता “नहि बदलत बात छकरला सं “। मिथिलाक समाज पर अपन व्यंग्यात्मक शैलीक प्रयोग करैत कहैत छैथ- “ ई थेथर समाज एहने रहत सदैव,/ नहि बदलत बात छकरला सं”। एहि कवितामे किछु मार्मिकताक तत्व सेहो देखल जा सकैत अछि जहन ओ कहैत छैथ- “मिथिला दहाइत रहत सदाय्व,/ बेंगक भूत सं”।

सामाजिक विद्रूपता आ अनाचारके मिथिला सं बाहिर करबाक लेल “ क्रान्तिक पुकार” कए रहल छैथ। कवि समस्त लोककें सम्बोधित करैत कहैत छैथ-

      दूर करू मिलि कंटक असंख्य,/ चाही क्रान्ति आब ने मंतव्य” /

आत्मपरक कविता “ जिनगी-वसंत “ नव स्फ़ूर्ति, नव सोच, नव ऊर्जा , आत्म विश्वाससं भरल कविता थिक। प्राकृतिक सौन्दर्यक मनोरम चित्र प्रस्तुत करैत मानवताक रक्षाक वास्ते सुन्नर जीवन-दर्शनक बात राखल गेल अछि। प्रगतिशीलताक सोचकें नव आयाम दैत एक आदर्श समाजवादक तत्वकें बड्ड गहीरता आ सौम्यतासं रेखांकित कएल गेल अछि। एहि कविताक किछु पांति पाठकें मनमे सहसा उर्जा ओ उल्लाससं भरि दैत अछि-“तनमन मे अछि भरल ऊर्जा विपुल / बनायब नाव नहि, ठोस पुल”   आ “हारब ने हिम्मति, मृत्यु पर्यन्त” बड्ड प्रेरक अछि। आ एहि प्रेरणाक संग नव आशाक सनेस द जायत छैथ- “हिम्मत अछि एकदिन पायब लक्ष्य/ चहुंदिक रहत संघर्षक साक्ष्य।“ 

काव्य संग्रहक सबसं छोट छिन मुदा सबसं बेसी प्रभावी कविता “ एक मिसिया” , जाहि नाम पर काव्य संग्रहक नाम देल गेल अछि, जन समस्याक समाधानक स्वर मुखरित भेल अछि। एक मिसियासं आत्मसंतुष्टिक बाट पर चलैत सम्यक जीनगी जीबाक प्रेरणासं ओत प्रोत अछि।

    “ प्रचंड ताप सं लहरैत धरती कें चाही 
      बरखाक शीतल बुन्न एक मिसिया 
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      मायक हेतु असीम आनंद सृजित करैछ 
      नेनाक हुलास ओ मुसकी एक मिसिया

रुपेश जीक कवितामे गरीबी, आतंकवाद, राजनीति, बेरोजगारी, अनीति, क्षद्मरुपता, बेईमानी, हिंसा, लोकतंत्रक बर्तमान दयनीय स्थित, दहेज प्रथा, प्रेम प्रकृति,चुनावी ठग, अभाव, विवशता, दहेजक समस्या, देश प्रेम, देशक चिन्ता, भ्रष्टाचार, अनाचार, जन समस्याक समाधानक तत्व परिपूर्ण अछि। कवि रुपेश व्यंग्यवाण चलाबयमे बड्ड माहिर बुझना जायत छैथ। युगीन परिवेशमें व्याप्त समस्त तत्वक सटीक आ सम्यक समायोजन भेल अछि हुनक पहिल काव्य संग्रह “ एक मिसिया”मे। कुल मिलाकए, एहि संग्रहक सब कविता पठनीय अछि, जीवन, समाज, दर्शन, संस्कृतिके बुझबाक समस्त आयाम-व्यायामक सुन्नर सीढी ठार कएल गेल अछि।

हमरा बुझने, “एक मिसिया “ मिथिला आ मैथिलक समकालीन परिस्थिति ओ मनोस्थितिक बुझबाक वास्ते काव्यानुरागी पाठक लोकनिक लेल पाथरक मील साबित होयत । रुपेश जीकें अनेकानेक बधाई ओ शुभकामना। संगहि, हुनक दोसर कृतिक प्रतीक्षामे बाट जोहैत हम आ हमर सुधी पाठकगण।

 (पोथी प्राप्तिक लेल रूपेश त्योंथसॅ 09239415921 पर संपर्क कएल जा सकैछ)




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