Saturday, February 7, 2015

श्याम दरिहरेके दू गोट कविता

मधुबनीक बेनीपट्टी निवासी श्याम दरिहरे मैथिलीक प्रतिष्ठित कथाकार छथि ।हिनक दू गोट कथा संग्रह 'सरिसोमे भूत' आ 'बड़की काकी एट हाॅटमेल डाॅट काॅम' आबि चुकल अछि ।हिनका सरिसोमे भूतक लेल किरण सम्मान सेहो भेटल छनि  ।एम्हर हिनक किछु कविता पढ़बाक भेटल , शैली जरूरे गद्यात्मक छनि मुदा कविता अपनेक निराश नै करत ।अहूॅ देखू केहन बनि परल छनि हिनक कविता - माॅडरेटर

क्षमा करब हे महाकवि

माड़ भातक आशमे थेथरल
मुहथरि पर ठाढ़ि
छितनी सन केशमे दैत
खुरपा सन नहक कोड़नि
हमर कविताक साक्षात् नायिका
बुधनी
चोकरल आममे
संठीसन नेनाके देखैत छी
लगबैत चोभा
ने कोनो लावण्य
ने कोनो शोभा
तऽ लिखिऔ कोना
गरूअ नितम्ब
उपर कुच भार
आ कोनाकऽ लिखिऔ
नयन ने तिरपित भेल
लाउ कतऽ सऽ
एहन कल्पना दृष्टि
क्षभा करब हे महाकवि
नहि हैत किन्नहु हमरा बुते
एहन कविताक सृष्टि।
ओना ई नायिका सेहो छै अर्द्धवस्त्रा
अहींक नायिका सदृश
ओकरो ऑचर तर
पयोधर उघार छै
कतसऽ अनतै अंगिया
रोंआ रोंआ डूबल कर्ज आ उधार छै
पीन पयोधर छलनि ऑचर तर
अहाॅक सजनीक
होइत बैरसऽ सिरिफल
मुदा बुधनीक तऽ सैसव
सहजहि हेरायल छै
आ यौवन?
यौवन तऽ सजितहि
उसरल बजार छै।
कोनाकऽ
ओकर गुदडी अकाशमे
श्रृंगारक चेफरी हम लगाउ
शीत घाममे झमारल पछारल
मुरझायल लत्तीमे कोनाकऽ
मेरू सन नमहर फल हम फराउ
खधियामे धसल डोका सन ऑखिके
कोनाकऽ सारंग नाम धराउ
चारिमपनमे अहाॅक
निराश भेल परिणाम
तीनपन बीति गेल
कुचयुग-चिकुर-नितम्बक संधिमे
आ एमहर ई नायिका तऽ सबदिन
चारिएपन कटैए
दिन खाए फेर रातुक झखैए
सौंसे जिनगी तातल सैकत आ
भरल सदिखन ओकर
नयन वारि विन्दु छै
दुखक लागल पहाड़ आ
जिनगी अथाह सिन्धु छै।
मुनिहुक मनसिज
मनमथ जगौलहुॅ अहाॅ
देखाकऽ तीतल-वसन -तन
मुदा एकर वसन छै सदिखन भीजल
बिछैए दिनभरि
धोंधा आ खुरचन
कोनाकऽ जगतइ ककरो मन्मथ
देखि ओकर धधकैत आ
लहकैत मन।
एकदिन ओकरे संतापसऽ
समूचा पोखरि
लागि जेतै आगि
ओकरे धाहसऽ कोमलांगी अहाॅक
जएतीह कतहु भागि ओ
राजा शिवसिंह रूप नारायणके
सेहो जरायत
अहूॅक सौन्दर्य बोध
क्षणमे बिलाएत
तखन कोना करू हम
अहाॅक कविताक गान
क्षमा करब हे महाकवि
हमरा नहि फुरैए कोनो ज्ञान
हम बुडिबके कवि ठीक छी
जेतबे बुझै छी ओतबेमे नीक छी
अहाॅक समय भिन्न छल
हम समयक पाटमे फॅसल छी
इरखाक नागसऽ देह भरि डसल छी
सौंसे देह पर पेट अछि चतरल
गीत कविता सबटा अछि बिसरल
क्षमा करब हे महाकवि  ।

ला बूफादोरा

ला बूफादोरा ला बूफादोरा
मेक्सिको देश
बाहा कैलिफोर्निया प्रदेश
एनसानादा शहरक कातमे बसल
पुन्टा बन्डा पेनिनसुलाक
एकटा बेजोड़ मेरिन गाइजर
वा ब्लोहोल मेजर
कातमे बैसल छी पाथर पर असगर
नीचामे ला बुफादोराक गर्जन
समुद्रक फुहार
चलि रहल लगातार।
ज्ञानी सब कहलनि जे
समुद्रक लहरि ठेलिकऽ हवाके
कोंचि छै दैत भीतर गुफामे पहाड़क
आ जखन वापस छै होइत तरंग
तखन उठै छै खोहसऽ आसमर्द
जलमिश्रित भारी फुहारक।
कहलक एकटा मेक्सिकोवासी
जे अइ अवाज आ फुहारक
कथा छै दोसर
जे कहलनि हमर बाप
धऽकऽ अपन कान
सैकडो वर्ष पहिने
अइ गुफामे पैसि त गेलइ
व्हेलक एकटा बच्चा नादान
गुफाक पानिमे मोटाइओ गेलइ जल्दी
मुदा ओछ मुॅह दऽकऽ
नइ निकलि सकलइ
बेसी मोट भऽकऽ
वैह आब छोडइ छै
रहि रहिकऽ चीत्कार
देखबा लए ओकरे
होइ छै टूरिस्टक एते थहाथही ।
हमरा कोनो तर्क नइ अरघल
हम ओहिना रहलहुॅ बैसल
की तखने गुफासऽ निकलला
बूढा ला बुफादोरा अपने
सौंसे देह समुद्रक फेनसऽ झपने
आबिकऽ लगमे बैसला
आ लगला कहए इतिहास
कोना अही समुद्र दऽकऽ
एलइ स्पेनसऽ किछु बहेलिया
एकटा जहाज लऽकऽ
केलकइ मूलवासीक शिकार
भरलकइ अपन भंडार
देश पर कऽ लेलकइ अधिकार
आ बौआ ई सुद्धा बुद्धा लोक
भऽ गेलइ ठामहि गुलाम
आइयो बेसी मजूरे बनल छइ
हेरा गेलइ भाषा
बिला गेलइ भेष
नामो मेटा गेलइ
आब अइठामक लोकके
मैक्सिकन नइ
हिस्पैनिक कहइ छै
सबटा लोको आब स्पेनिसे बजइ छै ।
बदलि गेल सब
छइ नइ ककरो आब
ओइ सबहक परबाह
मुदा हम छी ला बुफादोरा
सबटाक अदउसऽ गबाह
ई आवाज अछि हमर विरोधक हुॅकार
जलक फुहार नहि
ओ अछि हमर हथियार
अन्यायक विरूद्ध फुफकार
आइयो हमर ई संघर्ष जारी अछि
ला बुफादोराक एकाकी ललकार
आइयो सब पर भारी अछि।

रचनाकार संपर्क
श्याम दरिहरे
मेल- shyamdarihare@gmail.com
मो .- 09431191332

साभार-मिथिला दर्शन

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