Friday, February 20, 2015

बुद्धिक बखारीक वर्गीकरण

कल्हुका दैनिक 'हिन्दुस्तान' (पटना संस्करण)मे ,सभ बृहस्पति दिन प्रकाशित होमऽ बला नियमित काॅलम 'ठांहि-पठांहि'केॅ अंतर्गत प्रकाशित श्री शरदिन्दु चौधरीकेॅ व्यंग्य पढ़लहुॅ ।अहूॅ पढ़ूॅ , साझा कऽ रहल छी - माॅडरेटर
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पदारथ अपस्यांत छल ,ओकरा फुराइये ने रहल छलै जे ओ कोना अपन लेख पूरा करय ।आखिर दू हजार टाकाक बात छलै ।हारि-दारि कऽ करिया कक्काक आश्रमपर पहुॅचि गोहारि लगौलक
-'आब अहीं बेरा पार लगयबियौक कक्का,मंझधारमे फंसल छी ।'
-की भेलह हौ, केहन बढ़ियां नीके ना छह आ कहैत छह जें मंझधारमे...।'
करिया कक्का अडै.ठी मोड़ लैत बजलाह ।
-हॅ यौ ठीके मझधारेमे छी ।ई अकादमीवला सभक कते पैरवी कयलापर एकटा कार्यक्रम मे सहभागिता करबाक नोत देलक अछि मुदा पढ़बा लेल तेहन ने विषय दऽ देलक अछि जे की लिखी की 'नहि से किछु फुराइते नहि अछि ।'
तोंहू हद करैत छह पदारथ,जे फुराइत छह सैह लिखि दहक ,वैह मानक भऽ जयतैक ,अकादेमी जे करय सैह सुच्चा बाकी सभ लुच्चा ।
-की कक्का ,हम अयलहुॅ जे अहाॅ किछु 'टिप्स' देब मुदा अहाॅ तॅ खिल्ली उड़बऽ लगलहुॅ ।
- हौ तों ने बिषय-वस्तुसॅ अवगत करौलह ने दान-दक्षिणाक बात करै छह आ सोझे सत्ताक चाभी अपना लग राखय लेल आफन तोड़ने छह ।
- एखन छोड़ू ओ बात सभ ई  कहू जे मैथिलीक लेखकीय प्रकारकेॅ कोना फरिछाओल जाय !
-की मतलब तोहर छह हौ , आब लेखकक वर्गीकरण पर सेहो विचार कयल जाइत छैक ?
- हमर कहबाक अभिप्राय ई अछि कक्का जे अकादमी विषयगत लेखकक सूची बनबऽ चाहैत अछि जे ककरा कोन विधाक श्रेणीमे राखल जाय जाहिसॅ कि ओकरा आगाॅ सुविधा होइक कोनो विषयपर विचार करबा लेल ।हमरा एहि दृष्टिकोणसॅ आलेख तैयार करबाक अछि।'
- तॅ एहिमे कोन दिक्कत छह ।जकरा जाहि श्रेणीमे रखबाक हो राखि दहक ।मैथिलीक लेखक महाकाव्य सॅ लऽ कऽ नाटक ,उपन्यास ,कथा, व्यंग्य ,निबंध , रिपोर्ताज सभ किछु लिखि लैए ,अवसर टा भेंटबाक चाही ।मात्र दू गोत्र (भारद्वाज-रमण) पांजिक लेखक छोड़ि कऽ ,कारण ई मैथिलीक पैथोलाॅजिस्ट श्रेणी मे अबैत छथि।'
- कक्का तखन तॅ हमर लेख लेख नहि भऽ ऑलराउन्डरक सूची भऽ जायत आ लोक हॅसत । कोनो दोसर युक्ती बताउ।'
कक्का मुस्काइत बजलाह -जॅ शास्त्रीय विवेचन करबाक हो तॅ धनबली ,पदबली,पैरवीबली ,दरबारबली ,दक्षिणपंथी ,वामपंथी , दछिनाहा ,कुलीन , दलित आदि कोटिक जे लेखक छथि तनिक विस्तृत -व्यापक व्याख्या करैत आदि इत्यादि मे साहित्यसेवी , भाषासेवीक कोनहुना चर्चो टा कऽ देबहक तेॅ तोहर आलेख अकादमीक विशेष दर्जा पाबि लेतह ।
ई कहैत करिया कक्का डोल आ  लोटा लऽ पानि भरय इनार पर विदा भऽ गेलाह आ पदारथ सेहो हुलसैत अपना घर दिस विदा भऽ गेल ।

दैनिक 'हिन्दुस्तान' 19 फरवरी 2015सॅ साभार

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